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कतर में अमेरिका-ईरान वार्ता तेज, जमी संपत्ति और MoU क्रियान्वयन पर अहम चर्चा
Digital Desk
दोहा में अप्रत्यक्ष वार्ता के दौरान जमी संपत्ति, हॉटलाइन व्यवस्था, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर अहम अप्रत्यक्ष वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच पहले हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन, ईरान की जमी हुई संपत्तियों के उपयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में लगातार तनाव बना हुआ है और दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। बातचीत में प्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए संवाद आगे बढ़ाया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है और कई प्रस्तावों पर आगे भी विचार किया जाएगा।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि इस दौर की बातचीत समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक विशेष संचार व्यवस्था यानी हॉटलाइन स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। प्रस्ताव है कि गुरुवार तक ऐसी प्रणाली तैयार की जाए जिसके जरिए यदि किसी भी पक्ष की ओर से MoU का उल्लंघन होता है तो उसकी जानकारी तुरंत साझा की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था भविष्य में विवादों को बढ़ने से रोकने और संवाद को जारी रखने में मददगार साबित हो सकती है।
बैठक का सबसे अहम विषय ईरान की विदेशों में जमी हुई संपत्ति रहा। कतर में रखी गई ईरान की अरबों डॉलर की राशि के उपयोग को लेकर दोनों पक्षों के बीच विस्तार से बातचीत हुई। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि इस राशि का इस्तेमाल सीधे नकद भुगतान के बजाय आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। इन वस्तुओं को बाद में ईरान भेजा जाएगा ताकि प्रतिबंधों के बीच भी जरूरी जरूरतें पूरी की जा सकें। बताया गया कि शुरुआती छह अरब डॉलर की राशि में से एक हिस्से के उपयोग के तौर-तरीकों पर भी कतर के अधिकारियों और वहां के केंद्रीय बैंक के साथ चर्चा हुई। ईरान का कहना है कि वह इस धनराशि का इस्तेमाल मानवीय जरूरतों और जरूरी सामान की खरीद तक सीमित रखना चाहता है।
वार्ता के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई। सभी संदेश और प्रस्ताव मध्यस्थ देशों के माध्यम से साझा किए गए। कतर लंबे समय से दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस बार पाकिस्तान की भी मध्यस्थता में भागीदारी रही, जिससे वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद मिली। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष बातचीत भले ही नहीं हुई हो, लेकिन अप्रत्यक्ष संवाद भी दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
दोहा में हुई बैठकों के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय बैठक में लेबनान की स्थिति, इजरायल की सैन्य गतिविधियों और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात पर विस्तार से विचार किया गया। ईरान ने आरोप लगाया कि लेबनान में इजरायल की सैन्य मौजूदगी समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन रही है। इसके साथ ही ईरान ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान की संप्रभुता है और इस क्षेत्र से जुड़े किसी भी निर्णय में उनकी भूमिका सर्वोपरि रहनी चाहिए।
बैठक में ओमान की ओर से दिए गए नए प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर भविष्य की रणनीति पर बातचीत जारी रहेगी। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल अब अपने-अपने देशों में इस प्रस्ताव का अध्ययन करेंगे और आवश्यक परामर्श के बाद अगली बैठक में अपना रुख स्पष्ट करेंगे। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।
ईरान ने वार्ता के दौरान यह भी मांग रखी कि MoU के पांच प्रमुख प्रावधानों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि समझौते के सभी बिंदुओं पर समान गति से काम होना जरूरी है ताकि किसी भी पक्ष को असंतोष का मौका न मिले। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष की ओर से सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वह भी चरणबद्ध तरीके से समझौते को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि दोहा में हुई यह वार्ता भविष्य की कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए अहम साबित हो सकती है। हालांकि अभी कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं, लेकिन बातचीत जारी रहने की सहमति अपने आप में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यदि जमी हुई संपत्तियों के उपयोग, हॉटलाइन व्यवस्था और समझौते के अन्य प्रावधानों पर ठोस प्रगति होती है तो इससे दोनों देशों के संबंधों में कुछ हद तक नरमी आ सकती है।
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कतर में अमेरिका-ईरान वार्ता तेज, जमी संपत्ति और MoU क्रियान्वयन पर अहम चर्चा
Digital Desk
कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर अहम अप्रत्यक्ष वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच पहले हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन, ईरान की जमी हुई संपत्तियों के उपयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में लगातार तनाव बना हुआ है और दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। बातचीत में प्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए संवाद आगे बढ़ाया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है और कई प्रस्तावों पर आगे भी विचार किया जाएगा।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि इस दौर की बातचीत समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक विशेष संचार व्यवस्था यानी हॉटलाइन स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। प्रस्ताव है कि गुरुवार तक ऐसी प्रणाली तैयार की जाए जिसके जरिए यदि किसी भी पक्ष की ओर से MoU का उल्लंघन होता है तो उसकी जानकारी तुरंत साझा की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था भविष्य में विवादों को बढ़ने से रोकने और संवाद को जारी रखने में मददगार साबित हो सकती है।
बैठक का सबसे अहम विषय ईरान की विदेशों में जमी हुई संपत्ति रहा। कतर में रखी गई ईरान की अरबों डॉलर की राशि के उपयोग को लेकर दोनों पक्षों के बीच विस्तार से बातचीत हुई। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि इस राशि का इस्तेमाल सीधे नकद भुगतान के बजाय आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। इन वस्तुओं को बाद में ईरान भेजा जाएगा ताकि प्रतिबंधों के बीच भी जरूरी जरूरतें पूरी की जा सकें। बताया गया कि शुरुआती छह अरब डॉलर की राशि में से एक हिस्से के उपयोग के तौर-तरीकों पर भी कतर के अधिकारियों और वहां के केंद्रीय बैंक के साथ चर्चा हुई। ईरान का कहना है कि वह इस धनराशि का इस्तेमाल मानवीय जरूरतों और जरूरी सामान की खरीद तक सीमित रखना चाहता है।
वार्ता के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई। सभी संदेश और प्रस्ताव मध्यस्थ देशों के माध्यम से साझा किए गए। कतर लंबे समय से दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस बार पाकिस्तान की भी मध्यस्थता में भागीदारी रही, जिससे वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद मिली। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष बातचीत भले ही नहीं हुई हो, लेकिन अप्रत्यक्ष संवाद भी दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
दोहा में हुई बैठकों के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय बैठक में लेबनान की स्थिति, इजरायल की सैन्य गतिविधियों और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात पर विस्तार से विचार किया गया। ईरान ने आरोप लगाया कि लेबनान में इजरायल की सैन्य मौजूदगी समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन रही है। इसके साथ ही ईरान ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान की संप्रभुता है और इस क्षेत्र से जुड़े किसी भी निर्णय में उनकी भूमिका सर्वोपरि रहनी चाहिए।
बैठक में ओमान की ओर से दिए गए नए प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर भविष्य की रणनीति पर बातचीत जारी रहेगी। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल अब अपने-अपने देशों में इस प्रस्ताव का अध्ययन करेंगे और आवश्यक परामर्श के बाद अगली बैठक में अपना रुख स्पष्ट करेंगे। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।
ईरान ने वार्ता के दौरान यह भी मांग रखी कि MoU के पांच प्रमुख प्रावधानों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि समझौते के सभी बिंदुओं पर समान गति से काम होना जरूरी है ताकि किसी भी पक्ष को असंतोष का मौका न मिले। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष की ओर से सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वह भी चरणबद्ध तरीके से समझौते को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि दोहा में हुई यह वार्ता भविष्य की कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए अहम साबित हो सकती है। हालांकि अभी कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं, लेकिन बातचीत जारी रहने की सहमति अपने आप में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यदि जमी हुई संपत्तियों के उपयोग, हॉटलाइन व्यवस्था और समझौते के अन्य प्रावधानों पर ठोस प्रगति होती है तो इससे दोनों देशों के संबंधों में कुछ हद तक नरमी आ सकती है।
