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अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन, INS त्रिकंड ने समुद्री लुटेरों की साजिश की नाकाम
Digital Desk
भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर हमले की कोशिश भारतीय नौसेना ने समय रहते विफल कर दी।
भारतीय नौसेना ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी तत्परता और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। बुधवार रात भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर समुद्री डाकुओं ने कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय युद्धपोत INS त्रिकंड की त्वरित कार्रवाई के चलते उनका मंसूबा सफल नहीं हो सका। नौसेना के पहुंचते ही लुटेरे मौके से फरार हो गए। इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष कमांडो दस्ते मार्कोस (MARCOS) ने जहाज पर चढ़कर पूरी तलाशी ली और जहाज को सुरक्षित घोषित किया। इस घटना में किसी भी चालक दल के सदस्य के घायल होने या जहाज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने नहीं आई है।
MV Golden Arsenal एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज है, जो 1 जुलाई को यमन के अदन बंदरगाह से रवाना हुआ था। जहाज भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। जहाज पर कुल 21 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अदन की खाड़ी में डीजिबूती से करीब 300 नॉटिकल मील पूर्व-उत्तर-पूर्व की दिशा में यात्रा के दौरान समुद्री लुटेरों ने तेज रफ्तार छोटी नौकाओं के जरिए जहाज के करीब पहुंचकर उस पर चढ़ने की कोशिश की। हालात अचानक बिगड़ते देख चालक दल ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया और खुद को जहाज के सुरक्षित कमरे में बंद कर लिया। चालक दल ने सुरक्षित स्थान से रेडियो संचार प्रणाली के जरिए तत्काल मदद की गुहार लगाई। संकट संदेश मिलते ही क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS त्रिकंड बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर रवाना हुआ। जैसे ही युद्धपोत हमलावरों के करीब पहुंचा, समुद्री लुटेरों ने स्थिति का अंदाजा लगाते हुए वहां से भागना ही बेहतर समझा। नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय युद्धपोत की तेज प्रतिक्रिया और उसकी मौजूदगी ने संभावित समुद्री डकैती की घटना को पूरी तरह विफल कर दिया।
इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष बल मार्कोस कमांडो हेलीकॉप्टर और तेज नौकाओं की मदद से व्यापारी जहाज पर पहुंचे। कमांडो ने जहाज के हर हिस्से की गहन तलाशी ली ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई हमलावर जहाज पर छिपा न हो। जांच पूरी होने के बाद जहाज और उसके चालक दल को सुरक्षित घोषित कर दिया गया। नौसेना ने बताया कि चालक दल के सभी 21 सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और जहाज अपनी निर्धारित यात्रा आगे जारी रखने की स्थिति में है। जहाज पर मौजूद कार्गो भारत के लिए रणनीतिक और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों से कार्गो की प्रकृति या उसके गंतव्य से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि व्यापारी जहाजों की सुरक्षा भारतीय नौसेना की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है, विशेषकर उन समुद्री मार्गों पर जहां समुद्री डकैती की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब INS त्रिकंड ने समुद्री डकैती की कोशिश को नाकाम किया हो। बीते दो महीनों में यह तीसरी ऐसी घटना है जिसमें इस युद्धपोत ने समय रहते हस्तक्षेप कर व्यापारी जहाजों को सुरक्षित बचाया है। इससे पहले 19 जून को पश्चिमी हिंद महासागर में व्यापारी जहाज MV Fareeda से संकट संदेश मिलने पर भी INS त्रिकंड ने तत्काल कार्रवाई की थी और संभावित समुद्री डकैती को विफल कर दिया था। उस समय भी भारतीय नौसेना ने जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखा था।
इसके अलावा 27 मई को भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS कोलकाता ने भी पश्चिमी हिंद महासागर में MV Mashallah नामक व्यापारी जहाज के पास संदिग्ध समुद्री डकैती की गतिविधियों को विफल किया था। उस अभियान में नौसेना ने हेलीकॉप्टर, निगरानी उपकरणों और बोर्डिंग टीम की मदद से पूरे क्षेत्र की तलाशी ली थी। समय पर की गई कार्रवाई के कारण संभावित खतरा टल गया और व्यापारी जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर बढ़ सका।
भारतीय नौसेना लगातार यह दोहराती रही है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में 'प्राथमिक सुरक्षा साझेदार' और 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नौसेना का उद्देश्य केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हाल के वर्षों में समुद्री डकैती की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में भारतीय नौसेना लगातार निगरानी, गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाए हुए है।
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अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन, INS त्रिकंड ने समुद्री लुटेरों की साजिश की नाकाम
Digital Desk
भारतीय नौसेना ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी तत्परता और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। बुधवार रात भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर समुद्री डाकुओं ने कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय युद्धपोत INS त्रिकंड की त्वरित कार्रवाई के चलते उनका मंसूबा सफल नहीं हो सका। नौसेना के पहुंचते ही लुटेरे मौके से फरार हो गए। इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष कमांडो दस्ते मार्कोस (MARCOS) ने जहाज पर चढ़कर पूरी तलाशी ली और जहाज को सुरक्षित घोषित किया। इस घटना में किसी भी चालक दल के सदस्य के घायल होने या जहाज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने नहीं आई है।
MV Golden Arsenal एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज है, जो 1 जुलाई को यमन के अदन बंदरगाह से रवाना हुआ था। जहाज भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। जहाज पर कुल 21 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अदन की खाड़ी में डीजिबूती से करीब 300 नॉटिकल मील पूर्व-उत्तर-पूर्व की दिशा में यात्रा के दौरान समुद्री लुटेरों ने तेज रफ्तार छोटी नौकाओं के जरिए जहाज के करीब पहुंचकर उस पर चढ़ने की कोशिश की। हालात अचानक बिगड़ते देख चालक दल ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया और खुद को जहाज के सुरक्षित कमरे में बंद कर लिया। चालक दल ने सुरक्षित स्थान से रेडियो संचार प्रणाली के जरिए तत्काल मदद की गुहार लगाई। संकट संदेश मिलते ही क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS त्रिकंड बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर रवाना हुआ। जैसे ही युद्धपोत हमलावरों के करीब पहुंचा, समुद्री लुटेरों ने स्थिति का अंदाजा लगाते हुए वहां से भागना ही बेहतर समझा। नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय युद्धपोत की तेज प्रतिक्रिया और उसकी मौजूदगी ने संभावित समुद्री डकैती की घटना को पूरी तरह विफल कर दिया।
इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष बल मार्कोस कमांडो हेलीकॉप्टर और तेज नौकाओं की मदद से व्यापारी जहाज पर पहुंचे। कमांडो ने जहाज के हर हिस्से की गहन तलाशी ली ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई हमलावर जहाज पर छिपा न हो। जांच पूरी होने के बाद जहाज और उसके चालक दल को सुरक्षित घोषित कर दिया गया। नौसेना ने बताया कि चालक दल के सभी 21 सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और जहाज अपनी निर्धारित यात्रा आगे जारी रखने की स्थिति में है। जहाज पर मौजूद कार्गो भारत के लिए रणनीतिक और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों से कार्गो की प्रकृति या उसके गंतव्य से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि व्यापारी जहाजों की सुरक्षा भारतीय नौसेना की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है, विशेषकर उन समुद्री मार्गों पर जहां समुद्री डकैती की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब INS त्रिकंड ने समुद्री डकैती की कोशिश को नाकाम किया हो। बीते दो महीनों में यह तीसरी ऐसी घटना है जिसमें इस युद्धपोत ने समय रहते हस्तक्षेप कर व्यापारी जहाजों को सुरक्षित बचाया है। इससे पहले 19 जून को पश्चिमी हिंद महासागर में व्यापारी जहाज MV Fareeda से संकट संदेश मिलने पर भी INS त्रिकंड ने तत्काल कार्रवाई की थी और संभावित समुद्री डकैती को विफल कर दिया था। उस समय भी भारतीय नौसेना ने जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखा था।
इसके अलावा 27 मई को भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS कोलकाता ने भी पश्चिमी हिंद महासागर में MV Mashallah नामक व्यापारी जहाज के पास संदिग्ध समुद्री डकैती की गतिविधियों को विफल किया था। उस अभियान में नौसेना ने हेलीकॉप्टर, निगरानी उपकरणों और बोर्डिंग टीम की मदद से पूरे क्षेत्र की तलाशी ली थी। समय पर की गई कार्रवाई के कारण संभावित खतरा टल गया और व्यापारी जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर बढ़ सका।
भारतीय नौसेना लगातार यह दोहराती रही है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में 'प्राथमिक सुरक्षा साझेदार' और 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नौसेना का उद्देश्य केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हाल के वर्षों में समुद्री डकैती की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में भारतीय नौसेना लगातार निगरानी, गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाए हुए है।
