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2026 में RBI फिर घटा सकता है ब्याज दर, लोन होंगे और सस्ते
बिजनेस न्यूज
IIFL कैपिटल रिपोर्ट का दावा—2025 में 1.25% कटौती के बाद भी 0.50% रेट कट की गुंजाइश, EMI पर मिलेगी राहत
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) साल 2026 में ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत यानी 50 बेसिस पॉइंट्स तक की और कटौती कर सकता है। यह संकेत IIFL कैपिटल की एक ताजा रिपोर्ट में दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कुल 1.25 प्रतिशत की बड़ी कटौती के बावजूद केंद्रीय बैंक के पास नीतिगत दरों को और नीचे लाने की गुंजाइश बनी हुई है। अगर अनुमान सही साबित होता है, तो होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI में और कमी आ सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल रेपो रेट और कोर इन्फ्लेशन के बीच का अंतर लगभग 2.8 प्रतिशत है, जबकि पिछले सात वर्षों का औसत अंतर करीब 1.1 प्रतिशत रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के नियंत्रण में रहने और इस बड़े अंतर के कारण RBI के पास ब्याज दरों में और कटौती करने के तकनीकी आधार मौजूद हैं। यही वजह है कि 2026 में भी रेट कट की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा।
2025 में हो चुकी है बड़ी कटौती
साल 2025 में RBI ने आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी। दिसंबर 2025 में अंतिम बार 0.25 प्रतिशत की कटौती के बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया। अब बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में यह दर 5 प्रतिशत से नीचे या उसके आसपास पहुंच सकती है।
आम लोगों पर क्या होगा असर
अगर 2026 में 0.50 प्रतिशत की और कटौती होती है, तो बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर लेंडिंग रेट घटाने का दबाव बढ़ेगा। इसका फायदा नए लोन लेने वालों के साथ-साथ मौजूदा कर्जदारों को भी मिलेगा। होम और कार लोन की EMI कम होने से घरेलू बजट पर दबाव घटेगा। वहीं, कंपनियों के लिए सस्ता कर्ज उपलब्ध होने से निवेश और विस्तार की रफ्तार तेज हो सकती है। हालांकि, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वालों को ब्याज दरों में मामूली गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
इकोनॉमी और बाजार को सपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्याज दरों में कमी और सरकार के सुधारात्मक कदम मिलकर देश की GDP ग्रोथ को मजबूती दे सकते हैं। बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ बेहतर रहने और वित्तीय हालात मजबूत होने की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने का अनुमान है, जिससे महंगाई का दबाव सीमित रह सकता है। यह स्थिति RBI के लिए रेट कट के पक्ष में एक अहम कारक मानी जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरों में संभावित कटौती से शेयर बाजार को भी सहारा मिल सकता है। खासकर बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। कुछ विश्लेषक निफ्टी में मौजूदा स्तर से करीब 15 प्रतिशत तक के रिटर्न की संभावना जता रहे हैं, जबकि स्मॉल कैप शेयरों में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
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