शिशुओं की मालिश के लिए नारियल तेल या घी — क्या है बेहतर विकल्प?

लाइफस्टाइल डेस्क

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मौसम, त्वचा और पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर समझें सही चुनाव

नवजात शिशु की मालिश भारतीय पारिवारिक परंपरा का अहम हिस्सा है। यह केवल शरीर को मजबूत बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चे की त्वचा, नींद और समग्र विकास से भी जुड़ी मानी जाती है। ऐसे में अक्सर माता-पिता के मन में सवाल उठता है—मालिश के लिए नारियल तेल बेहतर है या घी? दोनों के अपने फायदे हैं, लेकिन सही विकल्प बच्चे की त्वचा और मौसम के अनुसार तय होता है।

नारियल तेल: हल्का, ठंडक देने वाला और त्वचा के अनुकूल
नारियल तेल को शिशुओं की मालिश के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता है। इसकी बनावट हल्की होती है, जिससे यह त्वचा में जल्दी समा जाता है। गर्मियों और उमस वाले मौसम में यह त्वचा को ठंडक देता है और रैशेज या जलन की संभावना कम करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, संवेदनशील त्वचा वाले बच्चों के लिए नारियल तेल अधिक उपयुक्त रहता है क्योंकि इसमें प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। यह त्वचा को नमी देता है और संक्रमण से भी बचाव में मदद करता है।हालांकि, ठंड के मौसम में केवल नारियल तेल पर्याप्त गर्माहट नहीं दे पाता, इसलिए सर्दियों में इसके उपयोग पर पुनर्विचार किया जाता है।

घी: पोषण और गर्माहट का पारंपरिक विकल्प
घी का उपयोग सदियों से शिशु मालिश में किया जाता रहा है। सर्दियों में घी से मालिश करने से शरीर को गर्माहट मिलती है और त्वचा को गहराई से पोषण मिलता है। यह त्वचा को मुलायम बनाता है और सूखेपन को कम करता है।

परंपरागत मान्यताओं में घी को हड्डियों और मांसपेशियों के विकास के लिए लाभकारी माना जाता है। हालांकि, इसकी बनावट भारी होती है, जिससे गर्म मौसम में यह त्वचा पर चिपचिपापन पैदा कर सकता है। इससे पसीना और रैशेज की समस्या भी बढ़ सकती है।

कैसे करें सही चुनाव?
शिशु की मालिश के लिए तेल या घी का चयन करते समय तीन बातों पर ध्यान देना जरूरी है—मौसम, त्वचा का प्रकार और बच्चे की प्रतिक्रिया।

• गर्मियों में हल्का और ठंडक देने वाला नारियल तेल बेहतर विकल्प माना जाता है।
• सर्दियों में त्वचा को गर्माहट देने के लिए घी का उपयोग किया जा सकता है।
• यदि बच्चे की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो, तो पहले छोटे हिस्से पर परीक्षण करना चाहिए।

सावधानियां भी जरूरी
मालिश हमेशा हल्के हाथों से करनी चाहिए। तेल या घी शुद्ध और ताजा होना चाहिए। मालिश के बाद बच्चे को तुरंत ठंडी हवा या पानी के संपर्क में न लाएं।

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20 Feb 2026 By Nitin Trivedi

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लाइफस्टाइल डेस्क

नवजात शिशु की मालिश भारतीय पारिवारिक परंपरा का अहम हिस्सा है। यह केवल शरीर को मजबूत बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चे की त्वचा, नींद और समग्र विकास से भी जुड़ी मानी जाती है। ऐसे में अक्सर माता-पिता के मन में सवाल उठता है—मालिश के लिए नारियल तेल बेहतर है या घी? दोनों के अपने फायदे हैं, लेकिन सही विकल्प बच्चे की त्वचा और मौसम के अनुसार तय होता है।

नारियल तेल: हल्का, ठंडक देने वाला और त्वचा के अनुकूल
नारियल तेल को शिशुओं की मालिश के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता है। इसकी बनावट हल्की होती है, जिससे यह त्वचा में जल्दी समा जाता है। गर्मियों और उमस वाले मौसम में यह त्वचा को ठंडक देता है और रैशेज या जलन की संभावना कम करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, संवेदनशील त्वचा वाले बच्चों के लिए नारियल तेल अधिक उपयुक्त रहता है क्योंकि इसमें प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। यह त्वचा को नमी देता है और संक्रमण से भी बचाव में मदद करता है।हालांकि, ठंड के मौसम में केवल नारियल तेल पर्याप्त गर्माहट नहीं दे पाता, इसलिए सर्दियों में इसके उपयोग पर पुनर्विचार किया जाता है।

घी: पोषण और गर्माहट का पारंपरिक विकल्प
घी का उपयोग सदियों से शिशु मालिश में किया जाता रहा है। सर्दियों में घी से मालिश करने से शरीर को गर्माहट मिलती है और त्वचा को गहराई से पोषण मिलता है। यह त्वचा को मुलायम बनाता है और सूखेपन को कम करता है।

परंपरागत मान्यताओं में घी को हड्डियों और मांसपेशियों के विकास के लिए लाभकारी माना जाता है। हालांकि, इसकी बनावट भारी होती है, जिससे गर्म मौसम में यह त्वचा पर चिपचिपापन पैदा कर सकता है। इससे पसीना और रैशेज की समस्या भी बढ़ सकती है।

कैसे करें सही चुनाव?
शिशु की मालिश के लिए तेल या घी का चयन करते समय तीन बातों पर ध्यान देना जरूरी है—मौसम, त्वचा का प्रकार और बच्चे की प्रतिक्रिया।

• गर्मियों में हल्का और ठंडक देने वाला नारियल तेल बेहतर विकल्प माना जाता है।
• सर्दियों में त्वचा को गर्माहट देने के लिए घी का उपयोग किया जा सकता है।
• यदि बच्चे की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो, तो पहले छोटे हिस्से पर परीक्षण करना चाहिए।

सावधानियां भी जरूरी
मालिश हमेशा हल्के हाथों से करनी चाहिए। तेल या घी शुद्ध और ताजा होना चाहिए। मालिश के बाद बच्चे को तुरंत ठंडी हवा या पानी के संपर्क में न लाएं।

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