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रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल में लगेंगे एलएचबी कोच, 23 जुलाई से यात्रियों को मिलेगा अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर
भोपाल,(म.प्र.)
पश्चिम मध्य रेलवे ने रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल एक्सप्रेस में आईसीएफ कोचों की जगह आधुनिक एलएचबी कोच लगाने का फैसला किया है। नई रेक के साथ यात्रियों को बेहतर सुरक्षा, कम झटके और अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
पूर्वोत्तर भारत की यात्रा करने वाले रेल यात्रियों के लिए राहत और सुविधा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पश्चिम मध्य रेलवे ने रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल एक्सप्रेस में पुराने आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) कोचों की जगह आधुनिक एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच लगाने का निर्णय लिया है। रेलवे के अनुसार यह बदलाव 23 जुलाई 2026 से लागू होगा। गाड़ी संख्या 01665 रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल का संचालन इस तारीख से एलएचबी रेक के साथ शुरू होगा, जबकि वापसी दिशा में गाड़ी संख्या 01666 अगरतला-रानी कमलापति स्पेशल में 26 जुलाई 2026 से नए कोच लगाए जाएंगे। रेलवे का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक रेल यात्रा उपलब्ध कराना है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक एलएचबी कोच वर्तमान समय की आधुनिक तकनीक पर आधारित होते हैं और इन्हें पारंपरिक आईसीएफ कोचों की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है। इन कोचों में बेहतर सस्पेंशन सिस्टम होने के कारण सफर के दौरान झटके कम महसूस होते हैं। साथ ही इनमें अत्याधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे ट्रेन की रुकने की क्षमता बेहतर होती है। दुर्घटना की स्थिति में भी एलएचबी कोचों की संरचना इस प्रकार तैयार की जाती है कि कोच एक-दूसरे पर चढ़ने की संभावना काफी कम रहती है। यही कारण है कि भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से चरणबद्ध तरीके से लंबी दूरी की अधिकांश ट्रेनों में एलएचबी कोच शामिल कर रहा है।
पश्चिम मध्य रेलवे के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि रानी कमलापति और अगरतला के बीच चलने वाली यह ट्रेन मध्यप्रदेश को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण रेल सेवाओं में शामिल है। इस ट्रेन में हर वर्ष बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। ऐसे में आधुनिक एलएचबी कोच लगाए जाने से यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा और सुरक्षा मानकों में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
रेलवे द्वारा जारी जानकारी के अनुसार नई एलएचबी रेक में कुल 22 कोच होंगे। इनमें 4 सामान्य द्वितीय श्रेणी के डिब्बे, 8 स्लीपर कोच, 5 एसी थर्ड एसी कोच, 1 एसी थर्ड इकोनॉमी कोच, 2 एसी सेकेंड टियर कोच, 1 गार्ड सह लगेज एवं ब्रेक वैन और 1 जनरेटर कार शामिल रहेगी। इस संरचना के जरिए विभिन्न श्रेणी के यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है ताकि सामान्य श्रेणी से लेकर वातानुकूलित श्रेणी तक सभी यात्रियों को बेहतर यात्रा सुविधा मिल सके।
एलएचबी कोचों की एक और विशेषता उनकी अधिकतम गति क्षमता भी है। इन कोचों को उच्च गति पर भी अधिक स्थिरता के साथ चलने के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि किसी ट्रेन की वास्तविक गति ट्रैक, सिग्नल व्यवस्था और परिचालन नियमों पर निर्भर करती है, फिर भी एलएचबी कोचों की वजह से सफर पहले की तुलना में अधिक संतुलित और आरामदायक माना जाता है। इसके अलावा इन कोचों में शोर कम होता है और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान कंपन भी अपेक्षाकृत कम महसूस होता है। यही वजह है कि रेलवे लगातार अपनी प्रमुख ट्रेनों में पुराने आईसीएफ कोचों को हटाकर एलएचबी कोचों से बदल रहा है।
रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल मध्यप्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण रेल सेवा है। इस ट्रेन का उपयोग नौकरी, शिक्षा, व्यापार, पर्यटन और पारिवारिक कारणों से यात्रा करने वाले हजारों यात्री करते हैं। एलएचबी कोच लगने के बाद विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि बेहतर सस्पेंशन, आधुनिक ब्रेकिंग प्रणाली और उन्नत सुरक्षा सुविधाओं के कारण यात्रा का अनुभव पहले की तुलना में काफी बेहतर होगा।
भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से अपने नेटवर्क का आधुनिकीकरण करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। रेलवे स्टेशनों के विकास, नई वंदे भारत ट्रेनों के संचालन, आधुनिक सिग्नल प्रणाली, ट्रैक अपग्रेडेशन और एलएचबी कोचों के विस्तार जैसे कदम इसी रणनीति का हिस्सा हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना भी रेलवे की प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने आईसीएफ कोचों की जगह एलएचबी कोचों का उपयोग बढ़ने से दुर्घटनाओं के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिलेगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाते समय ट्रेन के कोच संयोजन और अन्य परिचालन संबंधी जानकारी पर ध्यान दें। 23 जुलाई से रानी कमलापति से अगरतला जाने वाली ट्रेन और 26 जुलाई से वापसी दिशा की सेवा नए एलएचबी रेक के साथ संचालित होगी।
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रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल में लगेंगे एलएचबी कोच, 23 जुलाई से यात्रियों को मिलेगा अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर
भोपाल,(म.प्र.)
पूर्वोत्तर भारत की यात्रा करने वाले रेल यात्रियों के लिए राहत और सुविधा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पश्चिम मध्य रेलवे ने रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल एक्सप्रेस में पुराने आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) कोचों की जगह आधुनिक एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच लगाने का निर्णय लिया है। रेलवे के अनुसार यह बदलाव 23 जुलाई 2026 से लागू होगा। गाड़ी संख्या 01665 रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल का संचालन इस तारीख से एलएचबी रेक के साथ शुरू होगा, जबकि वापसी दिशा में गाड़ी संख्या 01666 अगरतला-रानी कमलापति स्पेशल में 26 जुलाई 2026 से नए कोच लगाए जाएंगे। रेलवे का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक रेल यात्रा उपलब्ध कराना है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक एलएचबी कोच वर्तमान समय की आधुनिक तकनीक पर आधारित होते हैं और इन्हें पारंपरिक आईसीएफ कोचों की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है। इन कोचों में बेहतर सस्पेंशन सिस्टम होने के कारण सफर के दौरान झटके कम महसूस होते हैं। साथ ही इनमें अत्याधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे ट्रेन की रुकने की क्षमता बेहतर होती है। दुर्घटना की स्थिति में भी एलएचबी कोचों की संरचना इस प्रकार तैयार की जाती है कि कोच एक-दूसरे पर चढ़ने की संभावना काफी कम रहती है। यही कारण है कि भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से चरणबद्ध तरीके से लंबी दूरी की अधिकांश ट्रेनों में एलएचबी कोच शामिल कर रहा है।
पश्चिम मध्य रेलवे के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि रानी कमलापति और अगरतला के बीच चलने वाली यह ट्रेन मध्यप्रदेश को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण रेल सेवाओं में शामिल है। इस ट्रेन में हर वर्ष बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। ऐसे में आधुनिक एलएचबी कोच लगाए जाने से यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा और सुरक्षा मानकों में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
रेलवे द्वारा जारी जानकारी के अनुसार नई एलएचबी रेक में कुल 22 कोच होंगे। इनमें 4 सामान्य द्वितीय श्रेणी के डिब्बे, 8 स्लीपर कोच, 5 एसी थर्ड एसी कोच, 1 एसी थर्ड इकोनॉमी कोच, 2 एसी सेकेंड टियर कोच, 1 गार्ड सह लगेज एवं ब्रेक वैन और 1 जनरेटर कार शामिल रहेगी। इस संरचना के जरिए विभिन्न श्रेणी के यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है ताकि सामान्य श्रेणी से लेकर वातानुकूलित श्रेणी तक सभी यात्रियों को बेहतर यात्रा सुविधा मिल सके।
एलएचबी कोचों की एक और विशेषता उनकी अधिकतम गति क्षमता भी है। इन कोचों को उच्च गति पर भी अधिक स्थिरता के साथ चलने के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि किसी ट्रेन की वास्तविक गति ट्रैक, सिग्नल व्यवस्था और परिचालन नियमों पर निर्भर करती है, फिर भी एलएचबी कोचों की वजह से सफर पहले की तुलना में अधिक संतुलित और आरामदायक माना जाता है। इसके अलावा इन कोचों में शोर कम होता है और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान कंपन भी अपेक्षाकृत कम महसूस होता है। यही वजह है कि रेलवे लगातार अपनी प्रमुख ट्रेनों में पुराने आईसीएफ कोचों को हटाकर एलएचबी कोचों से बदल रहा है।
रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल मध्यप्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण रेल सेवा है। इस ट्रेन का उपयोग नौकरी, शिक्षा, व्यापार, पर्यटन और पारिवारिक कारणों से यात्रा करने वाले हजारों यात्री करते हैं। एलएचबी कोच लगने के बाद विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि बेहतर सस्पेंशन, आधुनिक ब्रेकिंग प्रणाली और उन्नत सुरक्षा सुविधाओं के कारण यात्रा का अनुभव पहले की तुलना में काफी बेहतर होगा।
भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से अपने नेटवर्क का आधुनिकीकरण करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। रेलवे स्टेशनों के विकास, नई वंदे भारत ट्रेनों के संचालन, आधुनिक सिग्नल प्रणाली, ट्रैक अपग्रेडेशन और एलएचबी कोचों के विस्तार जैसे कदम इसी रणनीति का हिस्सा हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना भी रेलवे की प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने आईसीएफ कोचों की जगह एलएचबी कोचों का उपयोग बढ़ने से दुर्घटनाओं के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिलेगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाते समय ट्रेन के कोच संयोजन और अन्य परिचालन संबंधी जानकारी पर ध्यान दें। 23 जुलाई से रानी कमलापति से अगरतला जाने वाली ट्रेन और 26 जुलाई से वापसी दिशा की सेवा नए एलएचबी रेक के साथ संचालित होगी।
