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पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में ₹2,246 करोड़ के निवेश को मंजूरी, 20 हजार करोड़ निर्यात का लक्ष्य
Digital Desk
फार्मा कंपनियों के बड़े निवेश से औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी नई रफ्तार, करीब 1,900 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद
मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर को एक बार फिर बड़ी निवेश सौगात मिली है। पीथमपुर विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के दूसरे चरण में कुल 2,246 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इन निवेशों के जरिए प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPIDC) के अनुसार इन परियोजनाओं के शुरू होने से करीब 1,900 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि अगले पांच वर्षों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। निवेश प्रस्तावों को डेवलपमेंट कमिश्नर, एसईजेड की अध्यक्षता में आयोजित स्वीकृति समिति की वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली बैठक में मंजूरी दी गई। सभी नई परियोजनाएं पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में स्थापित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता और निर्यात गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।
एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु प्रजापति ने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं का सबसे बड़ा हिस्सा फार्मास्युटिकल सेक्टर से जुड़ा है। कई प्रमुख दवा कंपनियां अपने उत्पादन का विस्तार करने के साथ नई इकाइयों की स्थापना भी करेंगी। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि अत्याधुनिक तकनीक, आधुनिक विनिर्माण और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि फार्मा उद्योग में बढ़ता निवेश प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
स्वीकृत प्रस्तावों में प्रमुख दवा कंपनी अजंता फार्मा का विस्तार शामिल है। कंपनी अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नई सुविधाओं का विकास करेगी। इसके अलावा फेलिक्स जेनेरिक्स और शंकर न्यूट्रिकॉन जैसी कंपनियां भी पीथमपुर एसईजेड में नई उत्पादन इकाइयां स्थापित करेंगी। इन परियोजनाओं के शुरू होने से दवा निर्माण, पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण और सप्लाई चेन से जुड़े कई नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उद्योग विभाग का मानना है कि इन कंपनियों के आने से छोटे और मध्यम स्तर के स्थानीय उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।
पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र माना जाता है। यहां पहले से ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फार्मा, केमिकल और विनिर्माण क्षेत्र की अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां संचालित हैं। बेहतर सड़क संपर्क, विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और निर्यात के लिए उपलब्ध सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। विशेष आर्थिक क्षेत्र होने के कारण यहां उद्योगों को कई प्रशासनिक और व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं, जिससे निवेश आकर्षित करने में मदद मिलती है।
एमपीआईडीसी का कहना है कि इन नई परियोजनाओं के शुरू होने के बाद पीथमपुर एसईजेड का निर्यात प्रदर्शन भी मजबूत होगा। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इन इकाइयों से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया जाएगा। इससे न केवल प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। निर्यात बढ़ने से प्रदेश की औद्योगिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होने की उम्मीद है।
वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यदि मध्य प्रदेश में आधुनिक दवा निर्माण इकाइयों का विस्तार होता है तो इसका सीधा लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा। नई इकाइयों के शुरू होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, तकनीकी विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इसके साथ ही परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रयास कर रही है। निवेशकों को सरल प्रक्रियाएं, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार नई परियोजनाएं स्वीकृत हो रही हैं। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश आने से प्रदेश में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों को भी नई संभावनाएं मिलेंगी।
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पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में ₹2,246 करोड़ के निवेश को मंजूरी, 20 हजार करोड़ निर्यात का लक्ष्य
Digital Desk
मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर को एक बार फिर बड़ी निवेश सौगात मिली है। पीथमपुर विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के दूसरे चरण में कुल 2,246 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इन निवेशों के जरिए प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPIDC) के अनुसार इन परियोजनाओं के शुरू होने से करीब 1,900 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि अगले पांच वर्षों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। निवेश प्रस्तावों को डेवलपमेंट कमिश्नर, एसईजेड की अध्यक्षता में आयोजित स्वीकृति समिति की वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली बैठक में मंजूरी दी गई। सभी नई परियोजनाएं पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में स्थापित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता और निर्यात गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।
एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु प्रजापति ने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं का सबसे बड़ा हिस्सा फार्मास्युटिकल सेक्टर से जुड़ा है। कई प्रमुख दवा कंपनियां अपने उत्पादन का विस्तार करने के साथ नई इकाइयों की स्थापना भी करेंगी। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि अत्याधुनिक तकनीक, आधुनिक विनिर्माण और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि फार्मा उद्योग में बढ़ता निवेश प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
स्वीकृत प्रस्तावों में प्रमुख दवा कंपनी अजंता फार्मा का विस्तार शामिल है। कंपनी अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नई सुविधाओं का विकास करेगी। इसके अलावा फेलिक्स जेनेरिक्स और शंकर न्यूट्रिकॉन जैसी कंपनियां भी पीथमपुर एसईजेड में नई उत्पादन इकाइयां स्थापित करेंगी। इन परियोजनाओं के शुरू होने से दवा निर्माण, पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण और सप्लाई चेन से जुड़े कई नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उद्योग विभाग का मानना है कि इन कंपनियों के आने से छोटे और मध्यम स्तर के स्थानीय उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।
पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र माना जाता है। यहां पहले से ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फार्मा, केमिकल और विनिर्माण क्षेत्र की अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां संचालित हैं। बेहतर सड़क संपर्क, विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और निर्यात के लिए उपलब्ध सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। विशेष आर्थिक क्षेत्र होने के कारण यहां उद्योगों को कई प्रशासनिक और व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं, जिससे निवेश आकर्षित करने में मदद मिलती है।
एमपीआईडीसी का कहना है कि इन नई परियोजनाओं के शुरू होने के बाद पीथमपुर एसईजेड का निर्यात प्रदर्शन भी मजबूत होगा। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इन इकाइयों से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया जाएगा। इससे न केवल प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। निर्यात बढ़ने से प्रदेश की औद्योगिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होने की उम्मीद है।
वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यदि मध्य प्रदेश में आधुनिक दवा निर्माण इकाइयों का विस्तार होता है तो इसका सीधा लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा। नई इकाइयों के शुरू होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, तकनीकी विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इसके साथ ही परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रयास कर रही है। निवेशकों को सरल प्रक्रियाएं, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार नई परियोजनाएं स्वीकृत हो रही हैं। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश आने से प्रदेश में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों को भी नई संभावनाएं मिलेंगी।
