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तीन माह से पेंशन नहीं मिलने पर भड़के मुख्य सचिव, अधिकारियों को लगाई फटकार
भोपाल,(म.प्र.)
समीक्षा बैठक में जताई नाराजगी, कहा- आपको तीन महीने वेतन न मिले तो कैसा लगेगा
मध्य प्रदेश में लाखों पेंशनधारकों को पिछले तीन माह से पेंशन नहीं मिलने के मामले ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मुद्दे पर कड़ी फटकार लगाई। बैठक में जब अप्रैल से जून तक बड़ी संख्या में पेंशन हितग्राहियों को भुगतान नहीं होने की स्थिति पर चर्चा हुई तो मुख्य सचिव ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी को लगातार तीन महीने तक वेतन न मिले तो उसे कैसा महसूस होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय के बाद भी विभाग समस्या की जड़ तक क्यों नहीं पहुंच पाया। बताया जा रहा है कि पेंशन भुगतान में देरी का मुख्य कारण हितग्राहियों का सत्यापन कार्य समय पर पूरा नहीं होना है। समीक्षा के दौरान सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख सचिव ने केंद्र सरकार की गाइडलाइन का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन मुख्य सचिव ने बीच में ही उन्हें टोकते हुए कहा कि अब तक समस्या की पहचान और समाधान दोनों में देरी हुई है। बैठक में पूर्व वित्त सचिव भास्कर लाक्षकार का भी उल्लेख आया, जिस पर मुख्य सचिव ने कहा कि जब जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की थी तब आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी लापरवाही सीधे तौर पर आम लोगों को प्रभावित करती है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने केवल पेंशन भुगतान का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि कई बार मंत्रालय स्तर के अधिकारी वास्तविक स्थिति से पूरी तरह अवगत नहीं होते। प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों का जिला प्रशासन और फील्ड अधिकारियों के साथ नियमित संवाद नहीं होने से योजनाओं की निगरानी कमजोर पड़ जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि समस्याएं लंबे समय तक लंबित रहती हैं और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे लोक सेवा गारंटी योजना और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं का सीधा संबंध जनता से है, उनमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। विभागाध्यक्षों को साप्ताहिक स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित कर लंबित मामलों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। साथ ही निचले स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया। अनुराग जैन ने बैठक में लंबित न्यायालयीन मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि अदालतों में लंबित मामलों में समय पर जवाब और दावा प्रस्तुत किया जाए ताकि अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके। इसके अलावा सभी विभागों से वार्षिक कार्ययोजना जल्द प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्रिपरिषद से स्वीकृत मामलों में शत-प्रतिशत आदेश जारी किए जाएं और उनके क्रियान्वयन की नियमित निगरानी हो।
बैठक में वर्ष 1947 से पहले के पुराने कानूनों की समीक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसे कानून जिनकी वर्तमान समय में आवश्यकता नहीं है, उनका परीक्षण कर निरस्तीकरण या संशोधन के प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि ऐसे प्रस्ताव शीघ्र कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं ताकि आगामी विधानसभा सत्र में आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी की जा सके। आगामी मानसून सत्र को देखते हुए विधेयकों और संशोधन प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। समीक्षा बैठक में विधानसभा से जुड़े लंबित मामलों का भी उल्लेख हुआ। मुख्य सचिव ने कहा कि शून्यकाल, अपूर्ण प्रश्न, आश्वासन तथा लोकलेखा समिति की सिफारिशों से संबंधित जवाब समय सीमा के भीतर विधानसभा को उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने विभागों को आगाह किया कि इस प्रकार के मामलों में देरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। इसके अलावा प्रदेश के सभी शासकीय भवनों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इस कार्य में तेजी लाने और बेहतर समन्वय के लिए जिलावार नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए। बैठक में उद्योग विभाग से जुड़े डी-रेगुलेशन के मामलों, गृह विभाग के साइबर धोखाधड़ी प्रकरणों, पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों, मादक पदार्थों की रोकथाम तथा नई न्याय संहिता के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सभी विभागों को परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने और जनता से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
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तीन माह से पेंशन नहीं मिलने पर भड़के मुख्य सचिव, अधिकारियों को लगाई फटकार
भोपाल,(म.प्र.)
मध्य प्रदेश में लाखों पेंशनधारकों को पिछले तीन माह से पेंशन नहीं मिलने के मामले ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मुद्दे पर कड़ी फटकार लगाई। बैठक में जब अप्रैल से जून तक बड़ी संख्या में पेंशन हितग्राहियों को भुगतान नहीं होने की स्थिति पर चर्चा हुई तो मुख्य सचिव ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी को लगातार तीन महीने तक वेतन न मिले तो उसे कैसा महसूस होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय के बाद भी विभाग समस्या की जड़ तक क्यों नहीं पहुंच पाया। बताया जा रहा है कि पेंशन भुगतान में देरी का मुख्य कारण हितग्राहियों का सत्यापन कार्य समय पर पूरा नहीं होना है। समीक्षा के दौरान सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख सचिव ने केंद्र सरकार की गाइडलाइन का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन मुख्य सचिव ने बीच में ही उन्हें टोकते हुए कहा कि अब तक समस्या की पहचान और समाधान दोनों में देरी हुई है। बैठक में पूर्व वित्त सचिव भास्कर लाक्षकार का भी उल्लेख आया, जिस पर मुख्य सचिव ने कहा कि जब जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की थी तब आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी लापरवाही सीधे तौर पर आम लोगों को प्रभावित करती है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने केवल पेंशन भुगतान का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि कई बार मंत्रालय स्तर के अधिकारी वास्तविक स्थिति से पूरी तरह अवगत नहीं होते। प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों का जिला प्रशासन और फील्ड अधिकारियों के साथ नियमित संवाद नहीं होने से योजनाओं की निगरानी कमजोर पड़ जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि समस्याएं लंबे समय तक लंबित रहती हैं और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे लोक सेवा गारंटी योजना और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं का सीधा संबंध जनता से है, उनमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। विभागाध्यक्षों को साप्ताहिक स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित कर लंबित मामलों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। साथ ही निचले स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया। अनुराग जैन ने बैठक में लंबित न्यायालयीन मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि अदालतों में लंबित मामलों में समय पर जवाब और दावा प्रस्तुत किया जाए ताकि अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके। इसके अलावा सभी विभागों से वार्षिक कार्ययोजना जल्द प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्रिपरिषद से स्वीकृत मामलों में शत-प्रतिशत आदेश जारी किए जाएं और उनके क्रियान्वयन की नियमित निगरानी हो।
बैठक में वर्ष 1947 से पहले के पुराने कानूनों की समीक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसे कानून जिनकी वर्तमान समय में आवश्यकता नहीं है, उनका परीक्षण कर निरस्तीकरण या संशोधन के प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि ऐसे प्रस्ताव शीघ्र कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं ताकि आगामी विधानसभा सत्र में आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी की जा सके। आगामी मानसून सत्र को देखते हुए विधेयकों और संशोधन प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। समीक्षा बैठक में विधानसभा से जुड़े लंबित मामलों का भी उल्लेख हुआ। मुख्य सचिव ने कहा कि शून्यकाल, अपूर्ण प्रश्न, आश्वासन तथा लोकलेखा समिति की सिफारिशों से संबंधित जवाब समय सीमा के भीतर विधानसभा को उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने विभागों को आगाह किया कि इस प्रकार के मामलों में देरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। इसके अलावा प्रदेश के सभी शासकीय भवनों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इस कार्य में तेजी लाने और बेहतर समन्वय के लिए जिलावार नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए। बैठक में उद्योग विभाग से जुड़े डी-रेगुलेशन के मामलों, गृह विभाग के साइबर धोखाधड़ी प्रकरणों, पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों, मादक पदार्थों की रोकथाम तथा नई न्याय संहिता के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सभी विभागों को परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने और जनता से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
