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पानी से समृद्धि तक: महिलाओं की अगुवाई में आईटीसी का ‘वाटर एंड जेंडर’ मॉडल बना बदलाव की मिसाल
नई दिल्ली।
विश्व जल दिवस के अवसर पर आईटीसी लिमिटेड ने ‘वाटर एंड जेंडर’ थीम को जमीनी स्तर पर साकार करते हुए एक अनूठी पहल पेश की है। महिलाओं के नेतृत्व में संचालित ‘वाटर यूजर ग्रुप्स’ के माध्यम से कंपनी ने यह साबित किया है कि सामुदायिक भागीदारी से न सिर्फ जल संरक्षण संभव है, बल्कि सामाजिक समानता को भी नई दिशा दी जा सकती है।
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का मोलगा गांव, जो कभी सूखे और बंजर भूमि के लिए जाना जाता था, आज विकास और हरियाली की नई पहचान बन चुका है। छह एकड़ में फैला जलाशय अब पानी से लबालब है और सिंचाई की बेहतर व्यवस्था के चलते खेतों में सोयाबीन की फसल लहराती नजर आती है। यह परिवर्तन सामूहिक प्रयासों और विशेष रूप से महिलाओं की सक्रिय भूमिका का परिणाम है।
इस बदलाव की धुरी बने हैं आईटीसी के ‘वाटर यूजर ग्रुप्स’ (WUGs), जिन्होंने किसानों को जल स्रोतों के पुनर्जीवन, जलवायु-अनुकूल खेती और बेहतर जल प्रबंधन के लिए प्रेरित किया। आईटीसी ने स्थानीय समुदायों और साझेदारों के साथ मिलकर न केवल समाधान विकसित किए, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए व्यवहारिक बदलाव भी सुनिश्चित किए। वर्तमान में 17 राज्यों में 5,800 से अधिक WUGs सक्रिय हैं, जो करीब 18.9 लाख एकड़ भूमि को कवर करते हुए 5 लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं।
इन समूहों की सबसे बड़ी विशेषता है—महिलाओं की निर्णायक भागीदारी। जहां कभी ग्रामीण समाज लैंगिक असमानता से जूझता था, वहीं अब महिलाएं जल संसाधनों के प्रबंधन, रखरखाव और समान वितरण में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। यह पहल इस वर्ष की थीम ‘वेयर वाटर फ्लोज, इक्वेलिटी ग्रोज’ को सार्थक रूप देती है।
आईटीसी लिमिटेड के सोशल इन्वेस्टमेंट्स प्रमुख प्रभाकर लिंगारेड्डी के अनुसार, “महिलाओं की भागीदारी से जल प्रबंधन की प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी और समावेशी बनती हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलता है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण को भी नई ऊर्जा मिलती है।”
कृषि सखी कार्यक्रम के तहत हजारों महिलाओं को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे ‘मोर क्रॉप पर ड्रॉप’ की अवधारणा को बढ़ावा मिला है। इन प्रयासों से वर्ष 2025-26 में ही लगभग 170 करोड़ किलोलीटर पानी की बचत संभव हो पाई है।
आईटीसी का इंटीग्रेटेड वाटर स्टेवार्डशिप प्रोग्राम पिछले 23 वर्षों से कंपनी को ‘वाटर पॉजिटिव’ बनाए हुए है। इसका सामाजिक प्रभाव भी स्पष्ट है—अब गांवों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से महिलाओं को दूर-दूर तक पानी लाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे उन्हें छोटे व्यवसाय शुरू करने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने का अवसर मिला है, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।
विमला मालवी जैसी महिलाएं इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं। जो कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय करती थीं, आज वे अपने गांव के जल संसाधनों के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
आईटीसी की यह पहल यह संदेश देती है कि जब जल संरक्षण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो समाज में समृद्धि और समानता दोनों साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।
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पानी से समृद्धि तक: महिलाओं की अगुवाई में आईटीसी का ‘वाटर एंड जेंडर’ मॉडल बना बदलाव की मिसाल
नई दिल्ली।
विश्व जल दिवस के अवसर पर आईटीसी लिमिटेड ने ‘वाटर एंड जेंडर’ थीम को जमीनी स्तर पर साकार करते हुए एक अनूठी पहल पेश की है। महिलाओं के नेतृत्व में संचालित ‘वाटर यूजर ग्रुप्स’ के माध्यम से कंपनी ने यह साबित किया है कि सामुदायिक भागीदारी से न सिर्फ जल संरक्षण संभव है, बल्कि सामाजिक समानता को भी नई दिशा दी जा सकती है।
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का मोलगा गांव, जो कभी सूखे और बंजर भूमि के लिए जाना जाता था, आज विकास और हरियाली की नई पहचान बन चुका है। छह एकड़ में फैला जलाशय अब पानी से लबालब है और सिंचाई की बेहतर व्यवस्था के चलते खेतों में सोयाबीन की फसल लहराती नजर आती है। यह परिवर्तन सामूहिक प्रयासों और विशेष रूप से महिलाओं की सक्रिय भूमिका का परिणाम है।
इस बदलाव की धुरी बने हैं आईटीसी के ‘वाटर यूजर ग्रुप्स’ (WUGs), जिन्होंने किसानों को जल स्रोतों के पुनर्जीवन, जलवायु-अनुकूल खेती और बेहतर जल प्रबंधन के लिए प्रेरित किया। आईटीसी ने स्थानीय समुदायों और साझेदारों के साथ मिलकर न केवल समाधान विकसित किए, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए व्यवहारिक बदलाव भी सुनिश्चित किए। वर्तमान में 17 राज्यों में 5,800 से अधिक WUGs सक्रिय हैं, जो करीब 18.9 लाख एकड़ भूमि को कवर करते हुए 5 लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं।
इन समूहों की सबसे बड़ी विशेषता है—महिलाओं की निर्णायक भागीदारी। जहां कभी ग्रामीण समाज लैंगिक असमानता से जूझता था, वहीं अब महिलाएं जल संसाधनों के प्रबंधन, रखरखाव और समान वितरण में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। यह पहल इस वर्ष की थीम ‘वेयर वाटर फ्लोज, इक्वेलिटी ग्रोज’ को सार्थक रूप देती है।
आईटीसी लिमिटेड के सोशल इन्वेस्टमेंट्स प्रमुख प्रभाकर लिंगारेड्डी के अनुसार, “महिलाओं की भागीदारी से जल प्रबंधन की प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी और समावेशी बनती हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलता है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण को भी नई ऊर्जा मिलती है।”
कृषि सखी कार्यक्रम के तहत हजारों महिलाओं को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे ‘मोर क्रॉप पर ड्रॉप’ की अवधारणा को बढ़ावा मिला है। इन प्रयासों से वर्ष 2025-26 में ही लगभग 170 करोड़ किलोलीटर पानी की बचत संभव हो पाई है।
आईटीसी का इंटीग्रेटेड वाटर स्टेवार्डशिप प्रोग्राम पिछले 23 वर्षों से कंपनी को ‘वाटर पॉजिटिव’ बनाए हुए है। इसका सामाजिक प्रभाव भी स्पष्ट है—अब गांवों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से महिलाओं को दूर-दूर तक पानी लाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे उन्हें छोटे व्यवसाय शुरू करने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने का अवसर मिला है, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।
विमला मालवी जैसी महिलाएं इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं। जो कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय करती थीं, आज वे अपने गांव के जल संसाधनों के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
आईटीसी की यह पहल यह संदेश देती है कि जब जल संरक्षण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो समाज में समृद्धि और समानता दोनों साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।
