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हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ा, ट्रम्प की चेतावनी से बाजार में हलचल; निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
बिजनेस न्यूज
मिडिल ईस्ट संकट, महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेश की बिकवाली—इस हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे 5 बड़े फैक्टर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी चेतावनी के बीच भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह बेहद अहम माना जा रहा है। 23 मार्च से शुरू हो रहे कारोबारी सप्ताह में निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और रुपये की कमजोरी बाजार की दिशा तय करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे पर कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। ईरान ने भी पलटवार की चेतावनी दी है, जिससे भू-राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है।
इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो पिछले कई महीनों का उच्च स्तर है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगा तेल महंगाई बढ़ाने वाला कारक बन सकता है, जिससे कॉर्पोरेट मुनाफे और बाजार की धारणा प्रभावित होती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। मार्च में अब तक बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी दर्ज की गई है। हालांकि घरेलू निवेशकों ने कुछ हद तक इस दबाव को संतुलित किया है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों का रुख बाजार के लिए निर्णायक रहेगा।
इसी बीच, भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 93.73 तक गिर गया है। कमजोर रुपया आयात लागत को बढ़ाता है, जिसका असर कंपनियों की लागत और उपभोक्ता कीमतों पर पड़ता है। इससे बाजार में दबाव और बढ़ सकता है।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर फिलहाल मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो बाजार में और गिरावट संभव है। वहीं, 23,400 के ऊपर टिकने पर ही मजबूती के संकेत मिल सकते हैं।
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हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ा, ट्रम्प की चेतावनी से बाजार में हलचल; निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी चेतावनी के बीच भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह बेहद अहम माना जा रहा है। 23 मार्च से शुरू हो रहे कारोबारी सप्ताह में निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और रुपये की कमजोरी बाजार की दिशा तय करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे पर कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। ईरान ने भी पलटवार की चेतावनी दी है, जिससे भू-राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है।
इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो पिछले कई महीनों का उच्च स्तर है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगा तेल महंगाई बढ़ाने वाला कारक बन सकता है, जिससे कॉर्पोरेट मुनाफे और बाजार की धारणा प्रभावित होती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। मार्च में अब तक बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी दर्ज की गई है। हालांकि घरेलू निवेशकों ने कुछ हद तक इस दबाव को संतुलित किया है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों का रुख बाजार के लिए निर्णायक रहेगा।
इसी बीच, भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 93.73 तक गिर गया है। कमजोर रुपया आयात लागत को बढ़ाता है, जिसका असर कंपनियों की लागत और उपभोक्ता कीमतों पर पड़ता है। इससे बाजार में दबाव और बढ़ सकता है।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर फिलहाल मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो बाजार में और गिरावट संभव है। वहीं, 23,400 के ऊपर टिकने पर ही मजबूती के संकेत मिल सकते हैं।
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