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आपातकाल दिवस पर भोपाल में बड़ा आयोजन, दो हजार मीसाबंदी परिवार होंगे सम्मानित
भोपाल,(म.प्र.)
रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया जाएगा याद
देश में लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी भोपाल में शुक्रवार को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। शहर के प्रतिष्ठित रवीन्द्र भवन में होने वाले इस आयोजन में प्रदेशभर से आए करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रहेंगे, जो आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानियों के भोपाल पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष तपन भौमिक सहित कई वरिष्ठ सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहेंगी। मंच से उन लोगों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। बताया जा रहा है कि समारोह में आपातकाल के दौर से जुड़े अनुभवों और उस समय की परिस्थितियों पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले मीसाबंदी परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आपातकाल दिवस को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण लेकिन विवादित अध्याय के रूप में याद किया जाता है। 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद करीब 21 महीनों तक देश में विशेष परिस्थितियां बनी रहीं। इस दौरान कई संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए और राजनीतिक गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा गया। विपक्षी दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया। बड़ी संख्या में लोगों को बिना नियमित न्यायिक प्रक्रिया के जेल भेजा गया था।
मध्यप्रदेश में भी उस समय अनेक राजनीतिक कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग गिरफ्तार किए गए थे। इनमें से कई लोगों को मीसा यानी मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत निरुद्ध किया गया था। ऐसे लोगों को बाद में मीसाबंदी के नाम से जाना गया। आपातकाल समाप्त होने के बाद इन लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जोड़कर देखा गया। यही कारण है कि हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उस दौर को याद किया जाता है और लोकतंत्र की मजबूती पर चर्चा होती है।
इस बार भोपाल में होने वाला कार्यक्रम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में मीसाबंदी परिवारों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई है। आयोजकों का कहना है कि केवल उन लोगों का सम्मान करना उद्देश्य नहीं है जिन्होंने जेल यात्रा की थी, बल्कि उनके परिवारों के त्याग और संघर्ष को भी याद करना जरूरी है। कई परिवारों ने उस समय सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया था। ऐसे में यह कार्यक्रम लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए सामूहिक योगदान को सम्मान देने का प्रयास माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने संबोधन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और संविधान के मूल्यों पर भी विचार रख सकते हैं। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रमों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी और दस्तावेजों का प्रदर्शन भी किया जा सकता है। इसके अलावा कई लोकतंत्र सेनानी अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे नई पीढ़ी को उस दौर के बारे में जानकारी मिल सके।
इस आयोजन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य स्तर पर आपातकाल को लोकतंत्र पर लगाए गए प्रतिबंध के रूप में याद करने की परंपरा को और अधिक प्रमुखता मिली है। सरकार का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को सम्मान देना समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय है। रवीन्द्र भवन में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर राजधानी में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शुक्रवार को सुबह से ही विभिन्न जिलों से आए लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों की मौजूदगी से कार्यक्रम स्थल पर विशेष माहौल रहने की उम्मीद है। आपातकाल दिवस के अवसर पर होने वाला यह आयोजन न केवल इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को याद करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के महत्व को भी एक बार फिर रेखांकित करेगा।
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आपातकाल दिवस पर भोपाल में बड़ा आयोजन, दो हजार मीसाबंदी परिवार होंगे सम्मानित
भोपाल,(म.प्र.)
देश में लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी भोपाल में शुक्रवार को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। शहर के प्रतिष्ठित रवीन्द्र भवन में होने वाले इस आयोजन में प्रदेशभर से आए करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रहेंगे, जो आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानियों के भोपाल पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष तपन भौमिक सहित कई वरिष्ठ सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहेंगी। मंच से उन लोगों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। बताया जा रहा है कि समारोह में आपातकाल के दौर से जुड़े अनुभवों और उस समय की परिस्थितियों पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले मीसाबंदी परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आपातकाल दिवस को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण लेकिन विवादित अध्याय के रूप में याद किया जाता है। 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद करीब 21 महीनों तक देश में विशेष परिस्थितियां बनी रहीं। इस दौरान कई संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए और राजनीतिक गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा गया। विपक्षी दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया। बड़ी संख्या में लोगों को बिना नियमित न्यायिक प्रक्रिया के जेल भेजा गया था।
मध्यप्रदेश में भी उस समय अनेक राजनीतिक कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग गिरफ्तार किए गए थे। इनमें से कई लोगों को मीसा यानी मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत निरुद्ध किया गया था। ऐसे लोगों को बाद में मीसाबंदी के नाम से जाना गया। आपातकाल समाप्त होने के बाद इन लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जोड़कर देखा गया। यही कारण है कि हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उस दौर को याद किया जाता है और लोकतंत्र की मजबूती पर चर्चा होती है।
इस बार भोपाल में होने वाला कार्यक्रम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में मीसाबंदी परिवारों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई है। आयोजकों का कहना है कि केवल उन लोगों का सम्मान करना उद्देश्य नहीं है जिन्होंने जेल यात्रा की थी, बल्कि उनके परिवारों के त्याग और संघर्ष को भी याद करना जरूरी है। कई परिवारों ने उस समय सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया था। ऐसे में यह कार्यक्रम लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए सामूहिक योगदान को सम्मान देने का प्रयास माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने संबोधन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और संविधान के मूल्यों पर भी विचार रख सकते हैं। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रमों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी और दस्तावेजों का प्रदर्शन भी किया जा सकता है। इसके अलावा कई लोकतंत्र सेनानी अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे नई पीढ़ी को उस दौर के बारे में जानकारी मिल सके।
इस आयोजन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य स्तर पर आपातकाल को लोकतंत्र पर लगाए गए प्रतिबंध के रूप में याद करने की परंपरा को और अधिक प्रमुखता मिली है। सरकार का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को सम्मान देना समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय है। रवीन्द्र भवन में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर राजधानी में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शुक्रवार को सुबह से ही विभिन्न जिलों से आए लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों की मौजूदगी से कार्यक्रम स्थल पर विशेष माहौल रहने की उम्मीद है। आपातकाल दिवस के अवसर पर होने वाला यह आयोजन न केवल इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को याद करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के महत्व को भी एक बार फिर रेखांकित करेगा।
