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CAPF विधेयक 2026 पर पूर्व IG के.बी. सिंह का बयान: अफवाहों से दूर, यह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाला कदम
डिजिटल डेस्क
पूर्व ITBP IG और ओडिशा के पूर्व DGP के.बी. सिंह का कहना है कि विधेयक CAPF में भर्ती, पदोन्नति और नेतृत्व में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा और IPS कोटा को असंतुलित नहीं करेगा।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) जनरल एडमिनिस्ट्रेशन विधेयक 2026 को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व आईजी (आईटीबीपी) और ओडिशा के पूर्व डीजीपी के.बी. सिंह ने सामने आकर कई भ्रांतियों को खारिज किया है। 37 वर्षों के अपने अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक न केवल CAPF की संरचना को मजबूत करेगा, बल्कि भर्ती, पदोन्नति और नेतृत्व में पारदर्शिता भी लाएगा।
के.बी. सिंह ने कहा कि कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से बड़ी संख्या में पदोन्नतियां रुक जाती हैं, लेकिन यह पूरी तरह तथ्यहीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि CAPF में पदोन्नतियां रिक्तियों और स्वीकृत पदों के आधार पर होती हैं, न कि किसी एक अधिकारी की नियुक्ति से प्रभावित होती हैं। उनके अनुसार DIG स्तर पर IPS कोटा पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिससे CAPF कैडर अधिकारियों के लिए प्रमोशन के अवसर और बढ़ेंगे।
यह लेख के.बी. सिंह के शब्दों पर निर्धारित है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि IG स्तर पर 50% पद IPS अधिकारियों के लिए रखे गए हैं, जबकि ADG स्तर पर यह कोटा घटाकर 67% किया गया है। वहीं, SDG और DG स्तर पर IPS नेतृत्व बरकरार रहेगा। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रणाली का संतुलित विस्तार है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा कि अदालत ने “प्रगतिशील कमी” की बात कही थी, न कि पूरी तरह समाप्ति की। ऐसे में सरकार ने संतुलन बनाते हुए DIG स्तर पर कोटा खत्म किया है और अन्य स्तरों पर व्यावहारिक व्यवस्था रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद को कानून बनाने का अधिकार है और यह विधेयक उसी अधिकार के तहत लाया गया है।
मनोबल गिरने की आशंकाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि इस विधेयक से CAPF अधिकारियों के लिए नए अवसर खुलेंगे और पदोन्नति की गति तेज होगी। उनके मुताबिक, IPS अधिकारियों का विविध अनुभव—चाहे वह नक्सल ऑपरेशन हो, सीमा सुरक्षा या आपदा प्रबंधन—CAPF के लिए महत्वपूर्ण है।
अंत में के.बी. सिंह ने केंद्र सरकार से अपील की कि इस विधेयक को जल्द पारित किया जाए, ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा और अधिक मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि CAPF के जवानों को मजबूत और सक्षम नेतृत्व मिलना समय की मांग है।
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CAPF विधेयक 2026 पर पूर्व IG के.बी. सिंह का बयान: अफवाहों से दूर, यह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाला कदम
डिजिटल डेस्क
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) जनरल एडमिनिस्ट्रेशन विधेयक 2026 को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व आईजी (आईटीबीपी) और ओडिशा के पूर्व डीजीपी के.बी. सिंह ने सामने आकर कई भ्रांतियों को खारिज किया है। 37 वर्षों के अपने अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक न केवल CAPF की संरचना को मजबूत करेगा, बल्कि भर्ती, पदोन्नति और नेतृत्व में पारदर्शिता भी लाएगा।
के.बी. सिंह ने कहा कि कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से बड़ी संख्या में पदोन्नतियां रुक जाती हैं, लेकिन यह पूरी तरह तथ्यहीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि CAPF में पदोन्नतियां रिक्तियों और स्वीकृत पदों के आधार पर होती हैं, न कि किसी एक अधिकारी की नियुक्ति से प्रभावित होती हैं। उनके अनुसार DIG स्तर पर IPS कोटा पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिससे CAPF कैडर अधिकारियों के लिए प्रमोशन के अवसर और बढ़ेंगे।
यह लेख के.बी. सिंह के शब्दों पर निर्धारित है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि IG स्तर पर 50% पद IPS अधिकारियों के लिए रखे गए हैं, जबकि ADG स्तर पर यह कोटा घटाकर 67% किया गया है। वहीं, SDG और DG स्तर पर IPS नेतृत्व बरकरार रहेगा। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रणाली का संतुलित विस्तार है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा कि अदालत ने “प्रगतिशील कमी” की बात कही थी, न कि पूरी तरह समाप्ति की। ऐसे में सरकार ने संतुलन बनाते हुए DIG स्तर पर कोटा खत्म किया है और अन्य स्तरों पर व्यावहारिक व्यवस्था रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद को कानून बनाने का अधिकार है और यह विधेयक उसी अधिकार के तहत लाया गया है।
मनोबल गिरने की आशंकाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि इस विधेयक से CAPF अधिकारियों के लिए नए अवसर खुलेंगे और पदोन्नति की गति तेज होगी। उनके मुताबिक, IPS अधिकारियों का विविध अनुभव—चाहे वह नक्सल ऑपरेशन हो, सीमा सुरक्षा या आपदा प्रबंधन—CAPF के लिए महत्वपूर्ण है।
अंत में के.बी. सिंह ने केंद्र सरकार से अपील की कि इस विधेयक को जल्द पारित किया जाए, ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा और अधिक मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि CAPF के जवानों को मजबूत और सक्षम नेतृत्व मिलना समय की मांग है।
