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BCCL IPO: 9 जनवरी से खुलेगा सरकारी कंपनी का पब्लिक इशू, निवेशकों के लिए क्या है दांव पर
बिजनेस न्यूज
कोल इंडिया की सहायक भारत कोकिंग कोल लिमिटेड पहली बार शेयर बाजार में उतरने जा रही है, इशू पूरी तरह ‘ऑफर फॉर सेल’
सरकारी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) अपना पहला इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) 9 जनवरी 2026 को लॉन्च करने जा रही है। यह इशू 13 जनवरी तक खुला रहेगा। कंपनी ने इसके लिए ₹21 से ₹23 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से निवेशकों को एक लॉट के लिए कम से कम ₹13,800 का निवेश करना होगा। यह जानकारी मंगलवार को कंपनी की ओर से साझा की गई।
BCCL, कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी है और देश में कोकिंग कोल उत्पादन में अग्रणी मानी जाती है। यह वही कोयला है, जिसका इस्तेमाल स्टील निर्माण में होता है। कंपनी को वर्ष 2014 में ‘मिनी रत्न’ का दर्जा दिया गया था। मौजूदा IPO के जरिए कोल इंडिया अपनी हिस्सेदारी घटा रही है।
लॉट साइज और महत्वपूर्ण तारीखें
IPO के तहत निवेशकों को 600 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 8 जनवरी को खुलेगी। पात्र कर्मचारियों को प्रति शेयर ₹1 का डिस्काउंट देने का प्रावधान भी रखा गया है। शेयरों का आवंटन और लिस्टिंग से जुड़ी प्रक्रिया इशू बंद होने के बाद तय समय-सीमा में पूरी की जाएगी।
पूरी तरह ऑफर फॉर सेल
यह IPO पूरी तरह ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) आधारित है। कुल 46.57 करोड़ शेयर इस इशू में बेचे जाएंगे। इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई पूरी राशि प्रमोटर कोल इंडिया लिमिटेड को जाएगी, न कि BCCL को। यानी इस इशू से कंपनी को सीधे तौर पर विस्तार या नए प्रोजेक्ट्स के लिए फंड नहीं मिलेगा।
कंपनी की स्थिति और संचालन
वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, देश के घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में BCCL की हिस्सेदारी 58.50% है। 1 अप्रैल 2024 तक कंपनी के पास लगभग 7,910 मिलियन टन कोयले का भंडार था। BCCL वर्तमान में 34 खदानों का संचालन कर रही है, जो झरिया और रानीगंज कोलफील्ड के 288.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई हैं। कंपनी मुख्य रूप से स्टील और पावर सेक्टर को कोयला सप्लाई करती है।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए BCCL ने 2021 से हैवी अर्थ मूविंग मशीनरी (HEMM) के इस्तेमाल को बढ़ाया है, जिससे खनन कार्य की रफ्तार में इजाफा हुआ है।
निवेशकों के लिए जोखिम
विश्लेषकों के अनुसार, यह इशू पूरी तरह OFS होने के कारण निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि कंपनी को नए निवेश से पूंजी नहीं मिलेगी। इसके अलावा, BCCL का प्रदर्शन सरकारी नीतियों, स्टील सेक्टर की मांग और वैश्विक कोयला कीमतों पर निर्भर करता है, जिससे मुनाफे में उतार-चढ़ाव संभव है।
कोकिंग कोल की रणनीतिक अहमियत
कोकिंग कोल स्टील उद्योग की रीढ़ माना जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाली BCCL की भूमिका रणनीतिक रूप से अहम मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील सेक्टर की मांग बनी रहने पर कंपनी के कारोबार पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।
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