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भोपाल में असलम कुरैशी पर NSA, जमानत के 22 घंटे बाद फिर जेल
भोपाल (म.प्र.)
गोमांस मामले में आरोपी की दोबारा गिरफ्तारी; जेल में घटा वजन, नई पहचान ‘बंदी नंबर 500’
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चर्चित गोमांस मामले के आरोपी असलम कुरैशी उर्फ ‘चमड़ा’ को जमानत मिलने के महज 22 घंटे बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बुधवार देर रात सेशन कोर्ट से रिहाई के बाद जैसे ही वह भोपाल सेंट्रल जेल से बाहर निकला, पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। गुरुवार को प्रशासन ने उस पर NSA की कार्रवाई करते हुए फिर से जेल में दाखिल कर दिया।
प्रशासन का कहना है कि आरोपी की गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती हैं, इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई। अब असलम को विचाराधीन बंदी के रूप में नया नंबर 500/26 दिया गया है और सुरक्षा कारणों से उसे जेल के ‘बी’ खंड में रखा गया है।
असलम कुरैशी को करीब 70 दिन जेल में रहने के बाद जमानत मिली थी। सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संबंधित अपराध न तो मृत्युदंड और न ही आजीवन कारावास से दंडनीय है। साथ ही जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है, इसलिए जमानत देना उचित है। कोर्ट ने यह भी शर्त रखी थी कि आरोपी ट्रायल में बाधा नहीं डालेगा और बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेगा।
हालांकि, जमानत के तुरंत बाद NSA लगाने के फैसले ने इस मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन के पास व्यापक अधिकार होते हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल तभी किया जाता है जब सार्वजनिक शांति को खतरे की आशंका हो।
जेल रिकॉर्ड के मुताबिक, 8 जनवरी 2026 को जब असलम को पहली बार जेल भेजा गया था, तब उसका वजन 65 किलो था। दोबारा जेल में दाखिल किए जाने पर उसका वजन घटकर 61 किलो दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि जेल की दिनचर्या और खानपान में बदलाव के कारण उसके स्वास्थ्य पर असर पड़ा है।
यह पूरा मामला 17 दिसंबर 2025 को सामने आया था, जब भोपाल में एक कंटेनर से करीब 26 टन मांस बरामद किया गया था। जांच के लिए भेजे गए सैंपल में गोमांस की पुष्टि होने के बाद 8 जनवरी 2026 को जहांगीराबाद पुलिस ने असलम कुरैशी और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज रही है। प्रदेश के मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने सख्त कार्रवाई की बात कही है। वहीं कुछ सामाजिक संगठनों ने जांच और चार्जशीट को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कमजोर चार्जशीट के कारण आरोपी को जमानत मिली।
फिलहाल, NSA के तहत गिरफ्तारी के बाद असलम कुरैशी को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है। प्रशासन मामले की निगरानी कर रहा है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
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भोपाल में असलम कुरैशी पर NSA, जमानत के 22 घंटे बाद फिर जेल
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चर्चित गोमांस मामले के आरोपी असलम कुरैशी उर्फ ‘चमड़ा’ को जमानत मिलने के महज 22 घंटे बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बुधवार देर रात सेशन कोर्ट से रिहाई के बाद जैसे ही वह भोपाल सेंट्रल जेल से बाहर निकला, पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। गुरुवार को प्रशासन ने उस पर NSA की कार्रवाई करते हुए फिर से जेल में दाखिल कर दिया।
प्रशासन का कहना है कि आरोपी की गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती हैं, इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई। अब असलम को विचाराधीन बंदी के रूप में नया नंबर 500/26 दिया गया है और सुरक्षा कारणों से उसे जेल के ‘बी’ खंड में रखा गया है।
असलम कुरैशी को करीब 70 दिन जेल में रहने के बाद जमानत मिली थी। सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संबंधित अपराध न तो मृत्युदंड और न ही आजीवन कारावास से दंडनीय है। साथ ही जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है, इसलिए जमानत देना उचित है। कोर्ट ने यह भी शर्त रखी थी कि आरोपी ट्रायल में बाधा नहीं डालेगा और बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेगा।
हालांकि, जमानत के तुरंत बाद NSA लगाने के फैसले ने इस मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन के पास व्यापक अधिकार होते हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल तभी किया जाता है जब सार्वजनिक शांति को खतरे की आशंका हो।
जेल रिकॉर्ड के मुताबिक, 8 जनवरी 2026 को जब असलम को पहली बार जेल भेजा गया था, तब उसका वजन 65 किलो था। दोबारा जेल में दाखिल किए जाने पर उसका वजन घटकर 61 किलो दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि जेल की दिनचर्या और खानपान में बदलाव के कारण उसके स्वास्थ्य पर असर पड़ा है।
यह पूरा मामला 17 दिसंबर 2025 को सामने आया था, जब भोपाल में एक कंटेनर से करीब 26 टन मांस बरामद किया गया था। जांच के लिए भेजे गए सैंपल में गोमांस की पुष्टि होने के बाद 8 जनवरी 2026 को जहांगीराबाद पुलिस ने असलम कुरैशी और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज रही है। प्रदेश के मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने सख्त कार्रवाई की बात कही है। वहीं कुछ सामाजिक संगठनों ने जांच और चार्जशीट को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कमजोर चार्जशीट के कारण आरोपी को जमानत मिली।
फिलहाल, NSA के तहत गिरफ्तारी के बाद असलम कुरैशी को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है। प्रशासन मामले की निगरानी कर रहा है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
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