- Hindi News
- स्पोर्ट्स
- इंग्लैंड के क्रिकेट मैच में ‘फिंगर स्नैप’ पर विवाद, बल्लेबाज को आउट कराने के लिए फील्डर पर अंपायर को...
इंग्लैंड के क्रिकेट मैच में ‘फिंगर स्नैप’ पर विवाद, बल्लेबाज को आउट कराने के लिए फील्डर पर अंपायर को भ्रमित करने का आरोप
स्पोर्ट्स डेस्क
गेंद बल्ले के करीब से गुजरते ही उंगलियां चटकाने का दावा, अंपायर ने कैच आउट दिया; वायरल वीडियो के बाद लीग ने शुरू की जांच
इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट में एक असामान्य घटना ने खेल भावना और निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सेकेंड इलेवन डिवीजन-2 के एक मुकाबले में फील्डर पर जानबूझकर अपनी उंगलियां चटकाकर अंपायर को भ्रमित करने का आरोप लगा है। दावा किया जा रहा है कि गेंद जिस समय बल्लेबाज के बल्ले के बेहद करीब से निकली, उसी समय फील्डर ने उंगलियों से ऐसी आवाज पैदा की, जिससे अंपायर को लगा कि गेंद ने बल्ले का किनारा लिया है।
घटना साल्टबर्न और नॉर्टन के बीच खेले गए मुकाबले की बताई जा रही है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हुआ। मामला बढ़ने पर नॉर्थ यॉर्कशायर एंड साउथ डरहम क्रिकेट लीग ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। लीग ने फिलहाल घटना पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और जांच पूरी होने तक विस्तृत टिप्पणी से इनकार किया है।
गेंद निकली बल्ले के पास से, तभी सुनाई दी आवाज
वायरल क्लिप में बल्लेबाज नोमान शब्बीर स्ट्राइक पर दिखाई देते हैं। गेंदबाज की डिलीवरी उनके बल्ले के बेहद करीब से निकलकर विकेटकीपर के दस्तानों में पहुंचती है। इसी दौरान स्लिप क्षेत्र की तरफ खड़े एक फील्डर के उंगलियां चटकाने का दावा किया जा रहा है।
गेंद विकेटकीपर जोश बोव्स के हाथों में पहुंचते ही साल्टबर्न के खिलाड़ियों ने कैच की अपील की। अंपायर ने अपील स्वीकार करते हुए बल्लेबाज को आउट करार दे दिया।
यहीं से पूरे मामले पर विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर वीडियो देखने वाले कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या अंपायर ने बल्ले और गेंद के संपर्क की वास्तविक आवाज सुनी थी या फील्डर की ओर से पैदा की गई आवाज के कारण फैसला प्रभावित हुआ।
हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर किसी खिलाड़ी की मंशा को निर्णायक रूप से साबित नहीं किया जा सकता। अब लीग की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि घटना जानबूझकर अंपायर को गुमराह करने की कोशिश थी या मैदान पर हुई किसी सामान्य गतिविधि को गलत तरीके से समझा गया।
अंपायर के फैसले पर सोशल मीडिया में बहस
वीडियो सामने आने के बाद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई। विवाद का केंद्र केवल आउट का फैसला नहीं, बल्कि कथित तौर पर पैदा की गई आवाज है।
आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर उस समय उंगलियां चटकाईं जब गेंद बल्ले के पास से निकल रही थी, तो इसका उद्देश्य अंपायर को एज का भ्रम देना हो सकता है। दूसरी तरफ इस पूरे मामले में जांच पूरी होने से पहले संबंधित फील्डर को दोषी ठहराना भी उचित नहीं होगा।
यह मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि क्रिकेट में विकेट के पीछे कैच के फैसलों में आवाज कई बार अहम भूमिका निभाती है। ऐसे स्तर के मुकाबलों में जहां हर मैच में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जैसी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, मैदानी अंपायर को अपने अवलोकन के आधार पर तुरंत फैसला लेना पड़ता है।
साल्टबर्न ने 159 रन से जीता मुकाबला
विवादित विकेट वाले मुकाबले में साल्टबर्न ने नॉर्टन को बड़े अंतर से हराया। साल्टबर्न ने मैच में 159 रन से जीत दर्ज की। इस जीत के बाद टीम डिवीजन-2 की अंक तालिका में 17 अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर बताई गई।
मैच खत्म होने के बाद जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा तो यह स्थानीय क्रिकेट के दायरे से निकलकर बड़े स्तर पर चर्चा में आ गया। वायरल क्लिप को लाखों बार देखा गया और इसके बाद मामले की औपचारिक जांच की मांग उठने लगी।
लीग के पास पहुंची औपचारिक शिकायत
नॉर्थ यॉर्कशायर एंड साउथ डरहम क्रिकेट लीग ने पुष्टि की कि डिवीजन-2 के इस मुकाबले से संबंधित घटना को लेकर शिकायत प्राप्त हुई है। इसके बाद लीग प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी।
लीग की ओर से संकेत दिया गया कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले घटना के संबंध में अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की जाएगी। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जांच में केवल वीडियो फुटेज देखा जाएगा या अंपायर, खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों के बयान भी लिए जाएंगे।
जांच का अहम पहलू यह पता लगाना होगा कि उंगलियां चटकाने की घटना वास्तव में हुई थी या नहीं और अगर हुई थी तो क्या उसका संबंध बल्लेबाज के खिलाफ की गई अपील से था।
पहले के मुकाबले को लेकर भी सामने आया दावा
वायरल वीडियो के बाद विवाद में एक और पहलू जुड़ गया। मिडलसब्रा सेकेंड इलेवन के कप्तान रोरी कॉटरिल ने प्रतिक्रिया देते हुए साल्टबर्न के खिलाफ पहले खेले गए एक मुकाबले को लेकर भी आरोप लगाए।
कॉटरिल ने दावा किया कि पिछले महीने उनकी टीम के साल्टबर्न के खिलाफ मुकाबले में भी दो ऐसी घटनाएं हुई थीं, जिन्हें लेकर सवाल उठे थे। उस मैच में मिडलसब्रा को 29 रन से हार मिली थी।
हालांकि, ये पुराने दावे अलग आरोप हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मौजूदा जांच मुख्य रूप से साल्टबर्न और नॉर्टन के मुकाबले में सामने आई घटना से जुड़ी है।
क्रिकेट के नियमों में ‘फेयर प्ले’ बेहद अहम
क्रिकेट के नियमों में बल्लेबाज को धोखा देने या अंपायर के निर्णय को अनुचित तरीके से प्रभावित करने जैसी गतिविधियों को गंभीरता से देखा जाता है। किसी भी घटना पर कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि मैच अधिकारियों या संबंधित प्रतियोगिता की अनुशासन समिति के सामने उपलब्ध सबूत क्या बताते हैं।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल फील्डर की मंशा को लेकर है। केवल उंगलियां चटकाने की गतिविधि और जानबूझकर अंपायर को एज का भ्रम देने के उद्देश्य से ऐसा करने में बड़ा अंतर है। लीग की जांच में इसी पहलू की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
तकनीक नहीं होने पर अंपायर के लिए चुनौती
शीर्ष स्तर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्निकोमीटर, अल्ट्राएज और वीडियो रिप्ले जैसी तकनीक बेहद करीबी कैच के फैसलों में मदद करती हैं। घरेलू और निचले स्तर की कई प्रतियोगिताओं में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं।
ऐसे में विकेटकीपर के पीछे कैच की अपील पर अंपायर को गेंद की दिशा, बल्ले की गतिविधि और आवाज जैसे संकेतों के आधार पर निर्णय करना पड़ सकता है। यही कारण है कि इस घटना में कथित ‘फिंगर स्नैप’ इतना बड़ा मुद्दा बन गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन लीग की जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि संबंधित खिलाड़ी या टीम के खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बनता है या नहीं।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
इंग्लैंड के क्रिकेट मैच में ‘फिंगर स्नैप’ पर विवाद, बल्लेबाज को आउट कराने के लिए फील्डर पर अंपायर को भ्रमित करने का आरोप
स्पोर्ट्स डेस्क
इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट में एक असामान्य घटना ने खेल भावना और निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सेकेंड इलेवन डिवीजन-2 के एक मुकाबले में फील्डर पर जानबूझकर अपनी उंगलियां चटकाकर अंपायर को भ्रमित करने का आरोप लगा है। दावा किया जा रहा है कि गेंद जिस समय बल्लेबाज के बल्ले के बेहद करीब से निकली, उसी समय फील्डर ने उंगलियों से ऐसी आवाज पैदा की, जिससे अंपायर को लगा कि गेंद ने बल्ले का किनारा लिया है।
घटना साल्टबर्न और नॉर्टन के बीच खेले गए मुकाबले की बताई जा रही है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हुआ। मामला बढ़ने पर नॉर्थ यॉर्कशायर एंड साउथ डरहम क्रिकेट लीग ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। लीग ने फिलहाल घटना पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और जांच पूरी होने तक विस्तृत टिप्पणी से इनकार किया है।
गेंद निकली बल्ले के पास से, तभी सुनाई दी आवाज
वायरल क्लिप में बल्लेबाज नोमान शब्बीर स्ट्राइक पर दिखाई देते हैं। गेंदबाज की डिलीवरी उनके बल्ले के बेहद करीब से निकलकर विकेटकीपर के दस्तानों में पहुंचती है। इसी दौरान स्लिप क्षेत्र की तरफ खड़े एक फील्डर के उंगलियां चटकाने का दावा किया जा रहा है।
गेंद विकेटकीपर जोश बोव्स के हाथों में पहुंचते ही साल्टबर्न के खिलाड़ियों ने कैच की अपील की। अंपायर ने अपील स्वीकार करते हुए बल्लेबाज को आउट करार दे दिया।
यहीं से पूरे मामले पर विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर वीडियो देखने वाले कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या अंपायर ने बल्ले और गेंद के संपर्क की वास्तविक आवाज सुनी थी या फील्डर की ओर से पैदा की गई आवाज के कारण फैसला प्रभावित हुआ।
हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर किसी खिलाड़ी की मंशा को निर्णायक रूप से साबित नहीं किया जा सकता। अब लीग की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि घटना जानबूझकर अंपायर को गुमराह करने की कोशिश थी या मैदान पर हुई किसी सामान्य गतिविधि को गलत तरीके से समझा गया।
अंपायर के फैसले पर सोशल मीडिया में बहस
वीडियो सामने आने के बाद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई। विवाद का केंद्र केवल आउट का फैसला नहीं, बल्कि कथित तौर पर पैदा की गई आवाज है।
आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर उस समय उंगलियां चटकाईं जब गेंद बल्ले के पास से निकल रही थी, तो इसका उद्देश्य अंपायर को एज का भ्रम देना हो सकता है। दूसरी तरफ इस पूरे मामले में जांच पूरी होने से पहले संबंधित फील्डर को दोषी ठहराना भी उचित नहीं होगा।
यह मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि क्रिकेट में विकेट के पीछे कैच के फैसलों में आवाज कई बार अहम भूमिका निभाती है। ऐसे स्तर के मुकाबलों में जहां हर मैच में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जैसी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, मैदानी अंपायर को अपने अवलोकन के आधार पर तुरंत फैसला लेना पड़ता है।
साल्टबर्न ने 159 रन से जीता मुकाबला
विवादित विकेट वाले मुकाबले में साल्टबर्न ने नॉर्टन को बड़े अंतर से हराया। साल्टबर्न ने मैच में 159 रन से जीत दर्ज की। इस जीत के बाद टीम डिवीजन-2 की अंक तालिका में 17 अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर बताई गई।
मैच खत्म होने के बाद जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा तो यह स्थानीय क्रिकेट के दायरे से निकलकर बड़े स्तर पर चर्चा में आ गया। वायरल क्लिप को लाखों बार देखा गया और इसके बाद मामले की औपचारिक जांच की मांग उठने लगी।
लीग के पास पहुंची औपचारिक शिकायत
नॉर्थ यॉर्कशायर एंड साउथ डरहम क्रिकेट लीग ने पुष्टि की कि डिवीजन-2 के इस मुकाबले से संबंधित घटना को लेकर शिकायत प्राप्त हुई है। इसके बाद लीग प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी।
लीग की ओर से संकेत दिया गया कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले घटना के संबंध में अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की जाएगी। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जांच में केवल वीडियो फुटेज देखा जाएगा या अंपायर, खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों के बयान भी लिए जाएंगे।
जांच का अहम पहलू यह पता लगाना होगा कि उंगलियां चटकाने की घटना वास्तव में हुई थी या नहीं और अगर हुई थी तो क्या उसका संबंध बल्लेबाज के खिलाफ की गई अपील से था।
पहले के मुकाबले को लेकर भी सामने आया दावा
वायरल वीडियो के बाद विवाद में एक और पहलू जुड़ गया। मिडलसब्रा सेकेंड इलेवन के कप्तान रोरी कॉटरिल ने प्रतिक्रिया देते हुए साल्टबर्न के खिलाफ पहले खेले गए एक मुकाबले को लेकर भी आरोप लगाए।
कॉटरिल ने दावा किया कि पिछले महीने उनकी टीम के साल्टबर्न के खिलाफ मुकाबले में भी दो ऐसी घटनाएं हुई थीं, जिन्हें लेकर सवाल उठे थे। उस मैच में मिडलसब्रा को 29 रन से हार मिली थी।
हालांकि, ये पुराने दावे अलग आरोप हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मौजूदा जांच मुख्य रूप से साल्टबर्न और नॉर्टन के मुकाबले में सामने आई घटना से जुड़ी है।
क्रिकेट के नियमों में ‘फेयर प्ले’ बेहद अहम
क्रिकेट के नियमों में बल्लेबाज को धोखा देने या अंपायर के निर्णय को अनुचित तरीके से प्रभावित करने जैसी गतिविधियों को गंभीरता से देखा जाता है। किसी भी घटना पर कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि मैच अधिकारियों या संबंधित प्रतियोगिता की अनुशासन समिति के सामने उपलब्ध सबूत क्या बताते हैं।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल फील्डर की मंशा को लेकर है। केवल उंगलियां चटकाने की गतिविधि और जानबूझकर अंपायर को एज का भ्रम देने के उद्देश्य से ऐसा करने में बड़ा अंतर है। लीग की जांच में इसी पहलू की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
तकनीक नहीं होने पर अंपायर के लिए चुनौती
शीर्ष स्तर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्निकोमीटर, अल्ट्राएज और वीडियो रिप्ले जैसी तकनीक बेहद करीबी कैच के फैसलों में मदद करती हैं। घरेलू और निचले स्तर की कई प्रतियोगिताओं में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं।
ऐसे में विकेटकीपर के पीछे कैच की अपील पर अंपायर को गेंद की दिशा, बल्ले की गतिविधि और आवाज जैसे संकेतों के आधार पर निर्णय करना पड़ सकता है। यही कारण है कि इस घटना में कथित ‘फिंगर स्नैप’ इतना बड़ा मुद्दा बन गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन लीग की जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि संबंधित खिलाड़ी या टीम के खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बनता है या नहीं।
