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महिला टी-20 विश्व कप पर फिर ऑस्ट्रेलिया का कब्जा, इंग्लैंड को हराकर सातवीं बार बनी चैंपियन
स्पोर्ट्स डेस्क
लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल में 151 रन का लक्ष्य तीन विकेट खोकर किया हासिल, बेथ मूनी और फीबी लिचफील्ड की शतकीय साझेदारी ने पलटा मैच
महिला टी-20 विश्व कप 2026 का खिताब एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के नाम रहा। क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदानों में शामिल लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इंग्लैंड को सात विकेट से हराकर इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया। यह ऑस्ट्रेलिया का सातवां महिला टी-20 विश्व कप खिताब है, जो इस टूर्नामेंट में उसके लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को और मजबूत करता है। लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी और 17 गेंद शेष रहते जीत दर्ज कर ली।
फाइनल मुकाबले में 151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शुरुआती झटके के बावजूद घबराहट नहीं दिखाई। टीम की अनुभवी बल्लेबाज बेथ मूनी ने एक बार फिर बड़े मुकाबले में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने आक्रामक और संयमित बल्लेबाजी का बेहतरीन मिश्रण दिखाते हुए 49 गेंदों में 64 रन बनाए। उनकी पारी में 10 आकर्षक चौके शामिल रहे। दूसरी ओर युवा बल्लेबाज फीबी लिचफील्ड ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 35 गेंदों में 48 रन जोड़े। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 100 रन की साझेदारी कर इंग्लैंड की वापसी की सभी उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया।
जब जीत कुछ ही रन दूर थी, तब एलिस पेरी और एश्ले गार्डनर ने बिना किसी दबाव के पारी को आगे बढ़ाया। पेरी 13 रन बनाकर नाबाद लौटीं, जबकि गार्डनर ने भी अंत तक क्रीज पर रहकर टीम को जीत दिलाई। ऑस्ट्रेलिया ने केवल तीन विकेट गंवाकर लक्ष्य हासिल किया और एक बार फिर दिखाया कि बड़े मुकाबलों में उसका अनुभव और संतुलन उसे बाकी टीमों से अलग बनाता है।
इंग्लैंड की ओर से गेंदबाजी में लॉरेन बेल, चार्ली डीन और सोफी एक्लस्टन ने एक-एक विकेट जरूर हासिल किया, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को लंबे समय तक रोक पाने में वे सफल नहीं रहे। इंग्लैंड के गेंदबाज शुरुआती सफलता के बाद लगातार दबाव बनाने में नाकाम रहे, जिसका फायदा ऑस्ट्रेलिया ने पूरी तरह उठाया।
इससे पहले इंग्लैंड ने टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी की। शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए। हालांकि कप्तान नैट सिवर-ब्रंट ने जिम्मेदारी संभालते हुए पारी को स्थिर किया। उन्होंने 58 रन की नाबाद पारी खेली और फ्रेया कैम्प के साथ मिलकर इंग्लैंड को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। फ्रेया कैम्प ने भी 44 रन बनाकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों खिलाड़ियों ने पांचवें विकेट के लिए 80 रन की अहम साझेदारी की, जिसकी बदौलत इंग्लैंड 20 ओवर में चार विकेट खोकर 150 रन तक पहुंचने में सफल रहा।
इंग्लैंड की बल्लेबाजी में शीर्ष क्रम पूरी तरह प्रभाव छोड़ने में असफल रहा। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के कारण टीम पर दबाव बना रहा। ऐसे समय में कप्तान सिवर-ब्रंट ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की और आखिरी ओवरों में तेजी से रन जुटाए। फ्रेया कैम्प ने भी उनका अच्छा साथ दिया, लेकिन दोनों बल्लेबाजों की मेहनत आखिरकार टीम को जीत नहीं दिला सकी।
ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी पूरे मैच में अनुशासित रही। कप्तान सोफी मोलिन्यू ने गेंदबाजों का प्रभावी उपयोग किया और इंग्लैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। लूसी हैमिल्टन, एनाबेल सदरलैंड, सोफी मोलिन्यू और किम गार्थ ने एक-एक विकेट हासिल किया। खास बात यह रही कि ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में रन गति को नियंत्रित रखा, जिसका असर इंग्लैंड के अंतिम स्कोर पर साफ दिखाई दिया।
पूरे टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया ने लगातार संतुलित प्रदर्शन किया। बल्लेबाजी में अनुभव और युवाओं का शानदार तालमेल देखने को मिला, जबकि गेंदबाजी इकाई ने हर मैच में विपक्षी टीमों पर दबाव बनाए रखा। फाइनल में भी टीम ने उसी आत्मविश्वास के साथ खेल दिखाया, जिसके दम पर वह वर्षों से महिला क्रिकेट की सबसे सफल टीम बनी हुई है।
दूसरी ओर इंग्लैंड ने भी पूरे टूर्नामेंट में शानदार क्रिकेट खेलकर फाइनल तक का सफर तय किया था। टीम ने लीग चरण और नॉकआउट मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया, लेकिन खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के अनुभव और संतुलित खेल के सामने टिक नहीं सकी। कप्तान नैट सिवर-ब्रंट की कप्तानी और बल्लेबाजी की सराहना जरूर हुई, लेकिन टीम को ट्रॉफी जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका।
महिला टी-20 विश्व कप में यह जीत ऑस्ट्रेलिया के सुनहरे इतिहास में एक और उपलब्धि जोड़ती है। सातवीं बार चैंपियन बनने के साथ उसने यह भी साबित कर दिया कि विश्व क्रिकेट में महिला टीमों के बीच उसकी बादशाहत अब भी कायम है। लॉर्ड्स में मिली इस जीत ने ऑस्ट्रेलिया की नई पीढ़ी और अनुभवी खिलाड़ियों के बेहतरीन संयोजन को भी मजबूती से सामने रखा।
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महिला टी-20 विश्व कप पर फिर ऑस्ट्रेलिया का कब्जा, इंग्लैंड को हराकर सातवीं बार बनी चैंपियन
स्पोर्ट्स डेस्क
महिला टी-20 विश्व कप 2026 का खिताब एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के नाम रहा। क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदानों में शामिल लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इंग्लैंड को सात विकेट से हराकर इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया। यह ऑस्ट्रेलिया का सातवां महिला टी-20 विश्व कप खिताब है, जो इस टूर्नामेंट में उसके लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को और मजबूत करता है। लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी और 17 गेंद शेष रहते जीत दर्ज कर ली।
फाइनल मुकाबले में 151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शुरुआती झटके के बावजूद घबराहट नहीं दिखाई। टीम की अनुभवी बल्लेबाज बेथ मूनी ने एक बार फिर बड़े मुकाबले में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने आक्रामक और संयमित बल्लेबाजी का बेहतरीन मिश्रण दिखाते हुए 49 गेंदों में 64 रन बनाए। उनकी पारी में 10 आकर्षक चौके शामिल रहे। दूसरी ओर युवा बल्लेबाज फीबी लिचफील्ड ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 35 गेंदों में 48 रन जोड़े। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 100 रन की साझेदारी कर इंग्लैंड की वापसी की सभी उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया।
जब जीत कुछ ही रन दूर थी, तब एलिस पेरी और एश्ले गार्डनर ने बिना किसी दबाव के पारी को आगे बढ़ाया। पेरी 13 रन बनाकर नाबाद लौटीं, जबकि गार्डनर ने भी अंत तक क्रीज पर रहकर टीम को जीत दिलाई। ऑस्ट्रेलिया ने केवल तीन विकेट गंवाकर लक्ष्य हासिल किया और एक बार फिर दिखाया कि बड़े मुकाबलों में उसका अनुभव और संतुलन उसे बाकी टीमों से अलग बनाता है।
इंग्लैंड की ओर से गेंदबाजी में लॉरेन बेल, चार्ली डीन और सोफी एक्लस्टन ने एक-एक विकेट जरूर हासिल किया, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को लंबे समय तक रोक पाने में वे सफल नहीं रहे। इंग्लैंड के गेंदबाज शुरुआती सफलता के बाद लगातार दबाव बनाने में नाकाम रहे, जिसका फायदा ऑस्ट्रेलिया ने पूरी तरह उठाया।
इससे पहले इंग्लैंड ने टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी की। शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए। हालांकि कप्तान नैट सिवर-ब्रंट ने जिम्मेदारी संभालते हुए पारी को स्थिर किया। उन्होंने 58 रन की नाबाद पारी खेली और फ्रेया कैम्प के साथ मिलकर इंग्लैंड को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। फ्रेया कैम्प ने भी 44 रन बनाकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों खिलाड़ियों ने पांचवें विकेट के लिए 80 रन की अहम साझेदारी की, जिसकी बदौलत इंग्लैंड 20 ओवर में चार विकेट खोकर 150 रन तक पहुंचने में सफल रहा।
इंग्लैंड की बल्लेबाजी में शीर्ष क्रम पूरी तरह प्रभाव छोड़ने में असफल रहा। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के कारण टीम पर दबाव बना रहा। ऐसे समय में कप्तान सिवर-ब्रंट ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की और आखिरी ओवरों में तेजी से रन जुटाए। फ्रेया कैम्प ने भी उनका अच्छा साथ दिया, लेकिन दोनों बल्लेबाजों की मेहनत आखिरकार टीम को जीत नहीं दिला सकी।
ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी पूरे मैच में अनुशासित रही। कप्तान सोफी मोलिन्यू ने गेंदबाजों का प्रभावी उपयोग किया और इंग्लैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। लूसी हैमिल्टन, एनाबेल सदरलैंड, सोफी मोलिन्यू और किम गार्थ ने एक-एक विकेट हासिल किया। खास बात यह रही कि ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में रन गति को नियंत्रित रखा, जिसका असर इंग्लैंड के अंतिम स्कोर पर साफ दिखाई दिया।
पूरे टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया ने लगातार संतुलित प्रदर्शन किया। बल्लेबाजी में अनुभव और युवाओं का शानदार तालमेल देखने को मिला, जबकि गेंदबाजी इकाई ने हर मैच में विपक्षी टीमों पर दबाव बनाए रखा। फाइनल में भी टीम ने उसी आत्मविश्वास के साथ खेल दिखाया, जिसके दम पर वह वर्षों से महिला क्रिकेट की सबसे सफल टीम बनी हुई है।
दूसरी ओर इंग्लैंड ने भी पूरे टूर्नामेंट में शानदार क्रिकेट खेलकर फाइनल तक का सफर तय किया था। टीम ने लीग चरण और नॉकआउट मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया, लेकिन खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के अनुभव और संतुलित खेल के सामने टिक नहीं सकी। कप्तान नैट सिवर-ब्रंट की कप्तानी और बल्लेबाजी की सराहना जरूर हुई, लेकिन टीम को ट्रॉफी जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका।
महिला टी-20 विश्व कप में यह जीत ऑस्ट्रेलिया के सुनहरे इतिहास में एक और उपलब्धि जोड़ती है। सातवीं बार चैंपियन बनने के साथ उसने यह भी साबित कर दिया कि विश्व क्रिकेट में महिला टीमों के बीच उसकी बादशाहत अब भी कायम है। लॉर्ड्स में मिली इस जीत ने ऑस्ट्रेलिया की नई पीढ़ी और अनुभवी खिलाड़ियों के बेहतरीन संयोजन को भी मजबूती से सामने रखा।
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