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भोपाल में ‘काली ईद’, नमाज के बाद अमेरिका-इजराइल के खिलाफ लगे नारे
भोपाल (म.प्र.)
शिया समुदाय ने फतेहगढ़ इमामबाड़ा में सादगी से मनाया त्योहार; काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
मध्य प्रदेश में ईद-उल-फित्र के मौके पर जहां एक ओर पारंपरिक उत्साह और भाईचारे का माहौल देखने को मिला, वहीं राजधानी भोपाल में शिया समुदाय ने ‘काली ईद’ मनाकर विरोध दर्ज कराया। फतेहगढ़ इमामबाड़ा में नमाज के बाद अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाए गए। बड़ी संख्या में लोग काली पट्टी बांधकर और सादे, पुराने कपड़ों में यहां पहुंचे, जिससे आयोजन का स्वरूप सामान्य जश्न से अलग नजर आया।
रमजान के 30 रोजों के समापन के बाद शनिवार सुबह प्रदेशभर में ईद की नमाज अदा की गई। भोपाल में पहली नमाज सुबह 7:30 बजे ईदगाह में हुई। इसके बाद जामा मस्जिद, ताज-उल-मसाजिद और मोती मस्जिद में तय समय पर नमाज अदा की गई। ताज-उल-मसाजिद में मौलाना हस्सान साहब की सरपरस्ती में विशेष दुआ कराई गई, जिसमें शहर के विभिन्न हिस्सों से आए नमाजियों ने भाग लिया।
दूसरी ओर, फतेहगढ़ इमामबाड़ा में शिया समुदाय ने इस बार पारंपरिक उल्लास से अलग सादगी और शोक के माहौल में ईद मनाई। आयोजन के दौरान इमामबाड़ा परिसर में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर रखकर श्रद्धांजलि दी गई। मौलाना राजी उल हसन ने अपने संबोधन में वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट रहें और शांति तथा इंसाफ के पक्ष में खड़े हों।
इस दौरान नमाज के बाद सामूहिक दुआ में देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारे और विश्व में शांति की कामना की गई। हालांकि, कार्यक्रम में अमेरिका और इजराइल की नीतियों के विरोध में नारे भी लगाए गए, जो अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के प्रति स्थानीय स्तर पर बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाता है।
मसाजिद कमेटी ने नमाज से पहले फित्रा अदा करने की अपील की थी। गेहूं के हिसाब से प्रति व्यक्ति लगभग 70 रुपए और चांदी के भाव के अनुसार अधिकतम 1650 रुपए तक फित्रा तय किया गया। इसका उद्देश्य जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाना है, ताकि वे भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।
प्रदेश के अन्य शहरों जैसे इंदौर, उज्जैन, रतलाम, खंडवा और बालाघाट में ईद पारंपरिक तरीके से मनाई गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी थी, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
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भोपाल में ‘काली ईद’, नमाज के बाद अमेरिका-इजराइल के खिलाफ लगे नारे
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश में ईद-उल-फित्र के मौके पर जहां एक ओर पारंपरिक उत्साह और भाईचारे का माहौल देखने को मिला, वहीं राजधानी भोपाल में शिया समुदाय ने ‘काली ईद’ मनाकर विरोध दर्ज कराया। फतेहगढ़ इमामबाड़ा में नमाज के बाद अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाए गए। बड़ी संख्या में लोग काली पट्टी बांधकर और सादे, पुराने कपड़ों में यहां पहुंचे, जिससे आयोजन का स्वरूप सामान्य जश्न से अलग नजर आया।
रमजान के 30 रोजों के समापन के बाद शनिवार सुबह प्रदेशभर में ईद की नमाज अदा की गई। भोपाल में पहली नमाज सुबह 7:30 बजे ईदगाह में हुई। इसके बाद जामा मस्जिद, ताज-उल-मसाजिद और मोती मस्जिद में तय समय पर नमाज अदा की गई। ताज-उल-मसाजिद में मौलाना हस्सान साहब की सरपरस्ती में विशेष दुआ कराई गई, जिसमें शहर के विभिन्न हिस्सों से आए नमाजियों ने भाग लिया।
दूसरी ओर, फतेहगढ़ इमामबाड़ा में शिया समुदाय ने इस बार पारंपरिक उल्लास से अलग सादगी और शोक के माहौल में ईद मनाई। आयोजन के दौरान इमामबाड़ा परिसर में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर रखकर श्रद्धांजलि दी गई। मौलाना राजी उल हसन ने अपने संबोधन में वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट रहें और शांति तथा इंसाफ के पक्ष में खड़े हों।
इस दौरान नमाज के बाद सामूहिक दुआ में देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारे और विश्व में शांति की कामना की गई। हालांकि, कार्यक्रम में अमेरिका और इजराइल की नीतियों के विरोध में नारे भी लगाए गए, जो अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के प्रति स्थानीय स्तर पर बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाता है।
मसाजिद कमेटी ने नमाज से पहले फित्रा अदा करने की अपील की थी। गेहूं के हिसाब से प्रति व्यक्ति लगभग 70 रुपए और चांदी के भाव के अनुसार अधिकतम 1650 रुपए तक फित्रा तय किया गया। इसका उद्देश्य जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाना है, ताकि वे भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।
प्रदेश के अन्य शहरों जैसे इंदौर, उज्जैन, रतलाम, खंडवा और बालाघाट में ईद पारंपरिक तरीके से मनाई गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी थी, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
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