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बार–बार हैवी पीरियड्स: क्या हो सकता है यूटेरिन फाइब्रॉइड? जानें 12 चेतावनी संकेत
लाइफस्टाइल डेस्क
लगातार भारी मासिक धर्म और अन्य लक्षण यूटेरिन फाइब्रॉइड का संकेत हो सकते हैं; समय पर डॉक्टर से जांच आवश्यक
बार-बार भारी पीरियड्स होना केवल थकान या सामान्य असुविधा नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार ज्यादा खून बहना और पीरियड्स का असामान्य पैटर्न यूटेरिन फाइब्रॉइड यानी गर्भाशय की मांसपेशियों में ग़ैर-कैंसरजन्य वृद्धि का संकेत हो सकता है। यह स्थिति महिलाओं में प्रजनन स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फाइब्रॉइड महिलाओं में सामान्यतः 30 से 50 वर्ष की आयु में अधिक पाए जाते हैं, लेकिन हाल के अध्ययनों में यह 20 की दशक में भी देखे जा रहे हैं। फाइब्रॉइड का कारण हार्मोनल असंतुलन, आनुवंशिक प्रवृत्ति और जीवनशैली से जुड़ी कई कारक मानी जाती हैं।
12 चेतावनी संकेत जिन्हें इग्नोंर न करें
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पीरियड्स के दौरान असामान्य रूप से भारी खून बहना
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पीरियड्स के बीच अचानक रक्तस्राव
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पेट और निचले हिस्से में लगातार भारीपन या दर्द
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पीरियड्स के समय थकान या कमजोरी महसूस होना
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पेशाब की संख्या में वृद्धि या पेशाब में कठिनाई
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पीठ और कमर में लगातार दर्द
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पेट में सूजन या मोटापा महसूस होना
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सेक्स के दौरान दर्द
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कब्ज या आंत्र समस्याएं
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मासिक धर्म के समय खून के थक्के बनना
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अनियमित पीरियड्स या देर से शुरू होना
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अचानक वजन बढ़ना या मितली का महसूस होना
यदि ये लक्षण लगातार दो–तीन मासिक चक्रों में दिखाई दें, तो समय पर गाइनेकोलॉजिस्ट से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। शुरुआती पहचान और जांच के बाद, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई जैसी तकनीक से फाइब्रॉइड की सटीक स्थिति और आकार का पता लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि हल्के फाइब्रॉइड में दवा या हार्मोनल थेरेपी से नियंत्रण किया जा सकता है, जबकि बड़े फाइब्रॉइड में सर्जरी जैसे विकल्प पर विचार करना पड़ सकता है। इसके साथ ही, जीवनशैली में बदलाव—जैसे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव कम करना—लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
बार-बार हैवी पीरियड्स को कभी भी सामान्य नहीं मानना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार न केवल स्वास्थ्य को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि प्रजनन क्षमता और रोजमर्रा की जीवनशैली को भी प्रभावित होने से बचाते हैं।
महिलाओं को अपने मासिक चक्र की नियमित निगरानी करनी चाहिए। किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करने की बजाय डॉक्टर से परामर्श करना फाइब्रॉइड जैसी स्थितियों की पहचान और उपचार में निर्णायक साबित होता है।
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