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तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दी श्रद्धांजलि
Digital Desk
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए तेहरान में हजारों लोग पहुंचे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भी ग्रैंड मोसल्ला परिसर में श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि युद्धविराम के बीच अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी की गईं।
ईरान की राजधानी तेहरान शुक्रवार को उस समय भावुक माहौल का गवाह बनी, जब देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर लाया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग परिसर के बाहर एकत्र होने लगे थे। देशभर से आए नागरिकों, धार्मिक नेताओं, राजनीतिक हस्तियों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने भी ग्रैंड मोसल्ला पहुंचकर दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न कराई जा रही है। हाल के क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने तेहरान के कई हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। ग्रैंड मोसल्ला परिसर में प्रवेश करने वाले सभी लोगों की सघन जांच की गई और पूरे कार्यक्रम की निगरानी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई।
भारत के प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम दर्शन के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए और कुछ क्षणों का मौन रखकर सम्मान प्रकट किया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के अधिकारियों से भी मुलाकात की और शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, समुद्री संपर्क, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी रही है। ऐसे में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार पहले आयोजित किया जाना था, लेकिन हालिया सैन्य संघर्ष के चलते कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। सुरक्षा कारणों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था। अब जब संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू हुआ है, तब प्रशासन ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि क्षेत्र में अभी भी तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ईरान की संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अंतिम संस्कार से एक दिन पहले देशवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और संकल्प प्रदर्शित करने का भी समय है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि देश की जनता की एकजुटता दुनिया तक स्पष्ट रूप से पहुंचनी चाहिए। उनके अनुसार, बड़ी जनभागीदारी ईरान की सामूहिक शक्ति और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक होगी।
सुबह से ही हजारों लोग ग्रैंड मोसल्ला परिसर पहुंचने लगे थे। लोगों के हाथों में ईरानी झंडे और धार्मिक प्रतीक दिखाई दिए। कई लोग अपने परिवारों के साथ अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में धार्मिक छात्र और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे। परिसर के भीतर धार्मिक अनुष्ठान किए गए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम विदाई की तैयारियां पूरी की गईं। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रम को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी कैमरों और विशेष सुरक्षा इकाइयों की मदद से पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी गई। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष प्रोटोकॉल लागू किए। कार्यक्रम स्थल के आसपास यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया ताकि भीड़ और सुरक्षा दोनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच हालिया संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है।
भारत और ईरान के बीच व्यापार, ऊर्जा, चाबहार बंदरगाह परियोजना और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण विषय सहयोग के प्रमुख आधार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते भू-राजनीतिक हालात के बावजूद दोनों देश आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि भारत पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को महत्व देता है और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता का समर्थक बना हुआ है।
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तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दी श्रद्धांजलि
Digital Desk
ईरान की राजधानी तेहरान शुक्रवार को उस समय भावुक माहौल का गवाह बनी, जब देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर लाया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग परिसर के बाहर एकत्र होने लगे थे। देशभर से आए नागरिकों, धार्मिक नेताओं, राजनीतिक हस्तियों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने भी ग्रैंड मोसल्ला पहुंचकर दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न कराई जा रही है। हाल के क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने तेहरान के कई हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। ग्रैंड मोसल्ला परिसर में प्रवेश करने वाले सभी लोगों की सघन जांच की गई और पूरे कार्यक्रम की निगरानी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई।
भारत के प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम दर्शन के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए और कुछ क्षणों का मौन रखकर सम्मान प्रकट किया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के अधिकारियों से भी मुलाकात की और शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, समुद्री संपर्क, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी रही है। ऐसे में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार पहले आयोजित किया जाना था, लेकिन हालिया सैन्य संघर्ष के चलते कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। सुरक्षा कारणों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था। अब जब संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू हुआ है, तब प्रशासन ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि क्षेत्र में अभी भी तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ईरान की संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अंतिम संस्कार से एक दिन पहले देशवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और संकल्प प्रदर्शित करने का भी समय है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि देश की जनता की एकजुटता दुनिया तक स्पष्ट रूप से पहुंचनी चाहिए। उनके अनुसार, बड़ी जनभागीदारी ईरान की सामूहिक शक्ति और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक होगी।
सुबह से ही हजारों लोग ग्रैंड मोसल्ला परिसर पहुंचने लगे थे। लोगों के हाथों में ईरानी झंडे और धार्मिक प्रतीक दिखाई दिए। कई लोग अपने परिवारों के साथ अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में धार्मिक छात्र और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे। परिसर के भीतर धार्मिक अनुष्ठान किए गए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम विदाई की तैयारियां पूरी की गईं। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रम को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी कैमरों और विशेष सुरक्षा इकाइयों की मदद से पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी गई। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष प्रोटोकॉल लागू किए। कार्यक्रम स्थल के आसपास यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया ताकि भीड़ और सुरक्षा दोनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच हालिया संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है।
भारत और ईरान के बीच व्यापार, ऊर्जा, चाबहार बंदरगाह परियोजना और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण विषय सहयोग के प्रमुख आधार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते भू-राजनीतिक हालात के बावजूद दोनों देश आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि भारत पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को महत्व देता है और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता का समर्थक बना हुआ है।
