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25 जून 2026: निर्जला एकादशी का महासंयोग, जानें पंचांग और पूजा के शुभ मुहूर्त
राशिफल
आज गुरुवार के दिन एकादशी का दुर्लभ संयोग, आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु की भक्ति का विशेष दिन
हिंदू पंचांग पांच तत्वों—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण—का एक ऐसा सामंजस्य है जो हमें ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ता है। पंचांग के माध्यम से हम न केवल दिन के शुभ और अशुभ समय को जानते हैं, बल्कि अपने दैनिक कार्यों को ब्रह्मांड की गति के अनुसार व्यवस्थित भी करते हैं। 25 जून 2026 को स्वाति नक्षत्र का प्रभाव दोपहर तक बना रहेगा, जो व्यावसायिक और बौद्धिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
आज का विस्तृत पंचांग विवरण
आज के दिन की ज्योतिषीय स्थिति इस प्रकार है:
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तिथि: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी (निर्जला एकादशी), जो रात्रि 20:09 तक रहेगी।
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वार: गुरुवार।
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नक्षत्र: स्वाति नक्षत्र (दोपहर तक), उसके बाद विशाखा नक्षत्र का प्रभाव।
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योग: शिव योग (प्रातः तक), उसके बाद सिद्ध योग।
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करण: वणिज और विष्टि (भद्रा)।
निर्जला एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व
निर्जला एकादशी को 'पांडव एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीमसेन ने बिना जल ग्रहण किए इस व्रत का पालन किया था, जिसके कारण उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस व्रत को करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। आज के दिन जल का दान करना, प्यासे को पानी पिलाना और भूखे को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। गुरुवार और एकादशी का यह मिलन धन-धान्य में वृद्धि और करियर में स्थिरता लाने वाला है।
शुभ और अशुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार किसी भी नए कार्य की शुरुआत या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए शुभ समय का चुनाव करना अनिवार्य है:
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अभिजीत मुहूर्त: दिन के 11:49 से 12:41 तक। यह समय किसी भी नए काम की शुरुआत या महत्वपूर्ण मीटिंग के लिए सबसे उत्तम है।
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राहुकाल: दोपहर 01:52 से 03:29 तक। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य या नया निवेश करने से बचना चाहिए।
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:19 से 05:03 तक। यह समय ध्यान, पूजा और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
आज के दिन के उपाय
यदि आप जीवन में आ रही बाधाओं से परेशान हैं, तो आज के दिन निम्नलिखित उपाय आपके लिए लाभकारी हो सकते हैं:
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विष्णु सहस्रनाम: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए आज 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें।
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पीला दान: गुरुवार के कारण आज पीले रंग की वस्तुओं (चना दाल, गुड़, पीले वस्त्र) का दान करना बहुत शुभ माना गया है।
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तुलसी पूजन: तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का दीपक जलाएं। ध्यान रहे कि एकादशी पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
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जल का दान: प्यासे राहगीरों या पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करना इस दिन का सबसे बड़ा पुण्य है।
स्वास्थ्य और मन की स्थिति
स्वाति नक्षत्र के प्रभाव के कारण आज का दिन रचनात्मक कार्यों के लिए काफी ऊर्जावान रहेगा। लेकिन, विशाखा नक्षत्र में प्रवेश के बाद मन में थोड़ी स्थिरता और लक्ष्य-प्राप्ति की इच्छा प्रबल होगी। वृषभ और मकर राशि के जातकों के लिए आज का दिन विशेष रूप से लाभदायक रहेगा। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से आज हल्का और सुपाच्य भोजन ग्रहण करें, क्योंकि यह व्रत का दिन है।
25 जून 2026 का दिन आत्म-मंथन और दान-पुण्य का दिन है। यह केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि हमारे जीवन में अनुशासन लाने का एक अवसर है। पंचांग के बताए गए शुभ मुहूर्तों का पालन करके और नकारात्मक ऊर्जा वाले राहुकाल से बचकर, आप आज के दिन को अपने और अपने परिवार के लिए अधिक सकारात्मक बना सकते हैं। भगवान विष्णु की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।
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25 जून 2026: निर्जला एकादशी का महासंयोग, जानें पंचांग और पूजा के शुभ मुहूर्त
राशिफल
हिंदू पंचांग पांच तत्वों—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण—का एक ऐसा सामंजस्य है जो हमें ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ता है। पंचांग के माध्यम से हम न केवल दिन के शुभ और अशुभ समय को जानते हैं, बल्कि अपने दैनिक कार्यों को ब्रह्मांड की गति के अनुसार व्यवस्थित भी करते हैं। 25 जून 2026 को स्वाति नक्षत्र का प्रभाव दोपहर तक बना रहेगा, जो व्यावसायिक और बौद्धिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
आज का विस्तृत पंचांग विवरण
आज के दिन की ज्योतिषीय स्थिति इस प्रकार है:
-
तिथि: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी (निर्जला एकादशी), जो रात्रि 20:09 तक रहेगी।
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वार: गुरुवार।
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नक्षत्र: स्वाति नक्षत्र (दोपहर तक), उसके बाद विशाखा नक्षत्र का प्रभाव।
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योग: शिव योग (प्रातः तक), उसके बाद सिद्ध योग।
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करण: वणिज और विष्टि (भद्रा)।
निर्जला एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व
निर्जला एकादशी को 'पांडव एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीमसेन ने बिना जल ग्रहण किए इस व्रत का पालन किया था, जिसके कारण उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस व्रत को करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। आज के दिन जल का दान करना, प्यासे को पानी पिलाना और भूखे को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। गुरुवार और एकादशी का यह मिलन धन-धान्य में वृद्धि और करियर में स्थिरता लाने वाला है।
शुभ और अशुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार किसी भी नए कार्य की शुरुआत या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए शुभ समय का चुनाव करना अनिवार्य है:
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अभिजीत मुहूर्त: दिन के 11:49 से 12:41 तक। यह समय किसी भी नए काम की शुरुआत या महत्वपूर्ण मीटिंग के लिए सबसे उत्तम है।
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राहुकाल: दोपहर 01:52 से 03:29 तक। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य या नया निवेश करने से बचना चाहिए।
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:19 से 05:03 तक। यह समय ध्यान, पूजा और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
आज के दिन के उपाय
यदि आप जीवन में आ रही बाधाओं से परेशान हैं, तो आज के दिन निम्नलिखित उपाय आपके लिए लाभकारी हो सकते हैं:
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विष्णु सहस्रनाम: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए आज 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें।
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पीला दान: गुरुवार के कारण आज पीले रंग की वस्तुओं (चना दाल, गुड़, पीले वस्त्र) का दान करना बहुत शुभ माना गया है।
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तुलसी पूजन: तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का दीपक जलाएं। ध्यान रहे कि एकादशी पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
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जल का दान: प्यासे राहगीरों या पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करना इस दिन का सबसे बड़ा पुण्य है।
स्वास्थ्य और मन की स्थिति
स्वाति नक्षत्र के प्रभाव के कारण आज का दिन रचनात्मक कार्यों के लिए काफी ऊर्जावान रहेगा। लेकिन, विशाखा नक्षत्र में प्रवेश के बाद मन में थोड़ी स्थिरता और लक्ष्य-प्राप्ति की इच्छा प्रबल होगी। वृषभ और मकर राशि के जातकों के लिए आज का दिन विशेष रूप से लाभदायक रहेगा। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से आज हल्का और सुपाच्य भोजन ग्रहण करें, क्योंकि यह व्रत का दिन है।
25 जून 2026 का दिन आत्म-मंथन और दान-पुण्य का दिन है। यह केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि हमारे जीवन में अनुशासन लाने का एक अवसर है। पंचांग के बताए गए शुभ मुहूर्तों का पालन करके और नकारात्मक ऊर्जा वाले राहुकाल से बचकर, आप आज के दिन को अपने और अपने परिवार के लिए अधिक सकारात्मक बना सकते हैं। भगवान विष्णु की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।
