27% ओबीसी आरक्षण विवाद की सुनवाई अब हाईकोर्ट में, सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाएं लौटाईं

जबलपुर (म.प्र.)

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शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश किए समाप्त, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को दो माह में अंतिम फैसला देने के निर्देश

मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद पर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं को वापस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया है। साथ ही अब तक दिए गए सभी अंतरिम आदेशों को भी प्रभावहीन कर दिया गया है।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण की संवैधानिक वैधता का परीक्षण हाईकोर्ट स्तर पर ही किया जाना उचित होगा। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि हाईकोर्ट इस पूरे मामले की सुनवाई दो महीने के भीतर पूरी कर अंतिम निर्णय दे।

देरी पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की भूमिका पर असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि मामले को लेकर अनावश्यक देरी हुई है, जिससे न तो भर्ती प्रक्रियाएं पूरी हो सकीं और न ही आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो पाई। इसी आधार पर कोर्ट ने हस्तक्षेप सीमित रखते हुए मामला वापस हाईकोर्ट को सौंप दिया।

2019 के फैसले से शुरू हुआ विवाद

मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2019 में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। इसके बाद सरकारी भर्तियों में इस प्रावधान को लागू करने की तैयारी शुरू हुई, लेकिन जल्द ही इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर कर दी गईं।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि ओबीसी आरक्षण बढ़ने से राज्य में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से काफी अधिक हो जाएगी, जो सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों के विपरीत है।

87-13 का फॉर्मूला बना अस्थायी रास्ता

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेशों के तहत भर्ती प्रक्रियाओं में 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्ति की गई, जबकि शेष 13 प्रतिशत पद ओबीसी आरक्षण से जुड़े फैसले तक होल्ड पर रखे गए। बाद में राज्य सरकार ने इस व्यवस्था के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब पूरा मामला फिर से हाईकोर्ट के पाले में आ गया है। दो महीने की समयसीमा तय होने से सरकारी भर्तियों, अभ्यर्थियों और प्रशासन सभी की निगाहें अब हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

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www.dainikjagranmpcg.com
20 Feb 2026 By Nitin Trivedi

27% ओबीसी आरक्षण विवाद की सुनवाई अब हाईकोर्ट में, सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाएं लौटाईं

जबलपुर (म.प्र.)

मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद पर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं को वापस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया है। साथ ही अब तक दिए गए सभी अंतरिम आदेशों को भी प्रभावहीन कर दिया गया है।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण की संवैधानिक वैधता का परीक्षण हाईकोर्ट स्तर पर ही किया जाना उचित होगा। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि हाईकोर्ट इस पूरे मामले की सुनवाई दो महीने के भीतर पूरी कर अंतिम निर्णय दे।

देरी पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की भूमिका पर असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि मामले को लेकर अनावश्यक देरी हुई है, जिससे न तो भर्ती प्रक्रियाएं पूरी हो सकीं और न ही आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो पाई। इसी आधार पर कोर्ट ने हस्तक्षेप सीमित रखते हुए मामला वापस हाईकोर्ट को सौंप दिया।

2019 के फैसले से शुरू हुआ विवाद

मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2019 में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। इसके बाद सरकारी भर्तियों में इस प्रावधान को लागू करने की तैयारी शुरू हुई, लेकिन जल्द ही इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर कर दी गईं।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि ओबीसी आरक्षण बढ़ने से राज्य में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से काफी अधिक हो जाएगी, जो सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों के विपरीत है।

87-13 का फॉर्मूला बना अस्थायी रास्ता

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेशों के तहत भर्ती प्रक्रियाओं में 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्ति की गई, जबकि शेष 13 प्रतिशत पद ओबीसी आरक्षण से जुड़े फैसले तक होल्ड पर रखे गए। बाद में राज्य सरकार ने इस व्यवस्था के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब पूरा मामला फिर से हाईकोर्ट के पाले में आ गया है। दो महीने की समयसीमा तय होने से सरकारी भर्तियों, अभ्यर्थियों और प्रशासन सभी की निगाहें अब हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

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