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पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा दावा, एनआईए ने चार्जशीट में हाफिज सईद की भूमिका बताई अहम
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अदालत में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेतृत्व पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया। जांच में सीमा पार आतंकी नेटवर्क, हैंडलर्स और फंडिंग चैनल से जुड़े नए तथ्य सामने आने का दावा
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में वर्ष 2025 में हुए आतंकी हमले की जांच एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले में अदालत के समक्ष सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करते हुए कई नए दावे किए हैं। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और तकनीकी इनपुट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि हमले की योजना सीमा पार बैठे आतंकवादी नेटवर्क के निर्देशन में तैयार की गई थी। चार्जशीट में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद की भूमिका को भी प्रमुख बताया गया है।
एनआईए के अनुसार पहलगाम हमले की तैयारी कई स्तरों पर की गई थी। इसमें आतंकियों की घुसपैठ, हथियारों की उपलब्धता, स्थानीय मॉड्यूल की सक्रियता और सीमा पार से मिलने वाले निर्देशों की अलग-अलग कड़ियों को जोड़कर देखा गया है। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्य, संचार रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारियों ने इस पूरे नेटवर्क की तस्वीर को पहले से अधिक स्पष्ट किया है।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र बैसरन घाटी में हुए इस आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस दिन बड़ी संख्या में पर्यटक घाटी में मौजूद थे, तभी हथियारबंद आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया था और राष्ट्रीय स्तर पर जांच शुरू की गई थी।
एनआईए की नई चार्जशीट में कहा गया है कि इस हमले का उद्देश्य केवल आम नागरिकों को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि देश में भय का माहौल पैदा करना और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना भी था। एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपों का उल्लेख किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार पहली चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी जांच लगातार जारी रही। इस दौरान कई नए इनपुट प्राप्त हुए, जिनके आधार पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट तैयार की गई। इसमें पहले से शामिल आरोपियों के अलावा आतंकवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व और उसके संचालन तंत्र से जुड़े नए पहलुओं को शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सीमा पार से संचालित कमांड संरचना की भी विस्तृत पड़ताल की गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि हमले में शामिल आतंकियों को लगातार निर्देश दिए जा रहे थे। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि आतंकियों तक हथियार, संचार उपकरण और अन्य संसाधन किस माध्यम से पहुंचे। इसके लिए वित्तीय लेनदेन, डिजिटल ट्रेल और सीमा पार मौजूद संपर्कों का विश्लेषण किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस मामले में शामिल तीन आतंकियों को बाद में अलग-अलग अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने मार गिराया। हालांकि एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल कई अन्य लोग अब भी जांच के दायरे में हैं। इनमें सीमा पार बैठे हैंडलर्स और उनके स्थानीय संपर्क भी शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच में जिस आतंकी हैंडलर का नाम पहले सामने आया था, उसकी तलाश अब भी जारी है। एजेंसियां उसके संभावित ठिकानों और नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं। उसके बारे में सूचना देने वाले के लिए पहले से घोषित इनाम भी प्रभावी है। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यक्ति तक पहुंचने से पूरे आतंकी मॉड्यूल के बारे में और महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को और सख्त किया था। इसी क्रम में मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों ने सीमापार आतंकी ढांचों के खिलाफ कार्रवाई की थी। सरकार ने उस समय कहा था कि अभियान का उद्देश्य आतंकवादी ठिकानों और प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाना था, जहां से भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस मामले में तकनीकी जांच की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। मोबाइल डेटा, इंटरनेट संचार, डिजिटल उपकरणों से प्राप्त जानकारी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर कई नई कड़ियां सामने आई हैं। इसके अलावा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल होने का अर्थ यह है कि मूल जांच के बाद एजेंसी को अतिरिक्त साक्ष्य और नए तथ्य मिले हैं, जिन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। यदि आगे भी जांच में नए प्रमाण सामने आते हैं तो एजेंसी उन्हें भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना सकती है।
एनआईए फिलहाल इस पूरे आतंकी नेटवर्क की शेष कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच का दायरा केवल हमले में शामिल आतंकियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके फंडिंग नेटवर्क, विदेशी संपर्क, स्थानीय सहयोगियों और सीमा पार संचालित कमांड सिस्टम तक बढ़ाया गया है। मामले से जुड़े दस्तावेज, तकनीकी रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जबकि फरार आरोपियों और उनके नेटवर्क की तलाश लगातार जारी है।
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में वर्ष 2025 में हुए आतंकी हमले की जांच एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले में अदालत के समक्ष सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करते हुए कई नए दावे किए हैं। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और तकनीकी इनपुट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि हमले की योजना सीमा पार बैठे आतंकवादी नेटवर्क के निर्देशन में तैयार की गई थी। चार्जशीट में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद की भूमिका को भी प्रमुख बताया गया है।
एनआईए के अनुसार पहलगाम हमले की तैयारी कई स्तरों पर की गई थी। इसमें आतंकियों की घुसपैठ, हथियारों की उपलब्धता, स्थानीय मॉड्यूल की सक्रियता और सीमा पार से मिलने वाले निर्देशों की अलग-अलग कड़ियों को जोड़कर देखा गया है। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्य, संचार रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारियों ने इस पूरे नेटवर्क की तस्वीर को पहले से अधिक स्पष्ट किया है।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र बैसरन घाटी में हुए इस आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस दिन बड़ी संख्या में पर्यटक घाटी में मौजूद थे, तभी हथियारबंद आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया था और राष्ट्रीय स्तर पर जांच शुरू की गई थी।
एनआईए की नई चार्जशीट में कहा गया है कि इस हमले का उद्देश्य केवल आम नागरिकों को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि देश में भय का माहौल पैदा करना और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना भी था। एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपों का उल्लेख किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार पहली चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी जांच लगातार जारी रही। इस दौरान कई नए इनपुट प्राप्त हुए, जिनके आधार पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट तैयार की गई। इसमें पहले से शामिल आरोपियों के अलावा आतंकवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व और उसके संचालन तंत्र से जुड़े नए पहलुओं को शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सीमा पार से संचालित कमांड संरचना की भी विस्तृत पड़ताल की गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि हमले में शामिल आतंकियों को लगातार निर्देश दिए जा रहे थे। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि आतंकियों तक हथियार, संचार उपकरण और अन्य संसाधन किस माध्यम से पहुंचे। इसके लिए वित्तीय लेनदेन, डिजिटल ट्रेल और सीमा पार मौजूद संपर्कों का विश्लेषण किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस मामले में शामिल तीन आतंकियों को बाद में अलग-अलग अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने मार गिराया। हालांकि एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल कई अन्य लोग अब भी जांच के दायरे में हैं। इनमें सीमा पार बैठे हैंडलर्स और उनके स्थानीय संपर्क भी शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच में जिस आतंकी हैंडलर का नाम पहले सामने आया था, उसकी तलाश अब भी जारी है। एजेंसियां उसके संभावित ठिकानों और नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं। उसके बारे में सूचना देने वाले के लिए पहले से घोषित इनाम भी प्रभावी है। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यक्ति तक पहुंचने से पूरे आतंकी मॉड्यूल के बारे में और महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को और सख्त किया था। इसी क्रम में मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों ने सीमापार आतंकी ढांचों के खिलाफ कार्रवाई की थी। सरकार ने उस समय कहा था कि अभियान का उद्देश्य आतंकवादी ठिकानों और प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाना था, जहां से भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस मामले में तकनीकी जांच की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। मोबाइल डेटा, इंटरनेट संचार, डिजिटल उपकरणों से प्राप्त जानकारी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर कई नई कड़ियां सामने आई हैं। इसके अलावा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल होने का अर्थ यह है कि मूल जांच के बाद एजेंसी को अतिरिक्त साक्ष्य और नए तथ्य मिले हैं, जिन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। यदि आगे भी जांच में नए प्रमाण सामने आते हैं तो एजेंसी उन्हें भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना सकती है।
एनआईए फिलहाल इस पूरे आतंकी नेटवर्क की शेष कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच का दायरा केवल हमले में शामिल आतंकियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके फंडिंग नेटवर्क, विदेशी संपर्क, स्थानीय सहयोगियों और सीमा पार संचालित कमांड सिस्टम तक बढ़ाया गया है। मामले से जुड़े दस्तावेज, तकनीकी रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जबकि फरार आरोपियों और उनके नेटवर्क की तलाश लगातार जारी है।
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