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मॉब लिंचिंग केस में उम्रकैद के बाद जज को धमकी, वीडियो वायरल
Digital Desk
14 दोषियों को उम्रकैद सुनाने वाली एडीजे तबस्सुम खान को सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल के बाद पुलिस और साइबर सेल जांच में जुटी
मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में मॉब लिंचिंग केस में 14 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद एडीजे तबस्सुम खान को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक युवक और एक महिला की ओर से कथित तौर पर आपत्तिजनक और धमकी भरी बातें कही गईं, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल भी सक्रिय हो गई है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक युवक खुद को हिंदू भाइयों के समर्थन में बताते हुए कथित तौर पर जज पर गंभीर आरोप लगाता दिख रहा है। वीडियो में वह कहता है कि अगर निर्धारित समय में कुछ लोगों को रिहा नहीं किया गया तो बड़े स्तर पर हिंसा जैसी स्थिति बन सकती है। वहीं एक अन्य वीडियो में एक महिला भी जज के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करती नजर आती है। इन वीडियो के वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोषियों को धर्म के आधार पर नहीं बल्कि अदालत में साबित अपराध के आधार पर सजा मिली है और इस तरह की धमकियां कानून के खिलाफ हैं। प्रशासन की ओर से भी कहा गया है कि साइबर सेल वीडियो की जांच कर रही है और आरोपियों की पहचान की कोशिश की जा रही है।
यह पूरा मामला मध्यप्रदेश के सिवनी मालवा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां अगस्त 2022 में कथित तौर पर गो-तस्करी के शक में एक ट्रक को रोका गया था। ट्रक में करीब 30 मवेशी होने की बात सामने आई थी और इसी दौरान भीड़ ने उसमें सवार तीन लोगों पर हमला कर दिया था। इस घटना में एक व्यक्ति नाजिर अहमद की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। बाद में इस मामले की जांच पुलिस और अदालत के स्तर पर आगे बढ़ी और लंबे ट्रायल के बाद 14 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने सभी को हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और अन्य गंभीर धाराओं में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं और इसी बीच कथित तौर पर धमकी भरे वीडियो भी वायरल हो गए। पुलिस का कहना है कि मामला संज्ञान में आते ही साइबर सेल को सक्रिय किया गया और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। अधिकारियों के अनुसार वीडियो की सत्यता और उसमें शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। अभी तक जज की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने इलाके में माहौल को भी कुछ हद तक तनावपूर्ण बना दिया है, हालांकि प्रशासन की ओर से लगातार शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी न्यायिक अधिकारी पर इस तरह की धमकी देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए सख्त कार्रवाई संभव है। वहीं स्थानीय स्तर पर पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। पुलिस और साइबर सेल इस पूरे मामले की डिजिटल ट्रैकिंग में जुटी है और यह भी देखा जा रहा है कि वीडियो किस प्लेटफॉर्म से सबसे पहले अपलोड हुआ था। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि वीडियो को कई अकाउंट्स से शेयर किया गया, जिससे यह तेजी से वायरल हुआ। अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की भड़काऊ सामग्री पर रोक लगाना जरूरी है ताकि न्यायिक प्रक्रिया पर कोई असर न पड़े। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और पुलिस आगे की कार्रवाई सबूतों के आधार पर करेगी। स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ संदेश पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार मामले में तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल्स और डिजिटल फुटप्रिंट्स की भी जांच की जा रही है ताकि पूरी साजिश या वायरल नेटवर्क का पता लगाया जा सके। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनवेरिफाइड वीडियो या संदेश को शेयर करने से बचें और कानून पर भरोसा रखें। मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी और पुलिस का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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मॉब लिंचिंग केस में उम्रकैद के बाद जज को धमकी, वीडियो वायरल
Digital Desk
मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में मॉब लिंचिंग केस में 14 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद एडीजे तबस्सुम खान को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक युवक और एक महिला की ओर से कथित तौर पर आपत्तिजनक और धमकी भरी बातें कही गईं, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल भी सक्रिय हो गई है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक युवक खुद को हिंदू भाइयों के समर्थन में बताते हुए कथित तौर पर जज पर गंभीर आरोप लगाता दिख रहा है। वीडियो में वह कहता है कि अगर निर्धारित समय में कुछ लोगों को रिहा नहीं किया गया तो बड़े स्तर पर हिंसा जैसी स्थिति बन सकती है। वहीं एक अन्य वीडियो में एक महिला भी जज के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करती नजर आती है। इन वीडियो के वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोषियों को धर्म के आधार पर नहीं बल्कि अदालत में साबित अपराध के आधार पर सजा मिली है और इस तरह की धमकियां कानून के खिलाफ हैं। प्रशासन की ओर से भी कहा गया है कि साइबर सेल वीडियो की जांच कर रही है और आरोपियों की पहचान की कोशिश की जा रही है।
यह पूरा मामला मध्यप्रदेश के सिवनी मालवा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां अगस्त 2022 में कथित तौर पर गो-तस्करी के शक में एक ट्रक को रोका गया था। ट्रक में करीब 30 मवेशी होने की बात सामने आई थी और इसी दौरान भीड़ ने उसमें सवार तीन लोगों पर हमला कर दिया था। इस घटना में एक व्यक्ति नाजिर अहमद की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। बाद में इस मामले की जांच पुलिस और अदालत के स्तर पर आगे बढ़ी और लंबे ट्रायल के बाद 14 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने सभी को हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और अन्य गंभीर धाराओं में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं और इसी बीच कथित तौर पर धमकी भरे वीडियो भी वायरल हो गए। पुलिस का कहना है कि मामला संज्ञान में आते ही साइबर सेल को सक्रिय किया गया और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। अधिकारियों के अनुसार वीडियो की सत्यता और उसमें शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। अभी तक जज की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने इलाके में माहौल को भी कुछ हद तक तनावपूर्ण बना दिया है, हालांकि प्रशासन की ओर से लगातार शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी न्यायिक अधिकारी पर इस तरह की धमकी देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए सख्त कार्रवाई संभव है। वहीं स्थानीय स्तर पर पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। पुलिस और साइबर सेल इस पूरे मामले की डिजिटल ट्रैकिंग में जुटी है और यह भी देखा जा रहा है कि वीडियो किस प्लेटफॉर्म से सबसे पहले अपलोड हुआ था। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि वीडियो को कई अकाउंट्स से शेयर किया गया, जिससे यह तेजी से वायरल हुआ। अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की भड़काऊ सामग्री पर रोक लगाना जरूरी है ताकि न्यायिक प्रक्रिया पर कोई असर न पड़े। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और पुलिस आगे की कार्रवाई सबूतों के आधार पर करेगी। स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ संदेश पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार मामले में तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल्स और डिजिटल फुटप्रिंट्स की भी जांच की जा रही है ताकि पूरी साजिश या वायरल नेटवर्क का पता लगाया जा सके। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनवेरिफाइड वीडियो या संदेश को शेयर करने से बचें और कानून पर भरोसा रखें। मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी और पुलिस का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
