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शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा
बिजनेस न्यूज
हैवीवेट शेयरों में मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं से बाजार दबाव में
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे सत्र में कमजोरी देखने को मिली। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 26,200 के अहम स्तर से नीचे आ गया। बाजार पर दबाव की वजह हैवीवेट शेयरों में मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताएं रहीं।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 376 अंक की गिरावट के साथ 85,063 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 75 अंक टूटकर 26,175 पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की धारणा और कमजोर हुई।
हैवीवेट शेयरों में बिकवाली
बाजार पर सबसे ज्यादा असर बड़े शेयरों में बिकवाली का पड़ा। बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में दबाव साफ नजर आया। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट देखी गई। विश्लेषकों के मुताबिक हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना बेहतर समझा।
टैरिफ को लेकर बढ़ी चिंता
वैश्विक व्यापार से जुड़े घटनाक्रमों ने भी निवेशकों को सतर्क किया। अमेरिका की ओर से भारत पर संभावित टैरिफ बढ़ाने के संकेतों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। इससे खासतौर पर निर्यात से जुड़े शेयरों पर दबाव देखा गया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार की चाल को प्रभावित किया। जनवरी के शुरुआती कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इससे बाजार में तरलता पर असर पड़ा और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
भू-राजनीतिक तनाव का असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ा। कुछ देशों से जुड़ी राजनीतिक अस्थिरता की खबरों ने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने पर मजबूर किया।
बढ़ी बाजार की अस्थिरता
इंडिया VIX, जिसे बाजार की घबराहट का संकेतक माना जाता है, में लगातार तेजी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
आगे बाजार की दिशा
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी को 26,100–26,150 के स्तर पर समर्थन मिल सकता है। वहीं ऊपर की ओर 26,400 के आसपास मजबूत रुकावट है। बाजार की अगली चाल वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक फिलहाल सतर्कता बरतें और लंबी अवधि के नजरिए से ही फैसले लें।
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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे सत्र में कमजोरी देखने को मिली। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 26,200 के अहम स्तर से नीचे आ गया। बाजार पर दबाव की वजह हैवीवेट शेयरों में मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताएं रहीं।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 376 अंक की गिरावट के साथ 85,063 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 75 अंक टूटकर 26,175 पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की धारणा और कमजोर हुई।
हैवीवेट शेयरों में बिकवाली
बाजार पर सबसे ज्यादा असर बड़े शेयरों में बिकवाली का पड़ा। बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में दबाव साफ नजर आया। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट देखी गई। विश्लेषकों के मुताबिक हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना बेहतर समझा।
टैरिफ को लेकर बढ़ी चिंता
वैश्विक व्यापार से जुड़े घटनाक्रमों ने भी निवेशकों को सतर्क किया। अमेरिका की ओर से भारत पर संभावित टैरिफ बढ़ाने के संकेतों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। इससे खासतौर पर निर्यात से जुड़े शेयरों पर दबाव देखा गया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार की चाल को प्रभावित किया। जनवरी के शुरुआती कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इससे बाजार में तरलता पर असर पड़ा और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
भू-राजनीतिक तनाव का असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ा। कुछ देशों से जुड़ी राजनीतिक अस्थिरता की खबरों ने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने पर मजबूर किया।
बढ़ी बाजार की अस्थिरता
इंडिया VIX, जिसे बाजार की घबराहट का संकेतक माना जाता है, में लगातार तेजी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
आगे बाजार की दिशा
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी को 26,100–26,150 के स्तर पर समर्थन मिल सकता है। वहीं ऊपर की ओर 26,400 के आसपास मजबूत रुकावट है। बाजार की अगली चाल वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक फिलहाल सतर्कता बरतें और लंबी अवधि के नजरिए से ही फैसले लें।
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