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'वंदे मातरम' पर टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरे केरल विश्वविद्यालय के कुलपति मोहनन कुन्नुम्मल; आरएसएस के कार्यक्रम में दिया था बयान
Digital desk
केरल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति डॉ. मोहनन कुन्नुम्मल ने तिरुवनंतपुरम में आरएसएस के एक युवा कार्यक्रम के दौरान 'वंदे मातरम' का विरोध करने वालों पर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का विरोध करने वाले लोग अपनी मां को नहीं जानते। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
केरल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति (VC) डॉ. मोहनन कुन्नुम्मल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' को लेकर दिए गए अपने बयान के बाद राजनीतिक विवादों से घिर गए हैं। तिरुवनंतपुरम के मनविला में आयोजित 'संकल्प 2026 युवा संगम' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति ने कथित तौर पर कहा कि जो लोग राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' गाने का विरोध करते हैं, "वे नहीं जानते कि उनकी मां कौन है"।
कुलपति ने भाषण में क्या कहा?
कार्यक्रम में भारत माता और विकसित भारत के निर्माण में परिवारों की भूमिका पर बोलते हुए कुन्नुम्मल ने भारत को एक मां के रूप में देखने की परंपरा पर जोर दिया। उन्होंने कहा:
"भारत के संदर्भ में देश को मां (भारत माता) माना गया है। इसीलिए जब हम प्रार्थना करते हैं तो 'वंदे मातरम' कहते हैं। जो लोग अपनी मां के महत्व को समझते हैं, वे हमेशा वंदे मातरम गाएंगे। लेकिन जो लोग वंदे मातरम का विरोध करते हैं, वे ऐसे लोग हैं जो यह नहीं जानते कि उनकी मां कौन है"।
आरएसएस कार्यक्रम और राजनीतिक बहस
कुलपति के इस बयान के बाद केरल में शिक्षा क्षेत्र के राजनीतिकरण और आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी को लेकर बहस छिड़ गई है।
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छात्र संगठनों का विरोध: वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और कांग्रेस समर्थित केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है। छात्र संगठनों ने उन पर विश्वविद्यालय में संघ के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है।
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पक्ष-विपक्ष के आरोप: राज्य के सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF) और विपक्षी यूडीएफ (UDF) दोनों ने कुन्नुम्मल की नियुक्ति और आरएसएस कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति पर सवाल उठाए हैं तथा शिक्षा क्षेत्र के "भगवाकरण" का आरोप लगाया है।
राष्ट्रीय स्तर पर 'वंदे मातरम' को लेकर नए नियम
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के संबंध में कुछ नई दिशा-निर्देश और कानूनी सुरक्षा तंत्र लागू किए गए हैं:
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नया प्रोटोकॉल: गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, सरकारी या आधिकारिक कार्यक्रमों में जहां 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, वहां 'वंदे मातरम' पहले गाया जाएगा।
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संसदीय संरक्षण: हाल ही में पारित 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' के तहत 'वंदे मातरम' का जानबूझकर अनादर करने या बाधा डालने पर अधिकतम तीन साल की सजा या जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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ऐतिहासिक अवसर: इस वर्ष 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की संगीतमय प्रस्तुति दी गई।
केरल के स्कूलों में स्थिति
केरल के सामान्य शिक्षा विभाग ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए स्कूलों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान 'जन गण मन' गाने के निर्देश दिए थे, लेकिन 'वंदे मातरम' को अनिवार्य नहीं किया था।
यह नया घटनाक्रम दर्शाता है कि जहां एक तरफ राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर नए नियम और कानूनी सुरक्षा दी जा रही है, वहीं राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों की निष्पक्षता और ऐसे बयानों पर राजनीतिक खींचतान जारी है।
'वंदे मातरम' पर टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरे केरल विश्वविद्यालय के कुलपति मोहनन कुन्नुम्मल; आरएसएस के कार्यक्रम में दिया था बयान
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केरल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति (VC) डॉ. मोहनन कुन्नुम्मल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' को लेकर दिए गए अपने बयान के बाद राजनीतिक विवादों से घिर गए हैं। तिरुवनंतपुरम के मनविला में आयोजित 'संकल्प 2026 युवा संगम' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति ने कथित तौर पर कहा कि जो लोग राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' गाने का विरोध करते हैं, "वे नहीं जानते कि उनकी मां कौन है"।
कुलपति ने भाषण में क्या कहा?
कार्यक्रम में भारत माता और विकसित भारत के निर्माण में परिवारों की भूमिका पर बोलते हुए कुन्नुम्मल ने भारत को एक मां के रूप में देखने की परंपरा पर जोर दिया। उन्होंने कहा:
"भारत के संदर्भ में देश को मां (भारत माता) माना गया है। इसीलिए जब हम प्रार्थना करते हैं तो 'वंदे मातरम' कहते हैं। जो लोग अपनी मां के महत्व को समझते हैं, वे हमेशा वंदे मातरम गाएंगे। लेकिन जो लोग वंदे मातरम का विरोध करते हैं, वे ऐसे लोग हैं जो यह नहीं जानते कि उनकी मां कौन है"।
आरएसएस कार्यक्रम और राजनीतिक बहस
कुलपति के इस बयान के बाद केरल में शिक्षा क्षेत्र के राजनीतिकरण और आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी को लेकर बहस छिड़ गई है।
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छात्र संगठनों का विरोध: वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और कांग्रेस समर्थित केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है। छात्र संगठनों ने उन पर विश्वविद्यालय में संघ के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है।
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पक्ष-विपक्ष के आरोप: राज्य के सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF) और विपक्षी यूडीएफ (UDF) दोनों ने कुन्नुम्मल की नियुक्ति और आरएसएस कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति पर सवाल उठाए हैं तथा शिक्षा क्षेत्र के "भगवाकरण" का आरोप लगाया है।
राष्ट्रीय स्तर पर 'वंदे मातरम' को लेकर नए नियम
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के संबंध में कुछ नई दिशा-निर्देश और कानूनी सुरक्षा तंत्र लागू किए गए हैं:
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नया प्रोटोकॉल: गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, सरकारी या आधिकारिक कार्यक्रमों में जहां 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, वहां 'वंदे मातरम' पहले गाया जाएगा।
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संसदीय संरक्षण: हाल ही में पारित 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' के तहत 'वंदे मातरम' का जानबूझकर अनादर करने या बाधा डालने पर अधिकतम तीन साल की सजा या जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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ऐतिहासिक अवसर: इस वर्ष 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की संगीतमय प्रस्तुति दी गई।
केरल के स्कूलों में स्थिति
केरल के सामान्य शिक्षा विभाग ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए स्कूलों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान 'जन गण मन' गाने के निर्देश दिए थे, लेकिन 'वंदे मातरम' को अनिवार्य नहीं किया था।
यह नया घटनाक्रम दर्शाता है कि जहां एक तरफ राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर नए नियम और कानूनी सुरक्षा दी जा रही है, वहीं राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों की निष्पक्षता और ऐसे बयानों पर राजनीतिक खींचतान जारी है।
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