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संसद में फिर टकराव, स्पीकर की अपील के बावजूद हंगामे से दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित
Digital Desk
पेपर लीक विधेयक पर दोपहर में होगी अहम चर्चा, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेता बहस में लेंगे हिस्सा
संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को भी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से नहीं चल सकी। दोनों सदनों की बैठक शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। लगातार हो रहे शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने और चर्चा के माध्यम से मुद्दों का समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है और यहां बहस तथा संवाद के जरिए ही जनता से जुड़े विषयों पर निर्णय होने चाहिए। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि सदन लगातार बाधित रहेगा तो जनता तक सकारात्मक संदेश नहीं पहुंचेगा। हालांकि उनकी अपील के बावजूद हंगामा थमता नहीं दिखा और हालात को देखते हुए लोकसभा तथा राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी बात रखने की मांग करने लगे। विपक्ष का कहना था कि सरकार केवल अपने एजेंडे पर चर्चा चाहती है, जबकि विपक्ष जिन विषयों को उठाना चाहता है, उन पर पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और नियमों के तहत चर्चा में भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में हर दल को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, लेकिन इसके लिए सदन का व्यवस्थित ढंग से चलना जरूरी है। विपक्षी सदस्यों ने भी अपनी ओर से यह कहा कि यदि उनकी मांगों और मुद्दों को चर्चा के लिए स्वीकार किया जाए तो सदन सुचारु रूप से चल सकता है। कुछ समय तक दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी और विरोध का दौर चलता रहा, जिसके बाद कार्यवाही स्थगित करने का फैसला लिया गया।
दोपहर बाद लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है। यह विधेयक देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया है। आवश्यकता पड़ने पर बहस की अवधि बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है ताकि सभी दल अपनी बात विस्तार से रख सकें। माना जा रहा है कि हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में सामने आए परीक्षा पेपर लीक के मामलों को देखते हुए यह विधेयक संसद की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में शामिल रहेगा। सरकार की कोशिश है कि इस पर व्यापक चर्चा के बाद विधेयक को आगे बढ़ाया जाए।
संसदीय सूत्रों के अनुसार इस बहस में विपक्ष की ओर से कई वरिष्ठ नेता हिस्सा लेने वाले हैं। कांग्रेस की तरफ से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल और गौरव गोगोई चर्चा में अपनी बात रख सकते हैं। विपक्ष की रणनीति परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य और पेपर लीक की घटनाओं पर सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की बताई जा रही है। वहीं सत्ता पक्ष भी विधेयक के जरिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयासों को सामने रखने की तैयारी में है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच लंबी और तीखी बहस देखने को मिल सकती है, क्योंकि यह सीधे देश के करोड़ों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा विषय है।
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। सुबह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय दल की बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक के दौरान संसद में सरकार की रणनीति, विधायी कार्यों और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा किए जाने की जानकारी सामने आई। दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में विपक्षी दलों ने संसद के भीतर अपनाई जाने वाली संयुक्त रणनीति पर विचार-विमर्श किया। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष ने यह तय किया कि जिन मुद्दों को लेकर वह लगातार आवाज उठा रहा है, उन्हें सदन के भीतर भी मजबूती से रखा जाएगा।
संसद के मौजूदा सत्र में लगातार विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। कई बार कार्यवाही शुरू होते ही हंगामे के कारण सदन की कार्रवाई बाधित हुई है। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों की ओर से अपने-अपने राजनीतिक रुख को लेकर लगातार बैठकों का दौर भी जारी है। संसदीय कार्यों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और अन्य जरूरी सरकारी कामकाज समय पर पूरा करने के लिए सदन का सुचारु रूप से चलना आवश्यक है। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के साथ-साथ विपक्ष की आवाज भी समान रूप से सुनी जानी चाहिए। मंगलवार को भी संसद परिसर के भीतर राजनीतिक हलचल पूरे दिन बनी रही और दोपहर बाद होने वाली पेपर लीक विधेयक पर चर्चा को लेकर सभी दलों की नजरें सदन की कार्यवाही पर टिकी रहीं।
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संसद में फिर टकराव, स्पीकर की अपील के बावजूद हंगामे से दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित
Digital Desk
संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को भी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से नहीं चल सकी। दोनों सदनों की बैठक शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। लगातार हो रहे शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने और चर्चा के माध्यम से मुद्दों का समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है और यहां बहस तथा संवाद के जरिए ही जनता से जुड़े विषयों पर निर्णय होने चाहिए। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि सदन लगातार बाधित रहेगा तो जनता तक सकारात्मक संदेश नहीं पहुंचेगा। हालांकि उनकी अपील के बावजूद हंगामा थमता नहीं दिखा और हालात को देखते हुए लोकसभा तथा राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी बात रखने की मांग करने लगे। विपक्ष का कहना था कि सरकार केवल अपने एजेंडे पर चर्चा चाहती है, जबकि विपक्ष जिन विषयों को उठाना चाहता है, उन पर पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और नियमों के तहत चर्चा में भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में हर दल को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, लेकिन इसके लिए सदन का व्यवस्थित ढंग से चलना जरूरी है। विपक्षी सदस्यों ने भी अपनी ओर से यह कहा कि यदि उनकी मांगों और मुद्दों को चर्चा के लिए स्वीकार किया जाए तो सदन सुचारु रूप से चल सकता है। कुछ समय तक दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी और विरोध का दौर चलता रहा, जिसके बाद कार्यवाही स्थगित करने का फैसला लिया गया।
दोपहर बाद लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है। यह विधेयक देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया है। आवश्यकता पड़ने पर बहस की अवधि बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है ताकि सभी दल अपनी बात विस्तार से रख सकें। माना जा रहा है कि हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में सामने आए परीक्षा पेपर लीक के मामलों को देखते हुए यह विधेयक संसद की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में शामिल रहेगा। सरकार की कोशिश है कि इस पर व्यापक चर्चा के बाद विधेयक को आगे बढ़ाया जाए।
संसदीय सूत्रों के अनुसार इस बहस में विपक्ष की ओर से कई वरिष्ठ नेता हिस्सा लेने वाले हैं। कांग्रेस की तरफ से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल और गौरव गोगोई चर्चा में अपनी बात रख सकते हैं। विपक्ष की रणनीति परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य और पेपर लीक की घटनाओं पर सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की बताई जा रही है। वहीं सत्ता पक्ष भी विधेयक के जरिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयासों को सामने रखने की तैयारी में है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच लंबी और तीखी बहस देखने को मिल सकती है, क्योंकि यह सीधे देश के करोड़ों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा विषय है।
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। सुबह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय दल की बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक के दौरान संसद में सरकार की रणनीति, विधायी कार्यों और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा किए जाने की जानकारी सामने आई। दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में विपक्षी दलों ने संसद के भीतर अपनाई जाने वाली संयुक्त रणनीति पर विचार-विमर्श किया। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष ने यह तय किया कि जिन मुद्दों को लेकर वह लगातार आवाज उठा रहा है, उन्हें सदन के भीतर भी मजबूती से रखा जाएगा।
संसद के मौजूदा सत्र में लगातार विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। कई बार कार्यवाही शुरू होते ही हंगामे के कारण सदन की कार्रवाई बाधित हुई है। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों की ओर से अपने-अपने राजनीतिक रुख को लेकर लगातार बैठकों का दौर भी जारी है। संसदीय कार्यों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और अन्य जरूरी सरकारी कामकाज समय पर पूरा करने के लिए सदन का सुचारु रूप से चलना आवश्यक है। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के साथ-साथ विपक्ष की आवाज भी समान रूप से सुनी जानी चाहिए। मंगलवार को भी संसद परिसर के भीतर राजनीतिक हलचल पूरे दिन बनी रही और दोपहर बाद होने वाली पेपर लीक विधेयक पर चर्चा को लेकर सभी दलों की नजरें सदन की कार्यवाही पर टिकी रहीं।
