राज्य पुलिस सेवा के अफसरों की आज डीपीसी, 9 अधिकारियों को मिल सकता है आईपीएस अवार्ड

भोपाल,(म.प्र.)

On

संघ लोक सेवा आयोग की चयन समिति करेगी नामों पर विचार, 27 अधिकारियों की सूची में से नौ को भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति मिलने की संभावना

मध्य प्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए गुरुवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से प्रतीक्षित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आज आयोजित होने जा रही है, जिसमें राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नति देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। गृह विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के बाद संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने डीपीसी की तारीख को मंजूरी दी थी। इसके बाद अब सभी औपचारिकताएं पूरी कर बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक पर प्रदेश के पुलिस महकमे की नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे कई वरिष्ठ अधिकारियों के करियर की दिशा तय होगी।

डीपीसी की बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संघ लोक सेवा आयोग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। चयन समिति उपलब्ध रिक्तियों, वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर अधिकारियों के नामों पर विचार करेगी। इस बार कुल नौ रिक्त पदों के लिए चयन प्रक्रिया की जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी, जिसे बाद में औपचारिक मंजूरी के लिए आगे भेजा जाएगा।

गृह विभाग की ओर से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति के लिए प्रस्तावित सूची में कुल 27 अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें वर्ष 1997 और 1998 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। वरिष्ठता सूची और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर चयन समिति इन अधिकारियों की सेवा अवधि, कार्य निष्पादन और प्रशासनिक रिकॉर्ड का मूल्यांकन करेगी। पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अधिकांश अधिकारियों के रिकॉर्ड पहले ही परीक्षण प्रक्रिया से गुजर चुके हैं और डीपीसी में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस बार जिन अधिकारियों के नामों पर विचार होना है उनमें वर्ष 1997 बैच के सीताराम ससत्या और अमृत मीणा शामिल हैं। वहीं 1998 बैच से निमिषा पांडेय, राजेश मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सब्यसाची सर्राफ, समर वर्मा और सत्येन्द्र सिंह तोमर सहित अन्य अधिकारियों के नाम सूची में हैं। कुल 27 अधिकारियों में से नौ अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव है। इसलिए चयन प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। इस बार कुछ नामों को लेकर विशेष चर्चा होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों के मामलों में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कुछ मुद्दे लंबित हैं, जिन पर डीपीसी के दौरान विचार किया जा सकता है। ऐसे मामलों में चयन समिति उपलब्ध दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लेती है। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई जांच या अन्य प्रक्रिया लंबित होती है तो उसके मामले में सीलबंद लिफाफा प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय बैठक में मौजूद चयन समिति ही करेगी।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि कुछ अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया पर लंबित मामलों का असर पड़ सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि डीपीसी पूरी तरह सेवा नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आयोजित की जाएगी। सभी नामों पर निष्पक्ष तरीके से विचार किया जाएगा और पात्रता के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति को पुलिस अधिकारियों के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। आईपीएस अवार्ड मिलने के बाद अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा का दर्जा प्राप्त होता है और उन्हें बड़े प्रशासनिक तथा पुलिस नेतृत्व से जुड़े दायित्व सौंपे जाते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष होने वाली डीपीसी को लेकर अधिकारियों के बीच विशेष उत्साह और प्रतीक्षा रहती है। कई अधिकारी वर्षों की सेवा के बाद इस अवसर का इंतजार करते हैं।

इस बीच राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की डीपीसी को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अभी तक संबंधित प्रस्ताव आगे नहीं भेजा गया है। इसके चलते राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया फिलहाल लंबित बनी हुई है। दूसरी ओर पुलिस विभाग की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आगे बढ़ चुकी है और आज की बैठक के बाद महत्वपूर्ण निर्णय सामने आने की उम्मीद है। पुलिस विभाग से जुड़े जानकारों का मानना है कि डीपीसी केवल पदोन्नति प्रक्रिया नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का भी माध्यम होती है। वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को उच्च जिम्मेदारियां मिलने से पुलिस प्रशासन को नेतृत्व स्तर पर मजबूती मिलती है। यही कारण है कि इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप संपन्न कराया जाता है।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
25 Jun 2026 By Vaishnavi.J

राज्य पुलिस सेवा के अफसरों की आज डीपीसी, 9 अधिकारियों को मिल सकता है आईपीएस अवार्ड

भोपाल,(म.प्र.)

मध्य प्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए गुरुवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से प्रतीक्षित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आज आयोजित होने जा रही है, जिसमें राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नति देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। गृह विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के बाद संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने डीपीसी की तारीख को मंजूरी दी थी। इसके बाद अब सभी औपचारिकताएं पूरी कर बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक पर प्रदेश के पुलिस महकमे की नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे कई वरिष्ठ अधिकारियों के करियर की दिशा तय होगी।

डीपीसी की बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संघ लोक सेवा आयोग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। चयन समिति उपलब्ध रिक्तियों, वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर अधिकारियों के नामों पर विचार करेगी। इस बार कुल नौ रिक्त पदों के लिए चयन प्रक्रिया की जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी, जिसे बाद में औपचारिक मंजूरी के लिए आगे भेजा जाएगा।

गृह विभाग की ओर से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति के लिए प्रस्तावित सूची में कुल 27 अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें वर्ष 1997 और 1998 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। वरिष्ठता सूची और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर चयन समिति इन अधिकारियों की सेवा अवधि, कार्य निष्पादन और प्रशासनिक रिकॉर्ड का मूल्यांकन करेगी। पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अधिकांश अधिकारियों के रिकॉर्ड पहले ही परीक्षण प्रक्रिया से गुजर चुके हैं और डीपीसी में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस बार जिन अधिकारियों के नामों पर विचार होना है उनमें वर्ष 1997 बैच के सीताराम ससत्या और अमृत मीणा शामिल हैं। वहीं 1998 बैच से निमिषा पांडेय, राजेश मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सब्यसाची सर्राफ, समर वर्मा और सत्येन्द्र सिंह तोमर सहित अन्य अधिकारियों के नाम सूची में हैं। कुल 27 अधिकारियों में से नौ अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव है। इसलिए चयन प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। इस बार कुछ नामों को लेकर विशेष चर्चा होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों के मामलों में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कुछ मुद्दे लंबित हैं, जिन पर डीपीसी के दौरान विचार किया जा सकता है। ऐसे मामलों में चयन समिति उपलब्ध दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लेती है। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई जांच या अन्य प्रक्रिया लंबित होती है तो उसके मामले में सीलबंद लिफाफा प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय बैठक में मौजूद चयन समिति ही करेगी।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि कुछ अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया पर लंबित मामलों का असर पड़ सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि डीपीसी पूरी तरह सेवा नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आयोजित की जाएगी। सभी नामों पर निष्पक्ष तरीके से विचार किया जाएगा और पात्रता के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति को पुलिस अधिकारियों के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। आईपीएस अवार्ड मिलने के बाद अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा का दर्जा प्राप्त होता है और उन्हें बड़े प्रशासनिक तथा पुलिस नेतृत्व से जुड़े दायित्व सौंपे जाते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष होने वाली डीपीसी को लेकर अधिकारियों के बीच विशेष उत्साह और प्रतीक्षा रहती है। कई अधिकारी वर्षों की सेवा के बाद इस अवसर का इंतजार करते हैं।

इस बीच राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की डीपीसी को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अभी तक संबंधित प्रस्ताव आगे नहीं भेजा गया है। इसके चलते राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया फिलहाल लंबित बनी हुई है। दूसरी ओर पुलिस विभाग की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आगे बढ़ चुकी है और आज की बैठक के बाद महत्वपूर्ण निर्णय सामने आने की उम्मीद है। पुलिस विभाग से जुड़े जानकारों का मानना है कि डीपीसी केवल पदोन्नति प्रक्रिया नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का भी माध्यम होती है। वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को उच्च जिम्मेदारियां मिलने से पुलिस प्रशासन को नेतृत्व स्तर पर मजबूती मिलती है। यही कारण है कि इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप संपन्न कराया जाता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/9-dpc-officers-of-state-police-service-can-get-ips/article-56895

खबरें और भी हैं

पुलिस अफसरों के नाम पर युवक से एक लाख की ठगी, बिलासपुर में मामला दर्ज

टाप न्यूज

पुलिस अफसरों के नाम पर युवक से एक लाख की ठगी, बिलासपुर में मामला दर्ज

थाने में हुए विवाद के बाद परिवार को डराकर मांगे गए पांच लाख रुपए, एक आरोपी गिरफ्तार, दो अन्य की...
छत्तीसगढ़ 
पुलिस अफसरों के नाम पर युवक से एक लाख की ठगी, बिलासपुर में मामला दर्ज

लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में कार्रवाई तेज, 67 कोचिंग सेंटरों को नोटिस

दुर्ग में 62 और बिलासपुर में 5 संस्थानों में मिली सुरक्षा खामियां, एक कोचिंग सेंटर सील; फायर सेफ्टी और इमरजेंसी...
छत्तीसगढ़ 
लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में कार्रवाई तेज, 67 कोचिंग सेंटरों को नोटिस

पहली कक्षा के बच्चों के लिए 3 महीने का रेडीनेस प्रोग्राम, खेल-खेल में होगी पढ़ाई की शुरुआत

नई शिक्षा नीति के तहत एससीईआरटी ने तैयार किया विशेष मॉड्यूल, भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने पर...
छत्तीसगढ़ 
पहली कक्षा के बच्चों के लिए 3 महीने का रेडीनेस प्रोग्राम, खेल-खेल में होगी पढ़ाई की शुरुआत

सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी तीन दिन में ₹22 हजार टूटी

सोना ₹2,156 सस्ता होकर ₹1.40 लाख पर पहुंचा, वैश्विक हालात और मुनाफावसूली से कीमती धातुओं पर बढ़ा दबाव
बिजनेस 
सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी तीन दिन में ₹22 हजार टूटी

बिजनेस

Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.