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चांदी ₹3,420 चढ़कर ₹2.29 लाख किलो पहुंची, सोना ₹1,371 उछलकर ₹1.43 लाख पर
बिजनेस डेस्क
जून में बड़ी गिरावट के बाद सोने-चांदी में फिर तेजी, इस साल अब तक सोना करीब ₹10 हजार महंगा जबकि निवेशकों की नजर आगे की चाल पर
सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को एक बार फिर तेजी देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर 1,371 रुपये बढ़कर 1,43,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। वहीं चांदी भी मजबूत बढ़त के साथ 3,420 रुपये महंगी होकर 2,29,000 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई। पिछले महीने लगातार गिरावट के बाद आई इस तेजी ने सर्राफा बाजार में फिर से हलचल बढ़ा दी है। कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में सुधार और निवेशकों की बढ़ती खरीदारी का असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दे रहा है। हालांकि बाजार के जानकार अभी इसे स्थायी तेजी मानने से बच रहे हैं और उनका कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों के आधार पर कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बीते महीने जून में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। 31 मई को 10 ग्राम सोने का भाव 1,56,463 रुपये था, जो जून के आखिर तक घटकर 1,43,380 रुपये पर आ गया। यानी एक महीने में सोना 13,083 रुपये सस्ता हुआ था। इसी तरह चांदी की कीमत 2,63,350 रुपये प्रति किलो से घटकर 2,29,293 रुपये रह गई थी। इस दौरान चांदी में 34,057 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट देखने को मिली। लंबे समय बाद आई इस गिरावट से आभूषण खरीदने वालों को राहत मिली थी, लेकिन अब जुलाई की शुरुआत में फिर तेजी लौटने से बाजार का माहौल बदलता नजर आ रहा है।
हालांकि अगर पूरे वर्ष 2026 की बात करें तो सोना अभी भी साल की शुरुआत के मुकाबले काफी महंगा बना हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर करीब 1.43 लाख रुपये हो चुका है। यानी इस साल अब तक सोने की कीमत में लगभग 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में सालभर के दौरान ज्यादा बढ़त नहीं दिखी है। वर्ष के अंत में चांदी लगभग 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जबकि फिलहाल यह करीब 2.29 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही है।
इस साल जनवरी में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड ऊंचाई भी छुई थी। 29 जनवरी को सोने की कीमत 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी, जबकि चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था। उसके बाद मुनाफावसूली, वैश्विक बाजार में बदलाव और निवेशकों की रणनीति बदलने से दोनों धातुओं की कीमतों में लगातार गिरावट आई। अब जुलाई की शुरुआत में आई तेजी को बाजार नई दिशा के संकेत के रूप में देख रहा है।
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक परिस्थितियां सोने-चांदी की कीमतों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। इसी तरह औद्योगिक मांग बढ़ने पर चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिलती है।
निवेश करने वाले लोगों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। सोना और चांदी दोनों ही लंबे समय के निवेश माने जाते हैं और इनमें समय-समय पर उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। यदि कोई व्यक्ति निवेश या आभूषण खरीदने की योजना बना रहा है तो उसे रोजाना के भाव पर नजर रखने के साथ बाजार की दिशा को भी समझना चाहिए। त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह के मौसम में मांग बढ़ने से कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। ज्वेलर्स भी ग्राहकों को सोना खरीदते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं। सबसे पहले हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना निर्धारित शुद्धता का है। इसके अलावा खरीदारी से पहले उस दिन के सोने के भाव की पुष्टि विश्वसनीय स्रोतों से कर लेना भी जरूरी है क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है। ग्राहकों को बिल जरूर लेना चाहिए और मेकिंग चार्ज व अन्य शुल्क की भी स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए।
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चांदी ₹3,420 चढ़कर ₹2.29 लाख किलो पहुंची, सोना ₹1,371 उछलकर ₹1.43 लाख पर
बिजनेस डेस्क
सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को एक बार फिर तेजी देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर 1,371 रुपये बढ़कर 1,43,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। वहीं चांदी भी मजबूत बढ़त के साथ 3,420 रुपये महंगी होकर 2,29,000 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई। पिछले महीने लगातार गिरावट के बाद आई इस तेजी ने सर्राफा बाजार में फिर से हलचल बढ़ा दी है। कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में सुधार और निवेशकों की बढ़ती खरीदारी का असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दे रहा है। हालांकि बाजार के जानकार अभी इसे स्थायी तेजी मानने से बच रहे हैं और उनका कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों के आधार पर कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बीते महीने जून में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। 31 मई को 10 ग्राम सोने का भाव 1,56,463 रुपये था, जो जून के आखिर तक घटकर 1,43,380 रुपये पर आ गया। यानी एक महीने में सोना 13,083 रुपये सस्ता हुआ था। इसी तरह चांदी की कीमत 2,63,350 रुपये प्रति किलो से घटकर 2,29,293 रुपये रह गई थी। इस दौरान चांदी में 34,057 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट देखने को मिली। लंबे समय बाद आई इस गिरावट से आभूषण खरीदने वालों को राहत मिली थी, लेकिन अब जुलाई की शुरुआत में फिर तेजी लौटने से बाजार का माहौल बदलता नजर आ रहा है।
हालांकि अगर पूरे वर्ष 2026 की बात करें तो सोना अभी भी साल की शुरुआत के मुकाबले काफी महंगा बना हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर करीब 1.43 लाख रुपये हो चुका है। यानी इस साल अब तक सोने की कीमत में लगभग 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में सालभर के दौरान ज्यादा बढ़त नहीं दिखी है। वर्ष के अंत में चांदी लगभग 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जबकि फिलहाल यह करीब 2.29 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही है।
इस साल जनवरी में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड ऊंचाई भी छुई थी। 29 जनवरी को सोने की कीमत 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी, जबकि चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था। उसके बाद मुनाफावसूली, वैश्विक बाजार में बदलाव और निवेशकों की रणनीति बदलने से दोनों धातुओं की कीमतों में लगातार गिरावट आई। अब जुलाई की शुरुआत में आई तेजी को बाजार नई दिशा के संकेत के रूप में देख रहा है।
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक परिस्थितियां सोने-चांदी की कीमतों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। इसी तरह औद्योगिक मांग बढ़ने पर चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिलती है।
निवेश करने वाले लोगों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। सोना और चांदी दोनों ही लंबे समय के निवेश माने जाते हैं और इनमें समय-समय पर उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। यदि कोई व्यक्ति निवेश या आभूषण खरीदने की योजना बना रहा है तो उसे रोजाना के भाव पर नजर रखने के साथ बाजार की दिशा को भी समझना चाहिए। त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह के मौसम में मांग बढ़ने से कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। ज्वेलर्स भी ग्राहकों को सोना खरीदते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं। सबसे पहले हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना निर्धारित शुद्धता का है। इसके अलावा खरीदारी से पहले उस दिन के सोने के भाव की पुष्टि विश्वसनीय स्रोतों से कर लेना भी जरूरी है क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है। ग्राहकों को बिल जरूर लेना चाहिए और मेकिंग चार्ज व अन्य शुल्क की भी स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए।
