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HDFC बैंक के CEO समेत तीन शीर्ष अधिकारियों पर बोर्ड की कार्रवाई, ₹1-1 लाख का जुर्माना और चेतावनी जारी
बिजनेस डेस्क
MSRDC के साथ 2017 और 2021 के डिपॉजिट समझौतों की आंतरिक समीक्षा में 'बिजनेस ओवररीच' सामने आई, लेकिन दुर्भावना या व्यक्तिगत लाभ का कोई सबूत नहीं मिला।
देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक एक बार फिर सुर्खियों में है। बैंक के निदेशक मंडल (Board of Directors) ने सोमवार को एक अहम फैसला लेते हुए बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं CEO शशिधर जगदीशन, मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) श्रीनिवासन वैद्यनाथन और ग्रुप हेड (रिटेल एसेट्स) अरविंद वोहरा पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही तीनों अधिकारियों को चेतावनी पत्र भी जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) के साथ वर्ष 2017 और 2021 में हुए डिपॉजिट समझौतों की आंतरिक जांच के बाद की गई।
बैंक की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, विशेष अनुशासन समिति (Special Disciplinary Committee) ने मामले की विस्तृत समीक्षा की थी। समिति में केवल स्वतंत्र निदेशक शामिल थे। जांच के दौरान कुछ मामलों में "बिजनेस ओवररीच" यानी व्यावसायिक सीमाओं से आगे बढ़ने की स्थिति सामने आई, लेकिन किसी भी अधिकारी के खिलाफ दुर्भावना, निजी लाभ या व्यक्तिगत आर्थिक फायदा उठाने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
बोर्ड ने क्यों की कार्रवाई?
आंतरिक जांच में यह पाया गया कि MSRDC के साथ डिपॉजिट जुटाने के लिए कुछ ऐसे व्यावसायिक कदम उठाए गए, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों से अलग माने जा सकते हैं। हालांकि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि अधिकारियों का उद्देश्य किसी तरह का व्यक्तिगत लाभ कमाना नहीं था। इसके बावजूद बैंक बोर्ड ने माना कि बैंकिंग प्रणाली में नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसी कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी है।
जुर्माने के साथ अन्य कर्मचारियों, जिनकी भूमिका इस प्रक्रिया में सामने आई, उन्हें भी चेतावनी पत्र जारी किए गए हैं। बैंक ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी औपचारिक रूप से RBI को भी दी जाएगी।
क्या था पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MSRDC से बड़े डिपॉजिट हासिल करने के लिए बैंक ने कथित तौर पर अतिरिक्त भुगतान को "मार्केटिंग खर्च" के रूप में दिखाया था। आरोप था कि यह भुगतान वास्तव में डिपॉजिट जुटाने के लिए प्रोत्साहन (Incentive) के रूप में किया गया, जबकि RBI के नियम बैंकों को डिपॉजिट जुटाने के लिए इस प्रकार के प्रोत्साहन देने की अनुमति नहीं देते।
हालांकि बैंक का कहना है कि उसकी सभी प्रक्रियाएं मजबूत आंतरिक नियंत्रण, ऑडिट सिस्टम और निगरानी तंत्र के तहत संचालित हुईं और किसी भी प्रकार की जानबूझकर नियमों की अनदेखी नहीं की गई।
MSRDC अधिकारियों ने क्या कहा?
इस मामले पर पहले MSRDC के अधिकारियों ने कहा था कि इस तरह की व्यवस्था बैंकिंग उद्योग में लंबे समय से अपनाई जाती रही है। उनका कहना था कि कई बार बड़े डिपॉजिट के मामलों में अतिरिक्त भुगतान को "मार्केटिंग एक्सपेंस" के रूप में दिखाया जाता है ताकि भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई मिसाल न बने। साथ ही बैंकों द्वारा डिपॉजिट जुटाने वाले एजेंटों या मध्यस्थों को कमीशन देना भी आम उद्योग प्रथा का हिस्सा माना जाता है।
RBI की सख्ती के बीच आया फैसला
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारतीय रिजर्व बैंक लगातार बैंकों के निदेशक मंडलों को अधिक जवाबदेह और सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दे रहा है। RBI चाहता है कि बैंक बोर्ड केवल औपचारिक संस्थान न रहकर वास्तविक निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करें।
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मौजूदा CEO पर बैंक बोर्ड द्वारा सार्वजनिक रूप से नकद जुर्माना लगाए जाने की घटना बेहद दुर्लभ है। यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर एक मजबूत संदेश भी माना जा रहा है।
CEO का कार्यकाल भी खत्म होने वाला
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि HDFC बैंक के CEO शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त होने वाला है। ऐसे समय में बोर्ड की यह कार्रवाई भविष्य की नेतृत्व प्रक्रिया और नियामकीय निगरानी को लेकर भी चर्चा का विषय बन गई है।
जगदीशन के कार्यकाल के दौरान यह दूसरा बड़ा विवाद माना जा रहा है। इससे पहले उनका नाम लीलावती अस्पताल ट्रस्ट से जुड़े एक मामले में भी सामने आया था, हालांकि बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस FIR को रद्द कर दिया था। इसी वर्ष बैंक के गैर-कार्यकारी चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने भी "मूल्यों और नैतिकता" का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था।
शेयर बाजार पर असर
बैंक की ओर से जानकारी सार्वजनिक होने के बाद HDFC बैंक के शेयरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। दिन के कारोबार के अंत में बैंक का शेयर लगभग ₹3 गिरकर ₹739 पर बंद हुआ। हालांकि उसी दिन सेंसेक्स में 776 अंकों की मजबूती देखने को मिली, जिससे यह साफ हुआ कि निवेशकों ने इस घटनाक्रम को सीमित प्रभाव वाला माना।
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HDFC बैंक के CEO समेत तीन शीर्ष अधिकारियों पर बोर्ड की कार्रवाई, ₹1-1 लाख का जुर्माना और चेतावनी जारी
बिजनेस डेस्क
देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक एक बार फिर सुर्खियों में है। बैंक के निदेशक मंडल (Board of Directors) ने सोमवार को एक अहम फैसला लेते हुए बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं CEO शशिधर जगदीशन, मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) श्रीनिवासन वैद्यनाथन और ग्रुप हेड (रिटेल एसेट्स) अरविंद वोहरा पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही तीनों अधिकारियों को चेतावनी पत्र भी जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) के साथ वर्ष 2017 और 2021 में हुए डिपॉजिट समझौतों की आंतरिक जांच के बाद की गई।
बैंक की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, विशेष अनुशासन समिति (Special Disciplinary Committee) ने मामले की विस्तृत समीक्षा की थी। समिति में केवल स्वतंत्र निदेशक शामिल थे। जांच के दौरान कुछ मामलों में "बिजनेस ओवररीच" यानी व्यावसायिक सीमाओं से आगे बढ़ने की स्थिति सामने आई, लेकिन किसी भी अधिकारी के खिलाफ दुर्भावना, निजी लाभ या व्यक्तिगत आर्थिक फायदा उठाने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
बोर्ड ने क्यों की कार्रवाई?
आंतरिक जांच में यह पाया गया कि MSRDC के साथ डिपॉजिट जुटाने के लिए कुछ ऐसे व्यावसायिक कदम उठाए गए, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों से अलग माने जा सकते हैं। हालांकि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि अधिकारियों का उद्देश्य किसी तरह का व्यक्तिगत लाभ कमाना नहीं था। इसके बावजूद बैंक बोर्ड ने माना कि बैंकिंग प्रणाली में नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसी कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी है।
जुर्माने के साथ अन्य कर्मचारियों, जिनकी भूमिका इस प्रक्रिया में सामने आई, उन्हें भी चेतावनी पत्र जारी किए गए हैं। बैंक ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी औपचारिक रूप से RBI को भी दी जाएगी।
क्या था पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MSRDC से बड़े डिपॉजिट हासिल करने के लिए बैंक ने कथित तौर पर अतिरिक्त भुगतान को "मार्केटिंग खर्च" के रूप में दिखाया था। आरोप था कि यह भुगतान वास्तव में डिपॉजिट जुटाने के लिए प्रोत्साहन (Incentive) के रूप में किया गया, जबकि RBI के नियम बैंकों को डिपॉजिट जुटाने के लिए इस प्रकार के प्रोत्साहन देने की अनुमति नहीं देते।
हालांकि बैंक का कहना है कि उसकी सभी प्रक्रियाएं मजबूत आंतरिक नियंत्रण, ऑडिट सिस्टम और निगरानी तंत्र के तहत संचालित हुईं और किसी भी प्रकार की जानबूझकर नियमों की अनदेखी नहीं की गई।
MSRDC अधिकारियों ने क्या कहा?
इस मामले पर पहले MSRDC के अधिकारियों ने कहा था कि इस तरह की व्यवस्था बैंकिंग उद्योग में लंबे समय से अपनाई जाती रही है। उनका कहना था कि कई बार बड़े डिपॉजिट के मामलों में अतिरिक्त भुगतान को "मार्केटिंग एक्सपेंस" के रूप में दिखाया जाता है ताकि भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई मिसाल न बने। साथ ही बैंकों द्वारा डिपॉजिट जुटाने वाले एजेंटों या मध्यस्थों को कमीशन देना भी आम उद्योग प्रथा का हिस्सा माना जाता है।
RBI की सख्ती के बीच आया फैसला
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारतीय रिजर्व बैंक लगातार बैंकों के निदेशक मंडलों को अधिक जवाबदेह और सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दे रहा है। RBI चाहता है कि बैंक बोर्ड केवल औपचारिक संस्थान न रहकर वास्तविक निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करें।
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मौजूदा CEO पर बैंक बोर्ड द्वारा सार्वजनिक रूप से नकद जुर्माना लगाए जाने की घटना बेहद दुर्लभ है। यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर एक मजबूत संदेश भी माना जा रहा है।
CEO का कार्यकाल भी खत्म होने वाला
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि HDFC बैंक के CEO शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त होने वाला है। ऐसे समय में बोर्ड की यह कार्रवाई भविष्य की नेतृत्व प्रक्रिया और नियामकीय निगरानी को लेकर भी चर्चा का विषय बन गई है।
जगदीशन के कार्यकाल के दौरान यह दूसरा बड़ा विवाद माना जा रहा है। इससे पहले उनका नाम लीलावती अस्पताल ट्रस्ट से जुड़े एक मामले में भी सामने आया था, हालांकि बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस FIR को रद्द कर दिया था। इसी वर्ष बैंक के गैर-कार्यकारी चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने भी "मूल्यों और नैतिकता" का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था।
शेयर बाजार पर असर
बैंक की ओर से जानकारी सार्वजनिक होने के बाद HDFC बैंक के शेयरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। दिन के कारोबार के अंत में बैंक का शेयर लगभग ₹3 गिरकर ₹739 पर बंद हुआ। हालांकि उसी दिन सेंसेक्स में 776 अंकों की मजबूती देखने को मिली, जिससे यह साफ हुआ कि निवेशकों ने इस घटनाक्रम को सीमित प्रभाव वाला माना।
