30 लाख के इनामी 9 नक्सलियों ने किया सरेंडर, AK-47 के साथ सभी हथियार भी सौंपे

राजनंदगांव (छ.ग.)

By Rohit.P
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गढ़चिरौली में नक्सल विरोधी अभियान के तहत 30 लाख रुपये के इनामी 9 हार्डकोर नक्सलियों ने एके-47 और एसएलआर जैसे हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।

छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सल विरोधी अभियान को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षा बलों और प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बीच 30 लाख रुपये के इनामी 9 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। यह घटना उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब यह सभी नक्सली निर्धारित समय सीमा के अंतिम दिन देर शाम पुलिस के सामने पहुंचे और हथियार डाल दिए।

एक साथ 9 हार्डकोर नक्सलियों का आत्मसमर्पण

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली लंबे समय से सक्रिय थे और विभिन्न हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इनमें शांति वंजा वड्डे और सुक्की बामी कुंजम जैसे कुख्यात नाम भी शामिल हैं, जिन पर सुरक्षा एजेंसियों की विशेष नजर थी। इन सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का निर्णय लिया है।

आधुनिक हथियारों के साथ हुआ आत्मसमर्पण

आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने एके-47 और एसएलआर जैसे आधुनिक हथियार भी पुलिस के हवाले किए। इससे स्पष्ट होता है कि ये केवल सामान्य सदस्य नहीं बल्कि प्रशिक्षित और सक्रिय दस्ते के हिस्से थे। हथियारों के साथ आत्मसमर्पण ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया।

इनामी और कुख्यात नक्सलियों की पहचान

इन नक्सलियों पर कुल मिलाकर लगभग 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। लंबे समय से ये सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए थे। इनकी मौजूदगी गढ़चिरौली और आसपास के नक्सल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती थी।

सरकारी पुनर्वास नीति का प्रभाव

सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत इन सभी को आवश्यक सहायता, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें और दोबारा हिंसा की ओर न लौटें।

सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों का असर

पिछले कुछ महीनों में गढ़चिरौली और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए हैं। मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और नए कैंपों की स्थापना से नक्सली नेटवर्क पर दबाव काफी बढ़ा है, जिसका असर अब आत्मसमर्पण के रूप में दिखाई दे रहा है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलता माहौल

गढ़चिरौली लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का केंद्र रहा है, क्योंकि यह महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमाओं से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। लेकिन हाल के विकास कार्यों और सुरक्षा अभियानों के चलते यहां स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार दबाव, संगठन के भीतर असंतोष और पुनर्वास नीति के आकर्षण ने नक्सल संगठन की पकड़ को कमजोर किया है। सामूहिक आत्मसमर्पण इसी बदलते समीकरण का संकेत माना जा रहा है।

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01 Apr 2026 By Rohit.P

30 लाख के इनामी 9 नक्सलियों ने किया सरेंडर, AK-47 के साथ सभी हथियार भी सौंपे

राजनंदगांव (छ.ग.)

छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सल विरोधी अभियान को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षा बलों और प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बीच 30 लाख रुपये के इनामी 9 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। यह घटना उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब यह सभी नक्सली निर्धारित समय सीमा के अंतिम दिन देर शाम पुलिस के सामने पहुंचे और हथियार डाल दिए।

एक साथ 9 हार्डकोर नक्सलियों का आत्मसमर्पण

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली लंबे समय से सक्रिय थे और विभिन्न हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इनमें शांति वंजा वड्डे और सुक्की बामी कुंजम जैसे कुख्यात नाम भी शामिल हैं, जिन पर सुरक्षा एजेंसियों की विशेष नजर थी। इन सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का निर्णय लिया है।

आधुनिक हथियारों के साथ हुआ आत्मसमर्पण

आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने एके-47 और एसएलआर जैसे आधुनिक हथियार भी पुलिस के हवाले किए। इससे स्पष्ट होता है कि ये केवल सामान्य सदस्य नहीं बल्कि प्रशिक्षित और सक्रिय दस्ते के हिस्से थे। हथियारों के साथ आत्मसमर्पण ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया।

इनामी और कुख्यात नक्सलियों की पहचान

इन नक्सलियों पर कुल मिलाकर लगभग 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। लंबे समय से ये सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए थे। इनकी मौजूदगी गढ़चिरौली और आसपास के नक्सल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती थी।

सरकारी पुनर्वास नीति का प्रभाव

सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत इन सभी को आवश्यक सहायता, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें और दोबारा हिंसा की ओर न लौटें।

सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों का असर

पिछले कुछ महीनों में गढ़चिरौली और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए हैं। मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और नए कैंपों की स्थापना से नक्सली नेटवर्क पर दबाव काफी बढ़ा है, जिसका असर अब आत्मसमर्पण के रूप में दिखाई दे रहा है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलता माहौल

गढ़चिरौली लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का केंद्र रहा है, क्योंकि यह महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमाओं से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। लेकिन हाल के विकास कार्यों और सुरक्षा अभियानों के चलते यहां स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार दबाव, संगठन के भीतर असंतोष और पुनर्वास नीति के आकर्षण ने नक्सल संगठन की पकड़ को कमजोर किया है। सामूहिक आत्मसमर्पण इसी बदलते समीकरण का संकेत माना जा रहा है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/9-naxalites-with-a-reward-of-rs-30-lakh-surrendered/article-49841

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