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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर भाजपा का राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम, पीएम मोदी ने याद किया योगदान
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और राष्ट्रीय एकता के लिए उनके योगदान को किया नमन, गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता में प्रतिमा शिलान्यास और पैतृक आवास जाकर देंगे श्रद्धांजलि
भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस अवसर को विशेष रूप से मनाने की तैयारी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी उनके विचार देश के विकास और अखंडता के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर प्रकाशित अपने लेख में डॉ. मुखर्जी के सार्वजनिक जीवन, शिक्षा, उद्योग और राष्ट्र निर्माण में योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि डॉ. मुखर्जी ने हर निर्णय में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और ऐसे भारत की कल्पना की जो मजबूत, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हो। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने का फैसला राष्ट्रीय एकीकरण की उसी सोच का हिस्सा था, जिसके लिए डॉ. मुखर्जी ने लंबे समय तक संघर्ष किया था।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि दूरदर्शी शिक्षाविद् और कुशल प्रशासक भी थे। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को केवल रोजगार तक सीमित रखने के बजाय नेतृत्व निर्माण का माध्यम माना। सबसे कम उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधारों की शुरुआत की थी। उनके कार्यकाल में भारतीय परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर विशेष बल दिया गया।
भाजपा की ओर से 125वीं जयंती को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता विभिन्न राज्यों में विचार गोष्ठियां, प्रदर्शनी, पुष्पांजलि कार्यक्रम और जनसंवाद आयोजित कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके राजनीतिक संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के दौरे पर रहेंगे। उनके कार्यक्रम में कोलकाता स्थित ईको पार्क में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रस्तावित विशाल प्रतिमा के भूमि पूजन और शिलान्यास समारोह में शामिल होना तय है। इसके बाद वह भवानीपुर स्थित डॉ. मुखर्जी के पैतृक निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। भाजपा नेताओं के अनुसार इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी शामिल होंगे।
कोलकाता में जयंती समारोह से पहले प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर के कई स्थानों पर डॉ. मुखर्जी की प्रतिमाओं की साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम किया गया। आयोजन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। पश्चिम बंगाल भाजपा ने इस अवसर पर विभिन्न जिलों में अलग-अलग कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई। बाद में वे स्वतंत्र भारत की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री भी बने। इस दौरान औद्योगिक विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने से जुड़ी कई योजनाओं की शुरुआत में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इतिहासकारों के अनुसार देश के विभाजन के समय बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों में भी डॉ. मुखर्जी ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके बाद जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने खुलकर अपनी राय रखी और विशेष प्रावधानों का विरोध किया। वर्ष 1953 में जम्मू-कश्मीर आंदोलन के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया था, जहां उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु आज भी राजनीतिक और ऐतिहासिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण विषय बनी रहती है।
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में यह भी कहा कि डॉ. मुखर्जी भारतीय उद्योगों, कुटीर उद्यमों और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के पक्षधर थे। उन्होंने हथकरघा, छोटे उद्योग और स्थानीय उत्पादन को मजबूत करने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया। उनका मानना था कि आर्थिक आत्मनिर्भरता देश की राजनीतिक और सामाजिक मजबूती के लिए भी आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा पिछले कुछ वर्षों से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और योगदान को राष्ट्रीय विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। पार्टी उन्हें राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकीकरण की विचारधारा के प्रमुख स्तंभों में शामिल करती है। इसी कारण उनकी जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रखकर वैचारिक संवाद और जनसंपर्क अभियान के रूप में भी देखा जा रहा है।
देश के विभिन्न राज्यों में भाजपा इकाइयों ने सोमवार को रक्तदान शिविर, पौधारोपण, विचार गोष्ठी, प्रदर्शनी और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि इन आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके संघर्ष और राष्ट्र निर्माण की सोच से परिचित कराना है। इसी क्रम में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और संगठनात्मक मंचों पर भी उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर भाजपा का राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम, पीएम मोदी ने याद किया योगदान
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भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस अवसर को विशेष रूप से मनाने की तैयारी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी उनके विचार देश के विकास और अखंडता के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर प्रकाशित अपने लेख में डॉ. मुखर्जी के सार्वजनिक जीवन, शिक्षा, उद्योग और राष्ट्र निर्माण में योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि डॉ. मुखर्जी ने हर निर्णय में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और ऐसे भारत की कल्पना की जो मजबूत, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हो। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने का फैसला राष्ट्रीय एकीकरण की उसी सोच का हिस्सा था, जिसके लिए डॉ. मुखर्जी ने लंबे समय तक संघर्ष किया था।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि दूरदर्शी शिक्षाविद् और कुशल प्रशासक भी थे। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को केवल रोजगार तक सीमित रखने के बजाय नेतृत्व निर्माण का माध्यम माना। सबसे कम उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधारों की शुरुआत की थी। उनके कार्यकाल में भारतीय परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर विशेष बल दिया गया।
भाजपा की ओर से 125वीं जयंती को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता विभिन्न राज्यों में विचार गोष्ठियां, प्रदर्शनी, पुष्पांजलि कार्यक्रम और जनसंवाद आयोजित कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके राजनीतिक संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के दौरे पर रहेंगे। उनके कार्यक्रम में कोलकाता स्थित ईको पार्क में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रस्तावित विशाल प्रतिमा के भूमि पूजन और शिलान्यास समारोह में शामिल होना तय है। इसके बाद वह भवानीपुर स्थित डॉ. मुखर्जी के पैतृक निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। भाजपा नेताओं के अनुसार इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी शामिल होंगे।
कोलकाता में जयंती समारोह से पहले प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर के कई स्थानों पर डॉ. मुखर्जी की प्रतिमाओं की साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम किया गया। आयोजन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। पश्चिम बंगाल भाजपा ने इस अवसर पर विभिन्न जिलों में अलग-अलग कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई। बाद में वे स्वतंत्र भारत की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री भी बने। इस दौरान औद्योगिक विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने से जुड़ी कई योजनाओं की शुरुआत में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इतिहासकारों के अनुसार देश के विभाजन के समय बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों में भी डॉ. मुखर्जी ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके बाद जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने खुलकर अपनी राय रखी और विशेष प्रावधानों का विरोध किया। वर्ष 1953 में जम्मू-कश्मीर आंदोलन के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया था, जहां उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु आज भी राजनीतिक और ऐतिहासिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण विषय बनी रहती है।
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में यह भी कहा कि डॉ. मुखर्जी भारतीय उद्योगों, कुटीर उद्यमों और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के पक्षधर थे। उन्होंने हथकरघा, छोटे उद्योग और स्थानीय उत्पादन को मजबूत करने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया। उनका मानना था कि आर्थिक आत्मनिर्भरता देश की राजनीतिक और सामाजिक मजबूती के लिए भी आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा पिछले कुछ वर्षों से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और योगदान को राष्ट्रीय विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। पार्टी उन्हें राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकीकरण की विचारधारा के प्रमुख स्तंभों में शामिल करती है। इसी कारण उनकी जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रखकर वैचारिक संवाद और जनसंपर्क अभियान के रूप में भी देखा जा रहा है।
देश के विभिन्न राज्यों में भाजपा इकाइयों ने सोमवार को रक्तदान शिविर, पौधारोपण, विचार गोष्ठी, प्रदर्शनी और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि इन आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके संघर्ष और राष्ट्र निर्माण की सोच से परिचित कराना है। इसी क्रम में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और संगठनात्मक मंचों पर भी उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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