सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक की विभागीय जांच निरस्त, नए सिरे से कार्यवाही के निर्देश

ग्वालियर (म.प्र.)

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फर्जी दस्तावेजों से नियुक्ति के आरोपों से जुड़ा मामला; प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन पर अदालत की टिप्पणी

उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने गजराराजा मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. गिरजा शंकर गुप्ता के खिलाफ चल रही विभागीय जांच को निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि जांच प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। न्यायमूर्ति आशीष श्रोती ने निर्देश दिया है कि प्रकरण में नई चार्जशीट जारी कर जांच की प्रक्रिया प्रारंभिक चरण से दोबारा शुरू की जाए।

यह मामला डॉ. गुप्ता पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने के आरोपों से संबंधित है। वे वर्ष 2019 में अधीक्षक पद पर नियुक्त हुए थे। जुलाई 2025 में शिकायत मिलने के बाद संस्थान के डीन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसके बाद 30 अक्टूबर 2025 को चार्जशीट जारी की गई।

हालांकि डॉ. गुप्ता का कहना है कि उन्हें निर्धारित समय पर चार्जशीट की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। उनके अनुसार जांच अधिकारी ने दिसंबर में पहली बार दस्तावेज सौंपे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान उन्हें आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए और मूल भर्ती फाइल का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी गई।

सुनवाई के दौरान जांच की निष्पक्षता पर भी प्रश्न उठे। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया कि जांच अधिकारी डॉ. के.पी. रंजन और प्रस्तुतिकरण अधिकारी अनिल शाक्य ने संयुक्त रूप से चार्जशीट और जांच प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर किए थे। अदालत ने इसे प्रक्रिया की निष्पक्षता के विपरीत माना। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जांच अधिकारी की भूमिका एक निष्पक्ष निर्णायक की होती है, जबकि प्रस्तुतिकरण अधिकारी अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर से पक्षपात की आशंका उत्पन्न होती है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यवाही में आरोपित अधिकारी को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना और उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देना अनिवार्य है। चूंकि इन प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन नहीं किया गया, इसलिए पूरी जांच को निरस्त करना उचित समझा गया।

अब संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया गया है कि विधि के अनुसार नई चार्जशीट जारी कर पुनः जांच प्रारंभ की जाए। मामले की आगे की कार्यवाही प्रशासनिक स्तर पर तय होगी।

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Edited By: Nitin Trivedi

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18 Feb 2026 By Nitin Trivedi

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक की विभागीय जांच निरस्त, नए सिरे से कार्यवाही के निर्देश

ग्वालियर (म.प्र.)

उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने गजराराजा मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. गिरजा शंकर गुप्ता के खिलाफ चल रही विभागीय जांच को निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि जांच प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। न्यायमूर्ति आशीष श्रोती ने निर्देश दिया है कि प्रकरण में नई चार्जशीट जारी कर जांच की प्रक्रिया प्रारंभिक चरण से दोबारा शुरू की जाए।

यह मामला डॉ. गुप्ता पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने के आरोपों से संबंधित है। वे वर्ष 2019 में अधीक्षक पद पर नियुक्त हुए थे। जुलाई 2025 में शिकायत मिलने के बाद संस्थान के डीन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसके बाद 30 अक्टूबर 2025 को चार्जशीट जारी की गई।

हालांकि डॉ. गुप्ता का कहना है कि उन्हें निर्धारित समय पर चार्जशीट की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। उनके अनुसार जांच अधिकारी ने दिसंबर में पहली बार दस्तावेज सौंपे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान उन्हें आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए और मूल भर्ती फाइल का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी गई।

सुनवाई के दौरान जांच की निष्पक्षता पर भी प्रश्न उठे। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया कि जांच अधिकारी डॉ. के.पी. रंजन और प्रस्तुतिकरण अधिकारी अनिल शाक्य ने संयुक्त रूप से चार्जशीट और जांच प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर किए थे। अदालत ने इसे प्रक्रिया की निष्पक्षता के विपरीत माना। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जांच अधिकारी की भूमिका एक निष्पक्ष निर्णायक की होती है, जबकि प्रस्तुतिकरण अधिकारी अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर से पक्षपात की आशंका उत्पन्न होती है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यवाही में आरोपित अधिकारी को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना और उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देना अनिवार्य है। चूंकि इन प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन नहीं किया गया, इसलिए पूरी जांच को निरस्त करना उचित समझा गया।

अब संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया गया है कि विधि के अनुसार नई चार्जशीट जारी कर पुनः जांच प्रारंभ की जाए। मामले की आगे की कार्यवाही प्रशासनिक स्तर पर तय होगी।

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