निर्जला एकादशी पर शिव योग से चमकेगा इन राशियों का भाग्य।

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25 जून को ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी पर बन रहा है त्रिवेणी संगम, इस विशेष विधि से पूजा और दान करने पर मिलेगा सालभर के व्रतों का पुण्य

सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का स्थान सबसे ऊपर माना गया है, जिसे हम सभी 'निर्जला एकादशी' या 'भीमसेनी एकादशी' के नाम से जानते हैं। आज 25 जून 2026, गुरुवार के दिन यह महापर्व देश भर में बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल की निर्जला एकादशी बेहद खास और दुर्लभ मानी जा रही है, क्योंकि आज के दिन शिव योग, रवि योग और सिद्ध योग का एक अनूठा त्रिवेणी संगम बन रहा है। साथ ही आज गुरुवार का दिन होने के कारण भगवान विष्णु की कृपा जातकों पर दोगुनी बरसेगी।

यह व्रत न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का मार्ग है, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के सहयोग से कई राशियों के लिए जीवन में तरक्की और धन-धान्य के नए द्वार खोलने वाला एक महा-अवसर भी है।

इन भाग्यशाली राशियों के लिए आया है 'अमृत अवसर'

आज बन रहे हंस राजयोग और ग्रहों के विशेष गोचर के कारण 12 राशियों में से कुछ मुख्य राशियों के लिए बेहद सुनहरे अवसर पैदा हो रहे हैं:

  • वृषभ राशि (Taurus): इस राशि के जातकों के लिए आज का दिन आर्थिक रूप से बेहद लाभकारी रहेगा। व्यापार में लंबे समय से अटकी योजनाएं गति पकड़ेंगी और निवेश से बड़ा मुनाफा होने के योग हैं।

  • मिथुन राशि (Gemini): मिथुन राशि के लोगों के करियर में चल रही बाधाएं दूर होंगी। भगवान विष्णु की कृपा से नौकरीपेशा लोगों को उच्च पद या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

  • तुला राशि (Libra): चूंकि आज चंद्रमा तुला राशि में ही गोचर कर रहे हैं, इसलिए इस राशि के जातकों की सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मानसिक शांति और सही निर्णय लेने की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

  • मकर राशि (Capricorn): मकर राशि वाले जातकों को पैतृक संपत्ति या रियल एस्टेट के मामलों में बड़ा लाभ मिल सकता है। आज का दिन आपके व्यावसायिक संपर्कों को मजबूत करेगा।

  • कुंभ राशि (Aquarius): कुंभ राशि के जातकों को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। पूर्व में किए गए किसी निवेश का अप्रत्याशित लाभ आज आपको मिल सकता है।

निर्जला एकादशी पर क्या करना चाहिए? (महत्वपूर्ण नियम और पूजा विधि)

निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है क्योंकि इसमें सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है। यदि आप आज के दिन पूर्ण पुण्य लाभ पाना चाहते हैं, तो इन कार्यों को अवश्य करें:

व्रत और पूजा की सही विधि
1.ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और संकल्प:प्रातः 04:05 से 04:45.

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर भगवान विष्णु के सामने पूरी निष्ठा से निर्जल व्रत रखने का संकल्प लें।

2.श्री हरि का अभिषेक और पूजन:शुभ मुहूर्त: सुबह 10:39 से दोपहर 02:09.

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें चंदन, पीले पुष्प, ऋतु फल और विशेष रूप से तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अर्पित करें। ध्यान रहे कि आज के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, पूजा के लिए एक दिन पहले तोड़े गए पत्तों का ही उपयोग करें।

3.मंत्र जाप और विष्णु चालीसा का पाठ:दिनभर सात्विक भाव.

पूजा के दौरान भगवान विष्णु के महामंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का कम से कम 108 बार जाप करें। विष्णु चालीसा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना मानसिक शांति और नकारात्मकता को दूर करने के लिए सर्वोत्तम है।

4.महा-दान का संकल्प:शाम के समय.

इस दिन मिट्टी के घड़े (कलश) में पानी भरकर, उस पर चीनी या गुड़ रखकर दान करने का विशेष महत्व है। इसके अलावा राहगीरों को पानी या शरबत पिलाना, सत्तू, तरबूज, और पीले वस्त्रों का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है।

5.व्रत का पारण (व्रत खोलना):26 जून, सुबह 05:25 से 08:13 बजे तक.

अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को सुबह शुभ समय के भीतर ही व्रत का पारण करें। सबसे पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन व दान सामग्री दें, उसके बाद स्वयं जल और तुलसी पत्र ग्रहण करके व्रत खोलें।

विशेष चेतावनी (भद्रा काल): आज सुबह 07:08 बजे से भद्रा शुरू हो चुकी है, जो रात 08:09 बजे तक रहेगी। हालांकि भद्रा का प्रभाव इस आध्यात्मिक व्रत पर नहीं पड़ता, फिर भी कोई नया सांसारिक कार्य या बड़ा व्यावसायिक सौदा शुरू करने से पहले दोपहर के अभिजीत मुहूर्त (12:02 से 12:56) का उपयोग करना सबसे सुरक्षित और शुभ रहेगा। आज राहुकाल दोपहर 01:52 से 03:29 तक रहेगा, इस समय शुभ कार्यों से बचें।

यदि आप साल की सभी 24 एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते हैं, तो शास्त्रों के अनुसार केवल आज के इस एक निर्जला एकादशी व्रत को पूरी निष्ठा से करने पर आपको समस्त एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त हो जाता है। यह दिन अपनी इंद्रियों पर विजय पाने और मन को शांत रखने का एक महान आध्यात्मिक अवसर है।

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25 Jun 2026 By Vaishnavi.J

निर्जला एकादशी पर शिव योग से चमकेगा इन राशियों का भाग्य।

राशिफल

सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का स्थान सबसे ऊपर माना गया है, जिसे हम सभी 'निर्जला एकादशी' या 'भीमसेनी एकादशी' के नाम से जानते हैं। आज 25 जून 2026, गुरुवार के दिन यह महापर्व देश भर में बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल की निर्जला एकादशी बेहद खास और दुर्लभ मानी जा रही है, क्योंकि आज के दिन शिव योग, रवि योग और सिद्ध योग का एक अनूठा त्रिवेणी संगम बन रहा है। साथ ही आज गुरुवार का दिन होने के कारण भगवान विष्णु की कृपा जातकों पर दोगुनी बरसेगी।

यह व्रत न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का मार्ग है, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के सहयोग से कई राशियों के लिए जीवन में तरक्की और धन-धान्य के नए द्वार खोलने वाला एक महा-अवसर भी है।

इन भाग्यशाली राशियों के लिए आया है 'अमृत अवसर'

आज बन रहे हंस राजयोग और ग्रहों के विशेष गोचर के कारण 12 राशियों में से कुछ मुख्य राशियों के लिए बेहद सुनहरे अवसर पैदा हो रहे हैं:

  • वृषभ राशि (Taurus): इस राशि के जातकों के लिए आज का दिन आर्थिक रूप से बेहद लाभकारी रहेगा। व्यापार में लंबे समय से अटकी योजनाएं गति पकड़ेंगी और निवेश से बड़ा मुनाफा होने के योग हैं।

  • मिथुन राशि (Gemini): मिथुन राशि के लोगों के करियर में चल रही बाधाएं दूर होंगी। भगवान विष्णु की कृपा से नौकरीपेशा लोगों को उच्च पद या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

  • तुला राशि (Libra): चूंकि आज चंद्रमा तुला राशि में ही गोचर कर रहे हैं, इसलिए इस राशि के जातकों की सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मानसिक शांति और सही निर्णय लेने की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

  • मकर राशि (Capricorn): मकर राशि वाले जातकों को पैतृक संपत्ति या रियल एस्टेट के मामलों में बड़ा लाभ मिल सकता है। आज का दिन आपके व्यावसायिक संपर्कों को मजबूत करेगा।

  • कुंभ राशि (Aquarius): कुंभ राशि के जातकों को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। पूर्व में किए गए किसी निवेश का अप्रत्याशित लाभ आज आपको मिल सकता है।

निर्जला एकादशी पर क्या करना चाहिए? (महत्वपूर्ण नियम और पूजा विधि)

निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है क्योंकि इसमें सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है। यदि आप आज के दिन पूर्ण पुण्य लाभ पाना चाहते हैं, तो इन कार्यों को अवश्य करें:

व्रत और पूजा की सही विधि
1.ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और संकल्प:प्रातः 04:05 से 04:45.

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर भगवान विष्णु के सामने पूरी निष्ठा से निर्जल व्रत रखने का संकल्प लें।

2.श्री हरि का अभिषेक और पूजन:शुभ मुहूर्त: सुबह 10:39 से दोपहर 02:09.

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें चंदन, पीले पुष्प, ऋतु फल और विशेष रूप से तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अर्पित करें। ध्यान रहे कि आज के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, पूजा के लिए एक दिन पहले तोड़े गए पत्तों का ही उपयोग करें।

3.मंत्र जाप और विष्णु चालीसा का पाठ:दिनभर सात्विक भाव.

पूजा के दौरान भगवान विष्णु के महामंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का कम से कम 108 बार जाप करें। विष्णु चालीसा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना मानसिक शांति और नकारात्मकता को दूर करने के लिए सर्वोत्तम है।

4.महा-दान का संकल्प:शाम के समय.

इस दिन मिट्टी के घड़े (कलश) में पानी भरकर, उस पर चीनी या गुड़ रखकर दान करने का विशेष महत्व है। इसके अलावा राहगीरों को पानी या शरबत पिलाना, सत्तू, तरबूज, और पीले वस्त्रों का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है।

5.व्रत का पारण (व्रत खोलना):26 जून, सुबह 05:25 से 08:13 बजे तक.

अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को सुबह शुभ समय के भीतर ही व्रत का पारण करें। सबसे पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन व दान सामग्री दें, उसके बाद स्वयं जल और तुलसी पत्र ग्रहण करके व्रत खोलें।

विशेष चेतावनी (भद्रा काल): आज सुबह 07:08 बजे से भद्रा शुरू हो चुकी है, जो रात 08:09 बजे तक रहेगी। हालांकि भद्रा का प्रभाव इस आध्यात्मिक व्रत पर नहीं पड़ता, फिर भी कोई नया सांसारिक कार्य या बड़ा व्यावसायिक सौदा शुरू करने से पहले दोपहर के अभिजीत मुहूर्त (12:02 से 12:56) का उपयोग करना सबसे सुरक्षित और शुभ रहेगा। आज राहुकाल दोपहर 01:52 से 03:29 तक रहेगा, इस समय शुभ कार्यों से बचें।

यदि आप साल की सभी 24 एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते हैं, तो शास्त्रों के अनुसार केवल आज के इस एक निर्जला एकादशी व्रत को पूरी निष्ठा से करने पर आपको समस्त एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त हो जाता है। यह दिन अपनी इंद्रियों पर विजय पाने और मन को शांत रखने का एक महान आध्यात्मिक अवसर है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/the-luck-of-these-zodiac-signs-will-shine-with-shiva/article-56857

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