ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान ने फिल्म रामायण के लिए संगीत तैयार करने को लेकर चल रही चर्चाओं पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि इस प्रोजेक्ट से जुड़ने में उनके नाम या धार्मिक पहचान को लेकर उन्हें कभी कोई असहजता महसूस नहीं हुई। उनके मुताबिक, रामायण किसी एक धर्म की सीमाओं में बंधी कथा नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, आदर्शों और चरित्र निर्माण की सार्वकालिक कहानी है।
एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान को दिए गए साक्षात्कार में रहमान से यह सवाल किया गया था कि मुस्लिम नाम होने के बावजूद रामायण जैसे विषय पर काम करते समय क्या उन्हें किसी तरह की आपत्ति या विरोध की आशंका रही। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसी सोच उनके मन में कभी नहीं आई। रहमान ने बताया कि उनकी शुरुआती शिक्षा एक ऐसे स्कूल में हुई, जहां रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों का नियमित अध्ययन कराया जाता था। इसी कारण उन्हें इन कथाओं की गहरी समझ है और वे इन्हें जीवन मूल्यों की दृष्टि से देखते हैं।
रहमान ने कहा कि रामायण एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो नैतिकता, कर्तव्य और करुणा जैसे मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है। इन आदर्शों को किसी एक पहचान तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ज्ञान जहां से भी मिले, उसे ग्रहण किया जाना चाहिए। जीवन के अनुभव, सही-गलत दोनों तरह की घटनाएं और हर वर्ग के लोग हमें कुछ न कुछ सिखाते हैं।
संगीतकार ने यह भी स्वीकार किया कि बीते कुछ वर्षों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का स्वरूप बदला है। उनके अनुसार, अब कई बार रचनात्मक निर्णय ऐसे लोगों के हाथ में होते हैं जिनकी प्राथमिकताएं कला से ज्यादा व्यावसायिक होती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से कभी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन इंडस्ट्री में शक्ति संतुलन में आए बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फिल्म रामायण का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। फिल्म में रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी जैसे प्रमुख कलाकार नजर आएंगे। संगीत के स्तर पर यह फिल्म भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इसमें ए.आर. रहमान और हॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार हंस जिमर साथ काम कर रहे हैं। जहां रहमान भारतीय शास्त्रीय, संस्कृत श्लोक और गीतों की रचना कर रहे हैं, वहीं हंस जिमर बैकग्राउंड स्कोर और साउंड डिजाइन संभाल रहे हैं।
फिल्म के गीतों और भजनों के बोल प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने लिखे हैं। निर्माताओं का मानना है कि संगीत के जरिए रामायण की भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
संगीत प्रेमियों और सिनेमा जगत की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि जब यह बहुप्रतीक्षित फिल्म पर्दे पर आएगी, तो इसकी ध्वनि-योजना भारतीय पौराणिक कथाओं को किस नए आयाम में पेश करेगी।
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