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लेंसकार्ट विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री का बयान, धार्मिक प्रतीकों पर उठे सवाल
खजुराहो (म.प्र.)
तिलक-मंगलसूत्र पर कथित पाबंदी को लेकर कथा मंच से जताई नाराजगी लेंसकार्ट की कथित ड्रेस कोड नीति को लेकर विवाद अब धार्मिक मंच तक पहुंच गया है। बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने सार्वजनिक मंच से इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
खजुराहो/प्रयागराज में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने चश्मा कंपनी Lenskart की कथित ड्रेस कोड नीति पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी कंपनी में तिलक, सिंदूर या मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई जाती है, तो यह भारतीय सांस्कृतिक भावनाओं के खिलाफ है।कथा के दौरान शास्त्री ने मंच से तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कंपनी को चेतावनी दी और धार्मिक आस्थाओं के सम्मान की बात कही। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और परंपराओं की रक्षा करने का आह्वान भी किया।
विवाद की शुरुआत
यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइड’ दस्तावेज से शुरू हुआ। इसमें दावा किया गया कि कंपनी कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोकती है, जबकि कुछ अन्य धार्मिक प्रतीकों को शर्तों के साथ अनुमति दी जाती है।इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई संगठनों व यूजर्स ने इसे धार्मिक भेदभाव का मुद्दा बताया। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए, जहां कर्मचारियों को तिलक और कलावा पहनाकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया गया।
कंपनी की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद पीयूष बंसल ने सफाई देते हुए कहा कि कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है और कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की स्वतंत्रता है।हालांकि, कंपनी की इस सफाई के बावजूद विवाद पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है। कई संगठनों ने इस मुद्दे पर आगे भी विरोध जारी रखने के संकेत दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के विवाद कॉर्पोरेट नीतियों और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस को सामने लाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यदि किसी नीति में भेदभाव की आशंका होती है, तो संबंधित एजेंसियां इसकी समीक्षा कर सकती हैं।फिलहाल, मामला सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में कंपनी की नीतियों और प्रशासनिक रुख के आधार पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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लेंसकार्ट विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री का बयान, धार्मिक प्रतीकों पर उठे सवाल
खजुराहो (म.प्र.)
खजुराहो/प्रयागराज में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने चश्मा कंपनी Lenskart की कथित ड्रेस कोड नीति पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी कंपनी में तिलक, सिंदूर या मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई जाती है, तो यह भारतीय सांस्कृतिक भावनाओं के खिलाफ है।कथा के दौरान शास्त्री ने मंच से तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कंपनी को चेतावनी दी और धार्मिक आस्थाओं के सम्मान की बात कही। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और परंपराओं की रक्षा करने का आह्वान भी किया।
विवाद की शुरुआत
यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइड’ दस्तावेज से शुरू हुआ। इसमें दावा किया गया कि कंपनी कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोकती है, जबकि कुछ अन्य धार्मिक प्रतीकों को शर्तों के साथ अनुमति दी जाती है।इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई संगठनों व यूजर्स ने इसे धार्मिक भेदभाव का मुद्दा बताया। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए, जहां कर्मचारियों को तिलक और कलावा पहनाकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया गया।
कंपनी की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद पीयूष बंसल ने सफाई देते हुए कहा कि कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है और कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की स्वतंत्रता है।हालांकि, कंपनी की इस सफाई के बावजूद विवाद पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है। कई संगठनों ने इस मुद्दे पर आगे भी विरोध जारी रखने के संकेत दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के विवाद कॉर्पोरेट नीतियों और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस को सामने लाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यदि किसी नीति में भेदभाव की आशंका होती है, तो संबंधित एजेंसियां इसकी समीक्षा कर सकती हैं।फिलहाल, मामला सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में कंपनी की नीतियों और प्रशासनिक रुख के आधार पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
