इंडोनेशिया दौरे पर पीएम मोदी, रक्षा सहयोग से सांस्कृतिक रिश्तों तक कई अहम मुद्दों पर होगी बातचीत

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जकार्ता पहुंचने पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने किया स्वागत, द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और निवेश पर चर्चा के साथ प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक विरासत भी रहेगी फोकस में

भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को आधिकारिक दौरे पर जकार्ता पहुंचे। एयरपोर्ट पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका स्वागत किया। यह प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी की इंडोनेशिया की तीसरी यात्रा है और इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत प्रस्तावित है, जिसमें रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों पर चर्चा होगी।

सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना है। माना जा रहा है कि दोनों देश रक्षा उपकरणों की खरीद, सैन्य सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान से जुड़े विषयों पर आगे बढ़ सकते हैं। इसके अलावा समुद्री निगरानी, संयुक्त अभ्यास और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहेगा। दोनों देश लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित और स्वतंत्र समुद्री मार्गों की वकालत करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में इंडोनेशिया की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का दौरा भी शामिल है। वह जावा द्वीप पर स्थित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर जाएंगे, जिसे दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसरों में गिना जाता है। नौवीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर का वास्तुशिल्प आज भी दुनिया भर के इतिहासकारों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और भारतीय संस्कृति के ऐतिहासिक प्रभाव का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

इंडोनेशिया आज दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन इसकी सांस्कृतिक पहचान में भारतीय सभ्यता की गहरी छाप आज भी दिखाई देती है। इतिहासकारों के अनुसार पहली शताब्दी से लेकर मध्यकाल तक भारतीय व्यापारी समुद्री मार्गों के जरिए इस क्षेत्र तक पहुंचे। व्यापार के साथ-साथ संस्कृत भाषा, हिंदू और बौद्ध दर्शन, साहित्य, कला और स्थापत्य की परंपराएं भी यहां पहुंचीं। समय के साथ स्थानीय शासकों ने इन सांस्कृतिक प्रभावों को अपनाया, जिनके प्रमाण आज भी मंदिरों, स्मारकों और सांस्कृतिक आयोजनों में देखे जा सकते हैं।

इंडोनेशिया के बाली, जावा और योग्याकार्ता जैसे क्षेत्रों में आज भी रामायण और महाभारत से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर पारंपरिक नृत्य-नाटिकाओं के माध्यम से रामायण का मंचन किया जाता है। बाली द्वीप में हिंदू संस्कृति आज भी सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां धार्मिक उत्सव, मंदिरों की परंपरा और सांस्कृतिक आयोजन भारतीय विरासत से गहरे जुड़े हुए हैं।

इंडोनेशिया की मुद्रा से जुड़ा एक तथ्य भी अक्सर चर्चा में रहता है। वर्ष 1998 में जारी 20 हजार रुपिया के एक विशेष नोट पर भगवान गणेश का चित्र प्रकाशित किया गया था। इसे धार्मिक प्रतीक के बजाय ज्ञान, शिक्षा और बुद्धिमत्ता के प्रतीक के रूप में शामिल किया गया था। हालांकि बाद के वर्षों में मुद्रा श्रृंखला में बदलाव किए गए, लेकिन यह उदाहरण आज भी दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा में प्रमुखता से सामने आता है।

दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं। भारत और इंडोनेशिया ऊर्जा, कोयला, पाम ऑयल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं। हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है और दोनों सरकारें निवेश बढ़ाने के लिए नए अवसर तलाश रही हैं।

इस यात्रा में साबंग पोर्ट का भी विशेष महत्व माना जा रहा है। यह बंदरगाह अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के करीब स्थित है और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। वर्ष 2018 में भारत और इंडोनेशिया ने इस बंदरगाह के विकास, लॉजिस्टिक सहयोग और समुद्री संपर्क बढ़ाने को लेकर सहमति बनाई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर सहयोग लगातार बढ़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और इंडोनेशिया की साझेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्र नौवहन, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में लगातार साथ काम कर रहे हैं। इसी कारण प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पूरे क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दौरे के दौरान व्यापार, रक्षा, डिजिटल तकनीक, शिक्षा, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और समुद्री सहयोग से जुड़े कई विषयों पर दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच विस्तृत चर्चा होगी। इसके अलावा इंडोनेशिया में मौजूद भारतीय समुदाय से जुड़े कार्यक्रम भी प्रधानमंत्री के दौरे का हिस्सा हो सकते हैं। भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों को आधुनिक रणनीतिक साझेदारी के साथ जोड़ने की दिशा में इस यात्रा को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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06 Jul 2026 By Priyanka

इंडोनेशिया दौरे पर पीएम मोदी, रक्षा सहयोग से सांस्कृतिक रिश्तों तक कई अहम मुद्दों पर होगी बातचीत

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भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को आधिकारिक दौरे पर जकार्ता पहुंचे। एयरपोर्ट पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका स्वागत किया। यह प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी की इंडोनेशिया की तीसरी यात्रा है और इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत प्रस्तावित है, जिसमें रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों पर चर्चा होगी।

सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना है। माना जा रहा है कि दोनों देश रक्षा उपकरणों की खरीद, सैन्य सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान से जुड़े विषयों पर आगे बढ़ सकते हैं। इसके अलावा समुद्री निगरानी, संयुक्त अभ्यास और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहेगा। दोनों देश लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित और स्वतंत्र समुद्री मार्गों की वकालत करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में इंडोनेशिया की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का दौरा भी शामिल है। वह जावा द्वीप पर स्थित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर जाएंगे, जिसे दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसरों में गिना जाता है। नौवीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर का वास्तुशिल्प आज भी दुनिया भर के इतिहासकारों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और भारतीय संस्कृति के ऐतिहासिक प्रभाव का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

इंडोनेशिया आज दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन इसकी सांस्कृतिक पहचान में भारतीय सभ्यता की गहरी छाप आज भी दिखाई देती है। इतिहासकारों के अनुसार पहली शताब्दी से लेकर मध्यकाल तक भारतीय व्यापारी समुद्री मार्गों के जरिए इस क्षेत्र तक पहुंचे। व्यापार के साथ-साथ संस्कृत भाषा, हिंदू और बौद्ध दर्शन, साहित्य, कला और स्थापत्य की परंपराएं भी यहां पहुंचीं। समय के साथ स्थानीय शासकों ने इन सांस्कृतिक प्रभावों को अपनाया, जिनके प्रमाण आज भी मंदिरों, स्मारकों और सांस्कृतिक आयोजनों में देखे जा सकते हैं।

इंडोनेशिया के बाली, जावा और योग्याकार्ता जैसे क्षेत्रों में आज भी रामायण और महाभारत से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर पारंपरिक नृत्य-नाटिकाओं के माध्यम से रामायण का मंचन किया जाता है। बाली द्वीप में हिंदू संस्कृति आज भी सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां धार्मिक उत्सव, मंदिरों की परंपरा और सांस्कृतिक आयोजन भारतीय विरासत से गहरे जुड़े हुए हैं।

इंडोनेशिया की मुद्रा से जुड़ा एक तथ्य भी अक्सर चर्चा में रहता है। वर्ष 1998 में जारी 20 हजार रुपिया के एक विशेष नोट पर भगवान गणेश का चित्र प्रकाशित किया गया था। इसे धार्मिक प्रतीक के बजाय ज्ञान, शिक्षा और बुद्धिमत्ता के प्रतीक के रूप में शामिल किया गया था। हालांकि बाद के वर्षों में मुद्रा श्रृंखला में बदलाव किए गए, लेकिन यह उदाहरण आज भी दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा में प्रमुखता से सामने आता है।

दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं। भारत और इंडोनेशिया ऊर्जा, कोयला, पाम ऑयल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं। हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है और दोनों सरकारें निवेश बढ़ाने के लिए नए अवसर तलाश रही हैं।

इस यात्रा में साबंग पोर्ट का भी विशेष महत्व माना जा रहा है। यह बंदरगाह अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के करीब स्थित है और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। वर्ष 2018 में भारत और इंडोनेशिया ने इस बंदरगाह के विकास, लॉजिस्टिक सहयोग और समुद्री संपर्क बढ़ाने को लेकर सहमति बनाई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर सहयोग लगातार बढ़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और इंडोनेशिया की साझेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्र नौवहन, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में लगातार साथ काम कर रहे हैं। इसी कारण प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पूरे क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दौरे के दौरान व्यापार, रक्षा, डिजिटल तकनीक, शिक्षा, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और समुद्री सहयोग से जुड़े कई विषयों पर दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच विस्तृत चर्चा होगी। इसके अलावा इंडोनेशिया में मौजूद भारतीय समुदाय से जुड़े कार्यक्रम भी प्रधानमंत्री के दौरे का हिस्सा हो सकते हैं। भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों को आधुनिक रणनीतिक साझेदारी के साथ जोड़ने की दिशा में इस यात्रा को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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