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बीमा रिफंड के नाम पर 1.60 करोड़ की साइबर ठगी, दिल्ली से तीन आरोपी गिरफ्तार; नाइजीरियन नेटवर्क से जुड़े तार
Digital Desk
खुद को बीमा लोकपाल अधिकारी बताकर पीड़ित से कई किश्तों में रकम वसूली, बैंक खातों के जरिए संचालित हो रहा था अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क; दुर्ग पुलिस ने मोबाइल, पासबुक और चेकबुक समेत अहम साक्ष्य किए जब्त।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल एक नाइजीरियन साइबर नेटवर्क कर रहा था, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन किए गए।
दुर्ग रेंज साइबर थाना में दर्ज इस मामले की जांच कई दिनों से चल रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने खुद को बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि उसकी पुरानी बीमा पॉलिसी का रिफंड मंजूर हो गया है और राशि प्राप्त करने के लिए कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसी बहाने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम जमा कराई गई।
पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि जमा की गई राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कर दी जाएगी और बीमा क्लेम भी जारी हो जाएगा। लेकिन हर बार नई वजह बताकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती रही। इस तरह आरोपी लगातार पीड़ित को झांसे में रखते हुए उससे कुल करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी करने में सफल रहे।
जब लंबे समय तक न तो रिफंड मिला और न ही कोई भुगतान हुआ, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने दुर्ग रेंज साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल लेन-देन का विश्लेषण किया।
जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले एक बैंक खाताधारक की पहचान की, जिसके खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी। उससे पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर पुलिस की विशेष टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां से मनमीत सिंह, ईशांत माहे उर्फ ईशु और अमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने नाम से बैंक खाते खुलवाए थे और पैसों के लालच में इन्हें साइबर ठगों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर की जाती थी, ताकि वास्तविक मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का संचालन एक नाइजीरियन साइबर गिरोह द्वारा किया जा रहा था। यही गिरोह बैंक खातों का उपयोग कर देशभर में लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में कई साइबर अपराधों में शामिल हो सकता है।
दिल्ली से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 1 जुलाई को हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें तीस हजारी कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दुर्ग लाया गया, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा ठगी की रकम आखिर किन-किन खातों तक पहुंची।
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, छह बैंक पासबुक, चार चेकबुक और कई सिम कार्ड जब्त किए हैं। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि अलग-अलग राज्यों में इन आरोपियों के खिलाफ साइबर ठगी से जुड़े मामले दर्ज हैं।
एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर ने बताया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाते थे। पहले वे बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का भरोसा दिलाते, फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, दस्तावेज सत्यापन, बीमा क्लियरेंस और अन्य शुल्क के नाम पर किस्तों में रकम जमा कराते थे। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास होता, तब तक रकम कई बैंक खातों के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं। बीमा रिफंड, केवाईसी अपडेट, निवेश योजना, लॉटरी, इनाम और सरकारी योजना के नाम पर आने वाले कॉल, मैसेज या ईमेल पर बिना पुष्टि किए भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
दुर्ग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसे जमा न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना दे। समय पर शिकायत दर्ज होने से ठगी की गई रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।
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बीमा रिफंड के नाम पर 1.60 करोड़ की साइबर ठगी, दिल्ली से तीन आरोपी गिरफ्तार; नाइजीरियन नेटवर्क से जुड़े तार
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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल एक नाइजीरियन साइबर नेटवर्क कर रहा था, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन किए गए।
दुर्ग रेंज साइबर थाना में दर्ज इस मामले की जांच कई दिनों से चल रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने खुद को बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि उसकी पुरानी बीमा पॉलिसी का रिफंड मंजूर हो गया है और राशि प्राप्त करने के लिए कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसी बहाने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम जमा कराई गई।
पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि जमा की गई राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कर दी जाएगी और बीमा क्लेम भी जारी हो जाएगा। लेकिन हर बार नई वजह बताकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती रही। इस तरह आरोपी लगातार पीड़ित को झांसे में रखते हुए उससे कुल करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी करने में सफल रहे।
जब लंबे समय तक न तो रिफंड मिला और न ही कोई भुगतान हुआ, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने दुर्ग रेंज साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल लेन-देन का विश्लेषण किया।
जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले एक बैंक खाताधारक की पहचान की, जिसके खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी। उससे पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर पुलिस की विशेष टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां से मनमीत सिंह, ईशांत माहे उर्फ ईशु और अमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने नाम से बैंक खाते खुलवाए थे और पैसों के लालच में इन्हें साइबर ठगों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर की जाती थी, ताकि वास्तविक मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का संचालन एक नाइजीरियन साइबर गिरोह द्वारा किया जा रहा था। यही गिरोह बैंक खातों का उपयोग कर देशभर में लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में कई साइबर अपराधों में शामिल हो सकता है।
दिल्ली से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 1 जुलाई को हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें तीस हजारी कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दुर्ग लाया गया, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा ठगी की रकम आखिर किन-किन खातों तक पहुंची।
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, छह बैंक पासबुक, चार चेकबुक और कई सिम कार्ड जब्त किए हैं। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि अलग-अलग राज्यों में इन आरोपियों के खिलाफ साइबर ठगी से जुड़े मामले दर्ज हैं।
एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर ने बताया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाते थे। पहले वे बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का भरोसा दिलाते, फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, दस्तावेज सत्यापन, बीमा क्लियरेंस और अन्य शुल्क के नाम पर किस्तों में रकम जमा कराते थे। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास होता, तब तक रकम कई बैंक खातों के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं। बीमा रिफंड, केवाईसी अपडेट, निवेश योजना, लॉटरी, इनाम और सरकारी योजना के नाम पर आने वाले कॉल, मैसेज या ईमेल पर बिना पुष्टि किए भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
दुर्ग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसे जमा न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना दे। समय पर शिकायत दर्ज होने से ठगी की गई रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।
