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इंदौर में नई कलेक्टर गाइडलाइन पर 500 आपत्तियां, दरों में 200% तक बढ़ोतरी पर विवाद
इंदौर (म.प्र.)
2606 लोकेशन पर प्रस्तावित वृद्धि को लेकर आमजन, वकील और रियल एस्टेट सेक्टर ने जताई चिंता
मध्यप्रदेश के इंदौर में प्रस्तावित नई कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर व्यापक विरोध सामने आया है। शनिवार को आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि तक करीब 500 आपत्तियां प्राप्त हुईं, जिनमें आम नागरिकों, वकीलों और रियल एस्टेट कारोबारियों ने गाइडलाइन दरों में प्रस्तावित भारी बढ़ोतरी पर सवाल उठाए हैं।
जिला मूल्यांकन समिति द्वारा जिले की 2606 लोकेशन पर 10 से 200 प्रतिशत तक गाइडलाइन दर बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद से ही असंतोष बढ़ता गया। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित सड़कों के आसपास जमीन के दाम बढ़ाने के फैसले को लेकर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि सड़क आधारित मूल्य निर्धारण में एकरूपता नहीं होनी चाहिए। बायपास और रिंग रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग की तरह मानते हुए 100 प्रतिशत तक वृद्धि को अनुचित बताया गया है। उनका तर्क है कि जमीन की कीमतें उसकी वास्तविक लोकेशन, उपयोगिता और बाजार मांग के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि केवल सड़क के आधार पर।
शहरी क्षेत्र में भी गाइडलाइन को लेकर अलग तरह की मांग सामने आई है। कई लोगों ने पुराने अपार्टमेंट्स की गाइडलाइन दरों में कटौती की मांग की है। उनका कहना है कि समय के साथ भवनों की स्थिति और सुविधाएं कम होती जाती हैं, ऐसे में उनकी कीमतों में वृद्धि व्यावहारिक नहीं है।
पंजीयन विभाग ने आपत्तियां दर्ज करने के लिए ऑफलाइन के साथ-साथ ईमेल और व्हाट्सएप जैसे डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया। वरिष्ठ जिला पंजीयक मंजूला पटेल के अनुसार, सभी आपत्तियों को संकलित कर जिला मूल्यांकन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके अलावा, आगामी वित्तीय वर्ष की गाइडलाइन में 158 नई कॉलोनियों को शामिल करने का प्रस्ताव पहले ही रखा जा चुका है। आपत्तियों के दौरान करीब 15 अतिरिक्त कॉलोनियों को शामिल करने की मांग भी सामने आई है।
अब आगे की प्रक्रिया में जिला मूल्यांकन समिति आपत्तियों की समीक्षा कर अंतिम प्रस्ताव तैयार करेगी, जिसे केंद्रीय मूल्यांकन समिति को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। संभावना है कि यह प्रस्ताव 24 मार्च तक भोपाल भेज दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि गाइडलाइन दरों में इस तरह की बड़ी वृद्धि का सीधा असर संपत्ति खरीद-बिक्री, स्टांप ड्यूटी और रियल एस्टेट बाजार पर पड़ेगा। फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आपत्तियों के बाद अंतिम दरों में कितना बदलाव किया जाता है।
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इंदौर में नई कलेक्टर गाइडलाइन पर 500 आपत्तियां, दरों में 200% तक बढ़ोतरी पर विवाद
इंदौर (म.प्र.)
मध्यप्रदेश के इंदौर में प्रस्तावित नई कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर व्यापक विरोध सामने आया है। शनिवार को आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि तक करीब 500 आपत्तियां प्राप्त हुईं, जिनमें आम नागरिकों, वकीलों और रियल एस्टेट कारोबारियों ने गाइडलाइन दरों में प्रस्तावित भारी बढ़ोतरी पर सवाल उठाए हैं।
जिला मूल्यांकन समिति द्वारा जिले की 2606 लोकेशन पर 10 से 200 प्रतिशत तक गाइडलाइन दर बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद से ही असंतोष बढ़ता गया। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित सड़कों के आसपास जमीन के दाम बढ़ाने के फैसले को लेकर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि सड़क आधारित मूल्य निर्धारण में एकरूपता नहीं होनी चाहिए। बायपास और रिंग रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग की तरह मानते हुए 100 प्रतिशत तक वृद्धि को अनुचित बताया गया है। उनका तर्क है कि जमीन की कीमतें उसकी वास्तविक लोकेशन, उपयोगिता और बाजार मांग के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि केवल सड़क के आधार पर।
शहरी क्षेत्र में भी गाइडलाइन को लेकर अलग तरह की मांग सामने आई है। कई लोगों ने पुराने अपार्टमेंट्स की गाइडलाइन दरों में कटौती की मांग की है। उनका कहना है कि समय के साथ भवनों की स्थिति और सुविधाएं कम होती जाती हैं, ऐसे में उनकी कीमतों में वृद्धि व्यावहारिक नहीं है।
पंजीयन विभाग ने आपत्तियां दर्ज करने के लिए ऑफलाइन के साथ-साथ ईमेल और व्हाट्सएप जैसे डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया। वरिष्ठ जिला पंजीयक मंजूला पटेल के अनुसार, सभी आपत्तियों को संकलित कर जिला मूल्यांकन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके अलावा, आगामी वित्तीय वर्ष की गाइडलाइन में 158 नई कॉलोनियों को शामिल करने का प्रस्ताव पहले ही रखा जा चुका है। आपत्तियों के दौरान करीब 15 अतिरिक्त कॉलोनियों को शामिल करने की मांग भी सामने आई है।
अब आगे की प्रक्रिया में जिला मूल्यांकन समिति आपत्तियों की समीक्षा कर अंतिम प्रस्ताव तैयार करेगी, जिसे केंद्रीय मूल्यांकन समिति को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। संभावना है कि यह प्रस्ताव 24 मार्च तक भोपाल भेज दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि गाइडलाइन दरों में इस तरह की बड़ी वृद्धि का सीधा असर संपत्ति खरीद-बिक्री, स्टांप ड्यूटी और रियल एस्टेट बाजार पर पड़ेगा। फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आपत्तियों के बाद अंतिम दरों में कितना बदलाव किया जाता है।
