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मऊगंज में अवैध एमडी ड्रग्स फैक्ट्री पर पुलिस का बड़ा एक्शन, अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज
रीवा,(म.प्र.)
शाहपुर थाना क्षेत्र में छापेमारी के दौरान चार आरोपी गिरफ्तार, ड्रग्स बनाने का सामान, केमिकल, मशीनें और वाहन जब्त; रीवा से महाराष्ट्र तक सप्लाई के सुराग मिलने का दावा
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित तौर पर संचालित की जा रही एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स निर्माण इकाई का खुलासा किया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिझौली गांव में की गई छापेमारी के दौरान पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मौके से भारी मात्रा में संदिग्ध मादक पदार्थ, ड्रग्स तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थ, एसिड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मशीनें, डिजिटल कांटे और परिवहन में उपयोग किया जाने वाला एक चार पहिया वाहन जब्त किया गया है। पुलिस इस मामले को हाल के समय में रीवा संभाग की बड़ी कार्रवाई में शामिल मान रही है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई एक गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। बताया जा रहा है कि रीवा रेंज में चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियान और ऑपरेशन प्रहार के दौरान पुलिस को लगातार अवैध गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं मिल रही थीं। इसी क्रम में शाहपुर क्षेत्र के बिझौली गांव में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। सूचना की पुष्टि होने के बाद पुलिस अधीक्षक एस.के. जैन, एसडीओपी सची पाठक और स्थानीय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने जिस स्थान पर दबिश दी, वहां कथित तौर पर एमडी ड्रग्स तैयार करने की प्रक्रिया चल रही थी। मौके से ऐसे कई रसायन और उपकरण मिले हैं जिनका उपयोग सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में किया जाता है। पुलिस ने सभी सामग्री को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षण के बाद बरामद पदार्थों की प्रकृति और मात्रा की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को यह जानकारी मिली है कि तैयार ड्रग्स को केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों तक भी पहुंचाया जाता था। शुरुआती पूछताछ में रीवा से महाराष्ट्र के मुंबई तक सप्लाई चेन के संकेत मिले हैं। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है और पूरे नेटवर्क की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही करने की बात कही है।
जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि अवैध फैक्ट्री कितने समय से संचालित हो रही थी, इसके लिए कच्चा माल कहां से मंगाया जाता था और तैयार ड्रग्स किन-किन माध्यमों से बाहर भेजी जाती थी। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा इसके तार किन राज्यों से जुड़े हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर कई अन्य स्थानों पर भी जांच की जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस को संदेह है कि पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। ड्रग्स निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और सप्लाई के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय हो सकती है। इसी कारण जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रखी गई है। पुलिस वित्तीय लेनदेन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और बैंक खातों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे गिरोह की संरचना सामने लाई जा सके।
मामले में यह भी जांच की जा रही है कि फैक्ट्री के संचालन के लिए इस्तेमाल की जा रही जगह किसकी है और क्या स्थानीय स्तर पर किसी अन्य व्यक्ति की इसमें भूमिका रही है। आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इलाके में लंबे समय से कोई संदिग्ध गतिविधि चल रही थी या नहीं। पुलिस ने मौके से मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनकी डिजिटल जांच कराई जाएगी।
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध कारोबार पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल के महीनों में नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाए गए हैं, जिनके तहत अलग-अलग जिलों में तस्करों और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मऊगंज की यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में अन्य राज्यों से जुड़े लिंक सामने आते हैं तो संबंधित एजेंसियों से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा।
पुलिस ने इस मामले में स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। बरामद सामग्री की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले में अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। जांच अधिकारी अब जब्त किए गए केमिकल, तैयार पदार्थ, मशीनों और अन्य उपकरणों की तकनीकी जांच के साथ-साथ पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं। पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर अन्य संभावित ठिकानों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
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मऊगंज में अवैध एमडी ड्रग्स फैक्ट्री पर पुलिस का बड़ा एक्शन, अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज
रीवा,(म.प्र.)
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित तौर पर संचालित की जा रही एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स निर्माण इकाई का खुलासा किया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिझौली गांव में की गई छापेमारी के दौरान पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मौके से भारी मात्रा में संदिग्ध मादक पदार्थ, ड्रग्स तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थ, एसिड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मशीनें, डिजिटल कांटे और परिवहन में उपयोग किया जाने वाला एक चार पहिया वाहन जब्त किया गया है। पुलिस इस मामले को हाल के समय में रीवा संभाग की बड़ी कार्रवाई में शामिल मान रही है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई एक गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। बताया जा रहा है कि रीवा रेंज में चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियान और ऑपरेशन प्रहार के दौरान पुलिस को लगातार अवैध गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं मिल रही थीं। इसी क्रम में शाहपुर क्षेत्र के बिझौली गांव में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। सूचना की पुष्टि होने के बाद पुलिस अधीक्षक एस.के. जैन, एसडीओपी सची पाठक और स्थानीय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने जिस स्थान पर दबिश दी, वहां कथित तौर पर एमडी ड्रग्स तैयार करने की प्रक्रिया चल रही थी। मौके से ऐसे कई रसायन और उपकरण मिले हैं जिनका उपयोग सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में किया जाता है। पुलिस ने सभी सामग्री को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षण के बाद बरामद पदार्थों की प्रकृति और मात्रा की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को यह जानकारी मिली है कि तैयार ड्रग्स को केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों तक भी पहुंचाया जाता था। शुरुआती पूछताछ में रीवा से महाराष्ट्र के मुंबई तक सप्लाई चेन के संकेत मिले हैं। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है और पूरे नेटवर्क की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही करने की बात कही है।
जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि अवैध फैक्ट्री कितने समय से संचालित हो रही थी, इसके लिए कच्चा माल कहां से मंगाया जाता था और तैयार ड्रग्स किन-किन माध्यमों से बाहर भेजी जाती थी। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा इसके तार किन राज्यों से जुड़े हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर कई अन्य स्थानों पर भी जांच की जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस को संदेह है कि पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। ड्रग्स निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और सप्लाई के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय हो सकती है। इसी कारण जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रखी गई है। पुलिस वित्तीय लेनदेन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और बैंक खातों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे गिरोह की संरचना सामने लाई जा सके।
मामले में यह भी जांच की जा रही है कि फैक्ट्री के संचालन के लिए इस्तेमाल की जा रही जगह किसकी है और क्या स्थानीय स्तर पर किसी अन्य व्यक्ति की इसमें भूमिका रही है। आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इलाके में लंबे समय से कोई संदिग्ध गतिविधि चल रही थी या नहीं। पुलिस ने मौके से मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनकी डिजिटल जांच कराई जाएगी।
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध कारोबार पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल के महीनों में नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाए गए हैं, जिनके तहत अलग-अलग जिलों में तस्करों और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मऊगंज की यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में अन्य राज्यों से जुड़े लिंक सामने आते हैं तो संबंधित एजेंसियों से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा।
पुलिस ने इस मामले में स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। बरामद सामग्री की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले में अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। जांच अधिकारी अब जब्त किए गए केमिकल, तैयार पदार्थ, मशीनों और अन्य उपकरणों की तकनीकी जांच के साथ-साथ पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं। पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर अन्य संभावित ठिकानों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
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