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ट्रम्प का बड़ा दावा, शी जिनपिंग और पुतिन ने ईरान को हथियार नहीं देने का दिया भरोसा
Digital Desk
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बोले- चीन या रूस के युद्ध में शामिल होने की संभावना नहीं, लेकिन हस्तक्षेप हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ईरान को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस मौजूदा संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि भविष्य में दोनों देशों ने इस युद्ध में किसी भी तरह का हस्तक्षेप किया, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। ट्रम्प ने कहा कि ऐसा कदम न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा सकता है और इसका असर संबंधित देशों पर भी पड़ेगा।
डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि हाल ही में बीजिंग में हुई मुलाकात के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि चीन किसी भी परिस्थिति में ईरान को हथियार उपलब्ध नहीं कराएगा। ट्रम्प के अनुसार, यह आश्वासन केवल चीनी सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन की निजी कंपनियों पर भी समान रूप से लागू होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें शी जिनपिंग के इस वादे पर पूरा विश्वास है और उम्मीद है कि चीन अपने इस रुख पर कायम रहेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उनसे बातचीत के दौरान आश्वासन दिया था कि रूस ईरान को हथियार नहीं बेचेगा। ट्रम्प ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और यूक्रेन संघर्ष के बावजूद उनकी पुतिन से बातचीत होती रहती है और दोनों नेताओं के बीच कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद जारी है।
ट्रम्प ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष को वैश्विक युद्ध में बदलने से रोकना है। उन्होंने कहा कि यदि चीन और रूस जैसे प्रभावशाली देश युद्ध में शामिल होते हैं, तो इससे स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। इसलिए सभी देशों को संयम बरतना चाहिए और ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो तनाव को और बढ़ाएं।
यूक्रेन युद्ध को लेकर भी ट्रम्प ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अमेरिका सीधे तौर पर यूक्रेन को हथियार नहीं बेचता है। उनके अनुसार, अमेरिका अपने रक्षा उपकरण और हथियार नाटो सदस्य देशों को उपलब्ध कराता है और वे देश उनकी पूरी कीमत चुकाते हैं। इसके बाद वे हथियारों का उपयोग कैसे करते हैं या उन्हें किस देश तक पहुंचाते हैं, इसकी सीधी जानकारी अमेरिका को नहीं होती। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन को सैन्य सहायता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बहस जारी है।
ट्रम्प के इन बयानों का उद्देश्य वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश देना भी हो सकता है। ईरान, रूस और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ा है, जिसके चलते पश्चिमी देशों की नजर इन संबंधों पर बनी हुई है। ऐसे में ट्रम्प का यह दावा कि दोनों नेताओं ने ईरान को हथियार नहीं देने का भरोसा दिया है, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।
ईरान लंबे समय से पश्चिमी देशों के साथ विभिन्न मुद्दों को लेकर विवादों में रहा है। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों के कारण अमेरिका और ईरान के संबंध लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे समय में यदि किसी बड़े देश की ओर से सैन्य सहयोग मिलता है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह है कि ट्रम्प ने इस मुद्दे पर विशेष रूप से चीन और रूस का उल्लेख किया।
हालांकि ट्रम्प के दावों पर अभी तक चीन और रूस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसे बयानों की पुष्टि संबंधित देशों के आधिकारिक रुख के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इसके बावजूद ट्रम्प की टिप्पणी ने वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।
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ट्रम्प का बड़ा दावा, शी जिनपिंग और पुतिन ने ईरान को हथियार नहीं देने का दिया भरोसा
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ईरान को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस मौजूदा संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि भविष्य में दोनों देशों ने इस युद्ध में किसी भी तरह का हस्तक्षेप किया, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। ट्रम्प ने कहा कि ऐसा कदम न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा सकता है और इसका असर संबंधित देशों पर भी पड़ेगा।
डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि हाल ही में बीजिंग में हुई मुलाकात के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि चीन किसी भी परिस्थिति में ईरान को हथियार उपलब्ध नहीं कराएगा। ट्रम्प के अनुसार, यह आश्वासन केवल चीनी सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन की निजी कंपनियों पर भी समान रूप से लागू होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें शी जिनपिंग के इस वादे पर पूरा विश्वास है और उम्मीद है कि चीन अपने इस रुख पर कायम रहेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उनसे बातचीत के दौरान आश्वासन दिया था कि रूस ईरान को हथियार नहीं बेचेगा। ट्रम्प ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और यूक्रेन संघर्ष के बावजूद उनकी पुतिन से बातचीत होती रहती है और दोनों नेताओं के बीच कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद जारी है।
ट्रम्प ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष को वैश्विक युद्ध में बदलने से रोकना है। उन्होंने कहा कि यदि चीन और रूस जैसे प्रभावशाली देश युद्ध में शामिल होते हैं, तो इससे स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। इसलिए सभी देशों को संयम बरतना चाहिए और ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो तनाव को और बढ़ाएं।
यूक्रेन युद्ध को लेकर भी ट्रम्प ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अमेरिका सीधे तौर पर यूक्रेन को हथियार नहीं बेचता है। उनके अनुसार, अमेरिका अपने रक्षा उपकरण और हथियार नाटो सदस्य देशों को उपलब्ध कराता है और वे देश उनकी पूरी कीमत चुकाते हैं। इसके बाद वे हथियारों का उपयोग कैसे करते हैं या उन्हें किस देश तक पहुंचाते हैं, इसकी सीधी जानकारी अमेरिका को नहीं होती। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन को सैन्य सहायता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बहस जारी है।
ट्रम्प के इन बयानों का उद्देश्य वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश देना भी हो सकता है। ईरान, रूस और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ा है, जिसके चलते पश्चिमी देशों की नजर इन संबंधों पर बनी हुई है। ऐसे में ट्रम्प का यह दावा कि दोनों नेताओं ने ईरान को हथियार नहीं देने का भरोसा दिया है, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।
ईरान लंबे समय से पश्चिमी देशों के साथ विभिन्न मुद्दों को लेकर विवादों में रहा है। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों के कारण अमेरिका और ईरान के संबंध लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे समय में यदि किसी बड़े देश की ओर से सैन्य सहयोग मिलता है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह है कि ट्रम्प ने इस मुद्दे पर विशेष रूप से चीन और रूस का उल्लेख किया।
हालांकि ट्रम्प के दावों पर अभी तक चीन और रूस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसे बयानों की पुष्टि संबंधित देशों के आधिकारिक रुख के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इसके बावजूद ट्रम्प की टिप्पणी ने वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।
