प्रमोशन में आरक्षण: हर विभाग में बनेगी समिति, उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा

जबलपुर (म.प्र.)

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राज्य सरकार का स्पष्टीकरण दर्ज; पदोन्नति नीति को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार

मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर चल रहे बहुचर्चित मामले में जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अब प्रत्येक विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया के लिए अलग-अलग समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों की जिम्मेदारी होगी कि आरक्षण से जुड़े सभी वैधानिक प्रावधानों और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। सुनवाई पूरी होने के बाद द्वैध पीठ ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की पीठ ने 17 फरवरी को विस्तृत बहस सुनी। राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत जवाब को अभिलेख में दर्ज कर लिया गया है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से पदोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और नियमसम्मत बनेगी तथा पूर्व में उठी आपत्तियों का समाधान होगा।

यह मामला राज्य सरकार की नई पदोन्नति नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था से समान अवसर के सिद्धांत पर असर पड़ता है। दूसरी ओर सरकार का पक्ष है कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप आरक्षण नीति लागू की गई है और इसे विधिसम्मत तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2002 से जुड़ी है, जब मध्य प्रदेश सरकार ने लोक सेवा (पदोन्नति) नियम बनाते हुए प्रमोशन में आरक्षण लागू किया था। इसके बाद आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलता रहा। कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि इससे अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों के अवसर प्रभावित हुए और सेवा संरचना में असंतुलन पैदा हुआ।

विवाद बढ़ने पर मामला न्यायालय पहुंचा। सुनवाई के दौरान यह तर्क भी रखा गया कि पदोन्नति का लाभ एक ही स्तर पर सीमित होना चाहिए, न कि प्रत्येक स्तर पर। इन दलीलों पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल 2016 को संबंधित नियमों को निरस्त कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। शीर्ष अदालत ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया, जिसके चलते वर्ष 2016 से प्रदेश में पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावी रूप से रुकी हुई है।

अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने निर्णय सुरक्षित रखा है। प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारी इस फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर उनकी सेवा शर्तों और भविष्य की पदोन्नति पर पड़ेगा।

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