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असम चुनाव से पहले BJP में असंतोष, टिकट बंटवारे को लेकर बगावत के संकेत
चुनाव
कांग्रेस से आए नेताओं को टिकट मिलने पर नाराजगी; CM हिमंत बिस्वा सरमा ने संभाली कमान
असम विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर टिकट वितरण को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई मौजूदा विधायक और दावेदार टिकट कटने से नाराज हैं और निर्दलीय चुनाव लड़ने की चेतावनी दे चुके हैं। यह स्थिति चुनाव से ठीक पहले पार्टी के लिए चुनौती बनती दिख रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस नाराजगी को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया सक्रिय हो गए हैं। दोनों नेताओं ने असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात कर उन्हें मनाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि कई नेताओं को समझा लिया गया है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में असंतोष अभी भी बना हुआ है।
विवाद की मुख्य वजह हाल ही में कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हुए नेताओं को टिकट दिया जाना बताया जा रहा है। प्रद्युत बोरदोलोई को दिसपुर और भूपेन बोरा को बिहपुरिया सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले ने पार्टी के पुराने दावेदारों को नाराज कर दिया है।
दिसपुर सीट पर सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिला है। यहां लंबे समय से सक्रिय नेता जयंत दास को टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम समय में बोरदोलोई को उम्मीदवार घोषित किए जाने से कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में असंतोष बढ़ गया। कई नेताओं ने इसे ‘बाहरी उम्मीदवार को प्राथमिकता’ देने का मामला बताया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि टिकट कटना राजनीति का हिस्सा है और इससे आगे बड़े अवसर भी मिल सकते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी हित में काम करने की अपील की। सरमा ने यह भी दावा किया कि BJP राज्य में 160 तक सीटें जीतने की क्षमता रखती है, हालांकि उन्होंने माना कि वास्तविक स्थिति का अंदाजा प्रचार शुरू होने के बाद ही लगेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह का असंतोष अगर समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह वोटों के बंटवारे का कारण बन सकता है। खासकर उन सीटों पर जहां मुकाबला कड़ा है, वहां बागी उम्मीदवार पार्टी के समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
असम के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों—पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—में भी चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दल उम्मीदवारों की सूची जारी कर रहे हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
फिलहाल, BJP नेतृत्व का फोकस असम में आंतरिक एकजुटता बनाए रखने पर है, ताकि चुनावी मुकाबले में किसी तरह की कमजोरी सामने न आए। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी बगावत को पूरी तरह थाम पाती है या नहीं।
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असम चुनाव से पहले BJP में असंतोष, टिकट बंटवारे को लेकर बगावत के संकेत
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असम विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर टिकट वितरण को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई मौजूदा विधायक और दावेदार टिकट कटने से नाराज हैं और निर्दलीय चुनाव लड़ने की चेतावनी दे चुके हैं। यह स्थिति चुनाव से ठीक पहले पार्टी के लिए चुनौती बनती दिख रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस नाराजगी को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया सक्रिय हो गए हैं। दोनों नेताओं ने असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात कर उन्हें मनाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि कई नेताओं को समझा लिया गया है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में असंतोष अभी भी बना हुआ है।
विवाद की मुख्य वजह हाल ही में कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हुए नेताओं को टिकट दिया जाना बताया जा रहा है। प्रद्युत बोरदोलोई को दिसपुर और भूपेन बोरा को बिहपुरिया सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले ने पार्टी के पुराने दावेदारों को नाराज कर दिया है।
दिसपुर सीट पर सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिला है। यहां लंबे समय से सक्रिय नेता जयंत दास को टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम समय में बोरदोलोई को उम्मीदवार घोषित किए जाने से कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में असंतोष बढ़ गया। कई नेताओं ने इसे ‘बाहरी उम्मीदवार को प्राथमिकता’ देने का मामला बताया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि टिकट कटना राजनीति का हिस्सा है और इससे आगे बड़े अवसर भी मिल सकते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी हित में काम करने की अपील की। सरमा ने यह भी दावा किया कि BJP राज्य में 160 तक सीटें जीतने की क्षमता रखती है, हालांकि उन्होंने माना कि वास्तविक स्थिति का अंदाजा प्रचार शुरू होने के बाद ही लगेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह का असंतोष अगर समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह वोटों के बंटवारे का कारण बन सकता है। खासकर उन सीटों पर जहां मुकाबला कड़ा है, वहां बागी उम्मीदवार पार्टी के समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
असम के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों—पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—में भी चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दल उम्मीदवारों की सूची जारी कर रहे हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
फिलहाल, BJP नेतृत्व का फोकस असम में आंतरिक एकजुटता बनाए रखने पर है, ताकि चुनावी मुकाबले में किसी तरह की कमजोरी सामने न आए। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी बगावत को पूरी तरह थाम पाती है या नहीं।
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