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कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला धनखड़ का गोल्ड, भारत ने एक दिन में जीते 6 मेडल
स्पोर्ट्स डेस्क
पैरा शॉट पुट F57 में 9.81 मीटर के सीजन बेस्ट थ्रो से रचा इतिहास; सर्वेश कुशारे ने हाई जंप और अजय बाबू-ज्ञानेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सोमवार का दिन भारतीय दल के लिए अब तक का सबसे शानदार दिन रहा। पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के साथ शर्मिला कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने ब्रॉन्ज हासिल किया। यानी एक ही इवेंट के पोडियम पर भारत के दो खिलाड़ी रहे। शर्मिला का यह गोल्ड मौजूदा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले वेटलिफ्टिंग के महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में मीराबाई चानू ने भारत को पहला गोल्ड दिलाया था।
सोमवार को भारत ने अलग-अलग स्पर्धाओं में कुल छह पदक जोड़े। शर्मिला के गोल्ड के अलावा सर्वेश कुशारे, ज्ञानेश्वरी यादव और वल्लूरी अजय बाबू ने सिल्वर जीते, जबकि शिल्पा के. शायला और बिंदियारानी देवी के हिस्से में ब्रॉन्ज आया। एक ही दिन में छह मेडल मिलने से भारतीय दल की मेडल टैली में भी तेजी से इजाफा हुआ और कुल पदकों की संख्या 10 तक पहुंच गई। शर्मिला के प्रदर्शन की खास बात उनका 9.81 मीटर का थ्रो रहा। F57 कैटेगरी में ऐसे पैरा एथलीट हिस्सा लेते हैं जिनके निचले अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और खिलाड़ी बैठकर थ्रो करते हैं। इस मुकाबले में शिल्पा ने भी भारत को दूसरा पदक दिलाया। उनका ब्रॉन्ज एक समीक्षा के बाद तय हुआ। इस तरह भारत ने पैरा एथलेटिक्स की एक ही स्पर्धा में दो पदक हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया।
एथलेटिक्स ट्रैक और फील्ड में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। पुरुष हाई जंप फाइनल में सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष हाई जंप में किसी भारतीय का पहला पदक है। सर्वेश का मुकाबला काफी करीबी रहा और उन्होंने शुरुआती प्रयासों से ही खुद को पदक की दौड़ में बनाए रखा। भारत के आदर्श राम 2.15 मीटर के साथ पांचवें स्थान पर रहे, जबकि तेजस्विन शंकर प्रतियोगिता पूरी नहीं कर सके। पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ में तेजस शिरसे भी फाइनल तक पहुंचे।
हालांकि फाइनल में वे 15.39 सेकेंड के समय के साथ आठवें स्थान पर रहे। मेडल नहीं आया, लेकिन इस स्पर्धा के कॉमनवेल्थ गेम्स फाइनल तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बनकर उन्होंने भी एक उपलब्धि अपने नाम की। वहीं पुरुष लॉन्ग जंप क्वालिफिकेशन में एम. श्रीशंकर ने 8.01 मीटर की छलांग के साथ फाइनल में जगह बनाई। लोकेश सत्यनाथन भी 7.77 मीटर के प्रयास के साथ फाइनल में पहुंच गए। इससे भारतीय एथलेटिक्स दल के लिए आगे भी पदक की उम्मीद बनी हुई है।
वेटलिफ्टिंग से सोमवार को भारत की झोली में तीन और मेडल आए। महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग में ज्ञानेश्वरी यादव ने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल हासिल किया। उन्होंने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का वजन उठाया। महिलाओं के 58 किलोग्राम वर्ग में बिंदियारानी देवी ने ब्रॉन्ज जीता। उनका कुल वजन भी 199 किलोग्राम रहा, जिसमें 87 किलोग्राम स्नैच और 112 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क शामिल था। पुरुषों के 79 किलोग्राम वर्ग में वल्लूरी अजय बाबू ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया।
उन्होंने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाया। स्नैच में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 149 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम रहा। इससे पहले मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतकर भारतीय अभियान को बड़ी शुरुआत दी थी। रिषिकांता सिंह और मुथुपंडी राजा भी वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल हासिल कर चुके हैं, जबकि पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज जीता है। सोमवार की सफलता के बाद भारत के खाते में दो गोल्ड सहित कुल 10 पदक दर्ज हो गए। उपलब्ध ताजा मेडल टैली के मुताबिक भारत आठवें स्थान तक पहुंच गया है।
भारत के लिए शर्मिला धनखड़ का मेडल इन सभी नतीजों में अलग जगह रखता है। उनका गोल्ड केवल मौजूदा गेम्स का दूसरा भारतीय स्वर्ण नहीं है, बल्कि पैरा एथलेटिक्स में भारत का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड भी है। 40 वर्षीय शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट निकालकर बड़े मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इसी इवेंट में शिल्पा के ब्रॉन्ज ने भारतीय पैरा दल की सफलता को दोगुना कर दिया। भारत के लिए एक ही पैरा एथलेटिक्स इवेंट में दो खिलाड़ियों का पोडियम पर पहुंचना भी पहली बार हुआ है। सोमवार से पहले भारतीय दल की पदक संख्या चार थी, लेकिन एक दिन में आए छह मेडल ने तस्वीर बदल दी। खास तौर पर एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग से लगातार पदक आने के कारण भारत मेडल टैली में ऊपर आया। शर्मिला और सर्वेश के नतीजों के साथ मैदान की स्पर्धाओं में भी भारतीय चुनौती मजबूत हुई है। लॉन्ग जंप में श्रीशंकर और लोकेश के फाइनल में पहुंचने से अगले मुकाबलों पर भी नजर रहेगी। स्विमिंग में साजन प्रकाश ने पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई हीट में 1 मिनट 58.59 सेकेंड का समय निकालकर फाइनल में जगह बनाई है।
शर्मिला की स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला का ब्रॉन्ज भी काफी उतार-चढ़ाव के बाद आया। शुरुआती नतीजों के बाद समीक्षा की स्थिति बनी और आखिरकार शिल्पा को कांस्य पदक मिला। उन्होंने 7.26 मीटर का थ्रो किया। इसके साथ ही महिलाओं के F57 शॉट पुट में गोल्ड और ब्रॉन्ज दोनों भारत के खाते में आ गए। भारतीय दल के लिए सोमवार को मेडल का सिलसिला अलग-अलग खेलों में चलता रहा। वेटलिफ्टिंग में ज्ञानेश्वरी और बिंदियारानी के बाद अजय बाबू ने पोडियम हासिल किया, जबकि एथलेटिक्स में सर्वेश ने 2.25 मीटर की छलांग से भारत का सिल्वर पक्का किया। भारतीय दल के अब तक के 10 पदकों में वेटलिफ्टिंग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। वहीं पैरा एथलेटिक्स में शर्मिला और शिल्पा के एक साथ पोडियम पर आने से उस हिस्से में भी भारत ने इतिहास दर्ज किया है। प्रतियोगिता के अगले मुकाबलों में भारतीय एथलीटों की नजर अब पदक संख्या को और आगे ले जाने पर रहेगी।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला धनखड़ का गोल्ड, भारत ने एक दिन में जीते 6 मेडल
स्पोर्ट्स डेस्क
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सोमवार का दिन भारतीय दल के लिए अब तक का सबसे शानदार दिन रहा। पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के साथ शर्मिला कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने ब्रॉन्ज हासिल किया। यानी एक ही इवेंट के पोडियम पर भारत के दो खिलाड़ी रहे। शर्मिला का यह गोल्ड मौजूदा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले वेटलिफ्टिंग के महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में मीराबाई चानू ने भारत को पहला गोल्ड दिलाया था।
सोमवार को भारत ने अलग-अलग स्पर्धाओं में कुल छह पदक जोड़े। शर्मिला के गोल्ड के अलावा सर्वेश कुशारे, ज्ञानेश्वरी यादव और वल्लूरी अजय बाबू ने सिल्वर जीते, जबकि शिल्पा के. शायला और बिंदियारानी देवी के हिस्से में ब्रॉन्ज आया। एक ही दिन में छह मेडल मिलने से भारतीय दल की मेडल टैली में भी तेजी से इजाफा हुआ और कुल पदकों की संख्या 10 तक पहुंच गई। शर्मिला के प्रदर्शन की खास बात उनका 9.81 मीटर का थ्रो रहा। F57 कैटेगरी में ऐसे पैरा एथलीट हिस्सा लेते हैं जिनके निचले अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और खिलाड़ी बैठकर थ्रो करते हैं। इस मुकाबले में शिल्पा ने भी भारत को दूसरा पदक दिलाया। उनका ब्रॉन्ज एक समीक्षा के बाद तय हुआ। इस तरह भारत ने पैरा एथलेटिक्स की एक ही स्पर्धा में दो पदक हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया।
एथलेटिक्स ट्रैक और फील्ड में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। पुरुष हाई जंप फाइनल में सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष हाई जंप में किसी भारतीय का पहला पदक है। सर्वेश का मुकाबला काफी करीबी रहा और उन्होंने शुरुआती प्रयासों से ही खुद को पदक की दौड़ में बनाए रखा। भारत के आदर्श राम 2.15 मीटर के साथ पांचवें स्थान पर रहे, जबकि तेजस्विन शंकर प्रतियोगिता पूरी नहीं कर सके। पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ में तेजस शिरसे भी फाइनल तक पहुंचे।
हालांकि फाइनल में वे 15.39 सेकेंड के समय के साथ आठवें स्थान पर रहे। मेडल नहीं आया, लेकिन इस स्पर्धा के कॉमनवेल्थ गेम्स फाइनल तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बनकर उन्होंने भी एक उपलब्धि अपने नाम की। वहीं पुरुष लॉन्ग जंप क्वालिफिकेशन में एम. श्रीशंकर ने 8.01 मीटर की छलांग के साथ फाइनल में जगह बनाई। लोकेश सत्यनाथन भी 7.77 मीटर के प्रयास के साथ फाइनल में पहुंच गए। इससे भारतीय एथलेटिक्स दल के लिए आगे भी पदक की उम्मीद बनी हुई है।
वेटलिफ्टिंग से सोमवार को भारत की झोली में तीन और मेडल आए। महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग में ज्ञानेश्वरी यादव ने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल हासिल किया। उन्होंने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का वजन उठाया। महिलाओं के 58 किलोग्राम वर्ग में बिंदियारानी देवी ने ब्रॉन्ज जीता। उनका कुल वजन भी 199 किलोग्राम रहा, जिसमें 87 किलोग्राम स्नैच और 112 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क शामिल था। पुरुषों के 79 किलोग्राम वर्ग में वल्लूरी अजय बाबू ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया।
उन्होंने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाया। स्नैच में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 149 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम रहा। इससे पहले मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतकर भारतीय अभियान को बड़ी शुरुआत दी थी। रिषिकांता सिंह और मुथुपंडी राजा भी वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल हासिल कर चुके हैं, जबकि पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज जीता है। सोमवार की सफलता के बाद भारत के खाते में दो गोल्ड सहित कुल 10 पदक दर्ज हो गए। उपलब्ध ताजा मेडल टैली के मुताबिक भारत आठवें स्थान तक पहुंच गया है।
भारत के लिए शर्मिला धनखड़ का मेडल इन सभी नतीजों में अलग जगह रखता है। उनका गोल्ड केवल मौजूदा गेम्स का दूसरा भारतीय स्वर्ण नहीं है, बल्कि पैरा एथलेटिक्स में भारत का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड भी है। 40 वर्षीय शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट निकालकर बड़े मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इसी इवेंट में शिल्पा के ब्रॉन्ज ने भारतीय पैरा दल की सफलता को दोगुना कर दिया। भारत के लिए एक ही पैरा एथलेटिक्स इवेंट में दो खिलाड़ियों का पोडियम पर पहुंचना भी पहली बार हुआ है। सोमवार से पहले भारतीय दल की पदक संख्या चार थी, लेकिन एक दिन में आए छह मेडल ने तस्वीर बदल दी। खास तौर पर एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग से लगातार पदक आने के कारण भारत मेडल टैली में ऊपर आया। शर्मिला और सर्वेश के नतीजों के साथ मैदान की स्पर्धाओं में भी भारतीय चुनौती मजबूत हुई है। लॉन्ग जंप में श्रीशंकर और लोकेश के फाइनल में पहुंचने से अगले मुकाबलों पर भी नजर रहेगी। स्विमिंग में साजन प्रकाश ने पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई हीट में 1 मिनट 58.59 सेकेंड का समय निकालकर फाइनल में जगह बनाई है।
शर्मिला की स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला का ब्रॉन्ज भी काफी उतार-चढ़ाव के बाद आया। शुरुआती नतीजों के बाद समीक्षा की स्थिति बनी और आखिरकार शिल्पा को कांस्य पदक मिला। उन्होंने 7.26 मीटर का थ्रो किया। इसके साथ ही महिलाओं के F57 शॉट पुट में गोल्ड और ब्रॉन्ज दोनों भारत के खाते में आ गए। भारतीय दल के लिए सोमवार को मेडल का सिलसिला अलग-अलग खेलों में चलता रहा। वेटलिफ्टिंग में ज्ञानेश्वरी और बिंदियारानी के बाद अजय बाबू ने पोडियम हासिल किया, जबकि एथलेटिक्स में सर्वेश ने 2.25 मीटर की छलांग से भारत का सिल्वर पक्का किया। भारतीय दल के अब तक के 10 पदकों में वेटलिफ्टिंग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। वहीं पैरा एथलेटिक्स में शर्मिला और शिल्पा के एक साथ पोडियम पर आने से उस हिस्से में भी भारत ने इतिहास दर्ज किया है। प्रतियोगिता के अगले मुकाबलों में भारतीय एथलीटों की नजर अब पदक संख्या को और आगे ले जाने पर रहेगी।
