मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: विकास योजनाओं को ₹2480 करोड़, IT पार्क से 8 हजार रोजगार

मध्य प्रदेश

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भोपाल में महिला एशियन हॉकी चैम्पियंस ट्रॉफी को मंजूरी, सिंचाई से महिला सशक्तिकरण तक कई योजनाओं पर मुहर; किसानों की बोनस योजना भी जारी रहेगी

भोपाल में मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में विकास, रोजगार, सिंचाई, तकनीक, खेल और महिला सुरक्षा से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार के मुताबिक प्रदेश में बुनियादी ढांचे और अलग-अलग विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए करीब 2 हजार 480 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृतियां दी गई हैं। बैठक में सबसे ज्यादा फोकस उन योजनाओं पर रहा, जिनका संचालन अगले पांच वर्षों तक जारी रहना है। आईटी पार्कों के विस्तार से लेकर ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करने वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, दो बड़ी सिंचाई परियोजनाओं और महिला कल्याण योजनाओं तक पर कैबिनेट ने निर्णय लिया। अक्टूबर 2026 में भोपाल में महिला एशियन हॉकी चैम्पियंस ट्रॉफी कराने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके लिए 18.74 करोड़ रुपए तक खर्च किए जा सकेंगे।

प्रतियोगिता बरखेड़ा नाथू स्थित इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रस्तावित है। इसमें भारत के साथ चीन, जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड की महिला हॉकी टीमों के आने की संभावना है। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को मिलाकर करीब 200 सदस्य आयोजन का हिस्सा हो सकते हैं। प्रतियोगिता हॉकी इंडिया और मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से होगी। प्रस्तावित खर्च में 11 करोड़ रुपए हॉकी इंडिया को प्रेजेंटिंग पार्टनर राइट्स के लिए और करीब 7.74 करोड़ रुपए अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाने हैं। सरकार का मानना है कि इस स्तर का अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट भोपाल में होने से प्रदेश में तैयार खेल सुविधाओं को बड़े मंच पर पहचान मिलेगी।

कैबिनेट में रोजगार और तकनीकी निवेश से जुड़ा बड़ा निर्णय प्रदेश के आईटी पार्कों को लेकर हुआ। आईटी पार्क स्थापना योजना के लिए 595 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है और योजना को 2031 तक जारी रखने का रास्ता साफ किया गया। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में विकसित आईटी पार्क और आईटी टावरों के जरिए नए निवेश को आकर्षित करने की तैयारी है। सरकार का अनुमान है कि योजना से आने वाले समय में 8 हजार से अधिक स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार हो सकते हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार इन गतिविधियों से अब तक करीब 22 हजार युवाओं को रोजगार मिल चुका है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हुए समझौतों को जमीन पर उतारकर आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को आगे बढ़ाने की योजना भी इससे जुड़ी है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं को मिलाकर 857.21 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इसी में IISER भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना शामिल है। इस केंद्र की कुल लागत 85.51 करोड़ रुपए बताई गई है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी, UAV डिजाइन, स्वायत्त प्रणालियों और ड्रोन निर्माण से जुड़े अनुसंधान पर काम किया जाएगा। स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन, प्रोटोटाइप तैयार करने और परीक्षण की सुविधा भी विकसित करने की तैयारी है। नई तकनीक के लिए MPSEDC और अन्य संस्थाओं की सहायता पर 110 करोड़ रुपए रखे गए हैं। इसमें AI और मशीन लर्निंग आधारित बिजनेस इंटेलिजेंस, वॉट्सऐप चैटबॉट, ई-साइन, ड्रोन सर्विस, सिक्योरिटी ऑडिट लैब और दूसरी डिजिटल सेवाओं पर काम होगा। स्टेट स्पेशियल डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 40.20 करोड़ और सरकारी विभागों को क्लाउड सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 26.50 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है।

खेती और सिंचाई के मोर्चे पर सिंगरौली की रिहंद माइक्रो सिंचाई परियोजना को 2031 तक चलाने के लिए 111.04 करोड़ रुपए मंजूर किए गए। परियोजना के जरिए गोविंद वल्लभ पंत सागर जलाशय से पानी उठाकर सिंगरौली क्षेत्र की चार तहसीलों के 119 गांवों तक पहुंचाने की योजना है। इससे करीब 38 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के संचालन पर भी कैबिनेट ने मुहर लगाई। इसके लिए 184.20 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। परियोजना से लगभग 46,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता तैयार करने की योजना है। किसानों से समर्थन मूल्य पर होने वाली उपज खरीदी पर बोनस भुगतान की योजना को भी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की स्वीकृति दी गई। यानी सरकार ने फिलहाल इस योजना को बंद करने के बजाय अगले वित्त आयोग की अवधि तक आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए भी अलग से बड़ा प्रावधान किया गया है। मिशन शक्ति की सामर्थ्य उपयोजना के तहत संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास के संचालन के लिए 198.59 करोड़ रुपए मंजूर किए गए। संकल्प हब के जरिए महिलाओं को सरकारी योजनाओं, अधिकारों और उपलब्ध सहायता तक पहुंचाने पर काम होगा। अभी यह व्यवस्था 52 जिलों में है और तीन नए जिलों में भी इसे शुरू किया जाएगा। संकट में फंसी या तस्करी से प्रभावित महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए चल रहे शक्ति सदनों की संख्या बढ़ाने की तैयारी है। प्रदेश में फिलहाल 14 शक्ति सदन गैर-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं और पांच नए केंद्रों को मंजूरी मिली है। कामकाजी महिलाओं के सुरक्षित आवास के लिए सखी निवास योजना भी जारी रहेगी। यहां रहने वाली महिलाओं के छोटे बच्चों के लिए डे-केयर की व्यवस्था का प्रावधान भी है।

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों से संबंधित योजनाओं के संचालन के लिए कैबिनेट ने 982.49 करोड़ रुपए की मंजूरी दी। इस राशि से पेंशन, भविष्य निधि, बीमा, पेंशनर कल्याण कोष, कर्मचारी समूह बीमा और परिवार कल्याण निधि जैसी व्यवस्थाएं 2031 तक जारी रखी जाएंगी। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालन और प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए 129.12 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसमें मिशन कर्मयोगी, अकादमी की संपत्तियों के रखरखाव और प्रशिक्षण के लिए जरूरी सुविधाओं का विकास शामिल रहेगा।

ग्वालियर में विद्युत सुरक्षा निरीक्षकालय का नया वृत्त कार्यालय खोलने को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। इसके साथ नौ नए पद सृजित किए जाएंगे। अभी ग्वालियर और चंबल संभाग से जुड़े विद्युत सुरक्षा और राजस्व संग्रह के कई काम भोपाल मुख्यालय से होते हैं। नया कार्यालय शुरू होने से मुरैना के बामौर और भिंड के मालनपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे फायदा मिलने की उम्मीद है। मुरैना में भविष्य में प्रस्तावित 600 मेगावाट बैटरी स्टोरेज सोलर पावर प्लांट को देखते हुए भी इस कार्यालय की जरूरत बताई गई है। मंदसौर जिले के नारायणगढ़ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के एक पद समेत कुल नौ नए न्यायिक पद बनाने की मंजूरी दी गई है। इससे स्थानीय स्तर पर नियमित न्यायालय संचालन और लंबित प्रकरणों की सुनवाई में मदद मिलने की उम्मीद है। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम, 2011 में बदलाव को भी स्वीकृति दी। यह संशोधन केंद्र के जनविश्वास संबंधी प्रावधानों और अनुपालन का बोझ कम करने की प्रक्रिया के तहत किया गया है। इसमें नाप-तौल उपकरणों के सत्यापन शुल्क से जुड़े प्रावधानों का पुनरीक्षण भी शामिल है।

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28 Jul 2026 By Priyanka

मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: विकास योजनाओं को ₹2480 करोड़, IT पार्क से 8 हजार रोजगार

मध्य प्रदेश

भोपाल में मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में विकास, रोजगार, सिंचाई, तकनीक, खेल और महिला सुरक्षा से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार के मुताबिक प्रदेश में बुनियादी ढांचे और अलग-अलग विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए करीब 2 हजार 480 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृतियां दी गई हैं। बैठक में सबसे ज्यादा फोकस उन योजनाओं पर रहा, जिनका संचालन अगले पांच वर्षों तक जारी रहना है। आईटी पार्कों के विस्तार से लेकर ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करने वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, दो बड़ी सिंचाई परियोजनाओं और महिला कल्याण योजनाओं तक पर कैबिनेट ने निर्णय लिया। अक्टूबर 2026 में भोपाल में महिला एशियन हॉकी चैम्पियंस ट्रॉफी कराने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके लिए 18.74 करोड़ रुपए तक खर्च किए जा सकेंगे।

प्रतियोगिता बरखेड़ा नाथू स्थित इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रस्तावित है। इसमें भारत के साथ चीन, जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड की महिला हॉकी टीमों के आने की संभावना है। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को मिलाकर करीब 200 सदस्य आयोजन का हिस्सा हो सकते हैं। प्रतियोगिता हॉकी इंडिया और मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से होगी। प्रस्तावित खर्च में 11 करोड़ रुपए हॉकी इंडिया को प्रेजेंटिंग पार्टनर राइट्स के लिए और करीब 7.74 करोड़ रुपए अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाने हैं। सरकार का मानना है कि इस स्तर का अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट भोपाल में होने से प्रदेश में तैयार खेल सुविधाओं को बड़े मंच पर पहचान मिलेगी।

कैबिनेट में रोजगार और तकनीकी निवेश से जुड़ा बड़ा निर्णय प्रदेश के आईटी पार्कों को लेकर हुआ। आईटी पार्क स्थापना योजना के लिए 595 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है और योजना को 2031 तक जारी रखने का रास्ता साफ किया गया। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में विकसित आईटी पार्क और आईटी टावरों के जरिए नए निवेश को आकर्षित करने की तैयारी है। सरकार का अनुमान है कि योजना से आने वाले समय में 8 हजार से अधिक स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार हो सकते हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार इन गतिविधियों से अब तक करीब 22 हजार युवाओं को रोजगार मिल चुका है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हुए समझौतों को जमीन पर उतारकर आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को आगे बढ़ाने की योजना भी इससे जुड़ी है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं को मिलाकर 857.21 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इसी में IISER भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना शामिल है। इस केंद्र की कुल लागत 85.51 करोड़ रुपए बताई गई है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी, UAV डिजाइन, स्वायत्त प्रणालियों और ड्रोन निर्माण से जुड़े अनुसंधान पर काम किया जाएगा। स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन, प्रोटोटाइप तैयार करने और परीक्षण की सुविधा भी विकसित करने की तैयारी है। नई तकनीक के लिए MPSEDC और अन्य संस्थाओं की सहायता पर 110 करोड़ रुपए रखे गए हैं। इसमें AI और मशीन लर्निंग आधारित बिजनेस इंटेलिजेंस, वॉट्सऐप चैटबॉट, ई-साइन, ड्रोन सर्विस, सिक्योरिटी ऑडिट लैब और दूसरी डिजिटल सेवाओं पर काम होगा। स्टेट स्पेशियल डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 40.20 करोड़ और सरकारी विभागों को क्लाउड सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 26.50 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है।

खेती और सिंचाई के मोर्चे पर सिंगरौली की रिहंद माइक्रो सिंचाई परियोजना को 2031 तक चलाने के लिए 111.04 करोड़ रुपए मंजूर किए गए। परियोजना के जरिए गोविंद वल्लभ पंत सागर जलाशय से पानी उठाकर सिंगरौली क्षेत्र की चार तहसीलों के 119 गांवों तक पहुंचाने की योजना है। इससे करीब 38 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के संचालन पर भी कैबिनेट ने मुहर लगाई। इसके लिए 184.20 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। परियोजना से लगभग 46,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता तैयार करने की योजना है। किसानों से समर्थन मूल्य पर होने वाली उपज खरीदी पर बोनस भुगतान की योजना को भी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की स्वीकृति दी गई। यानी सरकार ने फिलहाल इस योजना को बंद करने के बजाय अगले वित्त आयोग की अवधि तक आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए भी अलग से बड़ा प्रावधान किया गया है। मिशन शक्ति की सामर्थ्य उपयोजना के तहत संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास के संचालन के लिए 198.59 करोड़ रुपए मंजूर किए गए। संकल्प हब के जरिए महिलाओं को सरकारी योजनाओं, अधिकारों और उपलब्ध सहायता तक पहुंचाने पर काम होगा। अभी यह व्यवस्था 52 जिलों में है और तीन नए जिलों में भी इसे शुरू किया जाएगा। संकट में फंसी या तस्करी से प्रभावित महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए चल रहे शक्ति सदनों की संख्या बढ़ाने की तैयारी है। प्रदेश में फिलहाल 14 शक्ति सदन गैर-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं और पांच नए केंद्रों को मंजूरी मिली है। कामकाजी महिलाओं के सुरक्षित आवास के लिए सखी निवास योजना भी जारी रहेगी। यहां रहने वाली महिलाओं के छोटे बच्चों के लिए डे-केयर की व्यवस्था का प्रावधान भी है।

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों से संबंधित योजनाओं के संचालन के लिए कैबिनेट ने 982.49 करोड़ रुपए की मंजूरी दी। इस राशि से पेंशन, भविष्य निधि, बीमा, पेंशनर कल्याण कोष, कर्मचारी समूह बीमा और परिवार कल्याण निधि जैसी व्यवस्थाएं 2031 तक जारी रखी जाएंगी। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालन और प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए 129.12 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसमें मिशन कर्मयोगी, अकादमी की संपत्तियों के रखरखाव और प्रशिक्षण के लिए जरूरी सुविधाओं का विकास शामिल रहेगा।

ग्वालियर में विद्युत सुरक्षा निरीक्षकालय का नया वृत्त कार्यालय खोलने को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। इसके साथ नौ नए पद सृजित किए जाएंगे। अभी ग्वालियर और चंबल संभाग से जुड़े विद्युत सुरक्षा और राजस्व संग्रह के कई काम भोपाल मुख्यालय से होते हैं। नया कार्यालय शुरू होने से मुरैना के बामौर और भिंड के मालनपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे फायदा मिलने की उम्मीद है। मुरैना में भविष्य में प्रस्तावित 600 मेगावाट बैटरी स्टोरेज सोलर पावर प्लांट को देखते हुए भी इस कार्यालय की जरूरत बताई गई है। मंदसौर जिले के नारायणगढ़ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के एक पद समेत कुल नौ नए न्यायिक पद बनाने की मंजूरी दी गई है। इससे स्थानीय स्तर पर नियमित न्यायालय संचालन और लंबित प्रकरणों की सुनवाई में मदद मिलने की उम्मीद है। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम, 2011 में बदलाव को भी स्वीकृति दी। यह संशोधन केंद्र के जनविश्वास संबंधी प्रावधानों और अनुपालन का बोझ कम करने की प्रक्रिया के तहत किया गया है। इसमें नाप-तौल उपकरणों के सत्यापन शुल्क से जुड़े प्रावधानों का पुनरीक्षण भी शामिल है।

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