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रायपुर में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग शुरू नहीं, डायबिटीज मरीजों को विशेषज्ञ इलाज का इंतजार
रायपुर,(छ.ग.)
डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में शासन की मंजूरी के बावजूद एंडोक्राइनोलॉजी विभाग अब तक शुरू नहीं हो सका। आंबेडकर अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद होने के बावजूद डायबिटीज और हार्मोनल बीमारियों के मरीजों को अलग विशेषज्ञ सेवाएं नहीं मिल रही हैं।
राजधानी रायपुर के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय और डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डायबिटीज और हार्मोन से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को अब तक विशेषज्ञ उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद भी डीकेएस अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग शुरू नहीं हो सका है, जबकि आंबेडकर अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी डिग्रीधारी डॉक्टर होने के बावजूद मरीजों को इस विशेषज्ञता का लाभ नहीं मिल रहा। इससे प्रतिदिन सैकड़ों मरीज सामान्य विभागों में इलाज कराने को मजबूर हैं। मधुमेह और हार्मोनल रोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इसके बावजूद राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा शुरू नहीं होना मरीजों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
आंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 2,500 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें करीब 20 प्रतिशत यानी 500 से अधिक मरीज डायबिटीज, थायरॉयड, हार्मोन असंतुलन, पिट्यूटरी और अन्य अंतःस्रावी (एंडोक्राइन) रोगों से पीड़ित होते हैं। विशेषज्ञ विभाग नहीं होने के कारण इन मरीजों का इलाज फिलहाल मेडिसिन, जिरियाट्रिक और पीडियाट्रिक विभागों के चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। हालांकि जटिल मामलों में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट की विशेषज्ञ सलाह की जरूरत महसूस की जाती है।
राज्य शासन ने डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग स्थापित करने की मंजूरी पहले ही दे दी थी। इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी पूरी की जा चुकी हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण विभाग आज तक शुरू नहीं हो पाया। अस्पताल प्रबंधन नियमित रूप से विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के लिए वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित कर रहा है, लेकिन अब तक कोई योग्य चिकित्सक स्थायी रूप से नियुक्त नहीं हुआ है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। आंबेडकर अस्पताल में डीएम एंडोक्राइनोलॉजी की डिग्री प्राप्त एक विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद हैं। इसके बावजूद वे एंडोक्राइनोलॉजी विभाग में सेवाएं नहीं दे रहे हैं। बताया जाता है कि उनकी वर्तमान पदस्थापना पीडियाट्रिक विभाग में है।
डॉक्टर का तर्क है कि उन्हें उनकी सुपर स्पेशलिटी योग्यता के अनुरूप पद और वेतनमान नहीं मिला है। इसी कारण वे अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप सेवाएं नहीं दे रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक जानकारी के अनुसार उन्हें डीएम डिग्री के आधार पर तीन अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ दिया जा चुका है। सरकारी प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) के तहत सुपर स्पेशलिटी की पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को निर्धारित अवधि तक उसी विषय में सरकारी सेवा देना अनिवार्य होता है। इसके लिए बांड भी भरवाया जाता है।
ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकार सवाल उठा रहे हैं कि यदि किसी डॉक्टर ने सरकारी खर्च पर एंडोक्राइनोलॉजी की पढ़ाई की है तो उनकी विशेषज्ञता का उपयोग उसी विभाग में क्यों नहीं हो रहा। उनका मानना है कि इससे सरकारी संसाधनों का पूरा लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है। डायबिटीज केवल रक्त में शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है। यदि समय पर उचित इलाज और निगरानी न मिले तो यह हृदय, किडनी, आंखों, नसों और मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
इसी वजह से कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी विभागों में भी बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंचते हैं, जिनकी मूल समस्या डायबिटीज से जुड़ी होती है। एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ इन जटिलताओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डायबिटीज के अलावा थायरॉयड विकार, मोटापा, हार्मोन असंतुलन, बच्चों में ग्रोथ संबंधी समस्याएं, महिलाओं में हार्मोनल विकार और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। इन सभी बीमारियों के लिए एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है। लेकिन विशेषज्ञ विभाग उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च काफी अधिक होता है।
डीकेएस अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विभाग शुरू करने की पूरी तैयारी है। अस्पताल के उप अधीक्षक डॉ. हेमंत शर्मा के अनुसार हर महीने एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञों की भर्ती के लिए वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किए जा रहे हैं। जैसे ही योग्य डॉक्टर उपलब्ध होंगे, विभाग की शुरुआत कर दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार भी इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है ताकि मरीजों को जल्द से जल्द विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।रायपुर जैसे बड़े चिकित्सा केंद्र में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग का संचालन समय की आवश्यकता है। इससे न केवल राजधानी बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। वर्तमान में कई मरीजों को रायपुर से बाहर अन्य राज्यों के बड़े अस्पतालों में जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत आती है।
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रायपुर में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग शुरू नहीं, डायबिटीज मरीजों को विशेषज्ञ इलाज का इंतजार
रायपुर,(छ.ग.)
राजधानी रायपुर के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय और डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डायबिटीज और हार्मोन से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को अब तक विशेषज्ञ उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद भी डीकेएस अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग शुरू नहीं हो सका है, जबकि आंबेडकर अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी डिग्रीधारी डॉक्टर होने के बावजूद मरीजों को इस विशेषज्ञता का लाभ नहीं मिल रहा। इससे प्रतिदिन सैकड़ों मरीज सामान्य विभागों में इलाज कराने को मजबूर हैं। मधुमेह और हार्मोनल रोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इसके बावजूद राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा शुरू नहीं होना मरीजों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
आंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 2,500 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें करीब 20 प्रतिशत यानी 500 से अधिक मरीज डायबिटीज, थायरॉयड, हार्मोन असंतुलन, पिट्यूटरी और अन्य अंतःस्रावी (एंडोक्राइन) रोगों से पीड़ित होते हैं। विशेषज्ञ विभाग नहीं होने के कारण इन मरीजों का इलाज फिलहाल मेडिसिन, जिरियाट्रिक और पीडियाट्रिक विभागों के चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। हालांकि जटिल मामलों में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट की विशेषज्ञ सलाह की जरूरत महसूस की जाती है।
राज्य शासन ने डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग स्थापित करने की मंजूरी पहले ही दे दी थी। इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी पूरी की जा चुकी हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण विभाग आज तक शुरू नहीं हो पाया। अस्पताल प्रबंधन नियमित रूप से विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के लिए वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित कर रहा है, लेकिन अब तक कोई योग्य चिकित्सक स्थायी रूप से नियुक्त नहीं हुआ है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। आंबेडकर अस्पताल में डीएम एंडोक्राइनोलॉजी की डिग्री प्राप्त एक विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद हैं। इसके बावजूद वे एंडोक्राइनोलॉजी विभाग में सेवाएं नहीं दे रहे हैं। बताया जाता है कि उनकी वर्तमान पदस्थापना पीडियाट्रिक विभाग में है।
डॉक्टर का तर्क है कि उन्हें उनकी सुपर स्पेशलिटी योग्यता के अनुरूप पद और वेतनमान नहीं मिला है। इसी कारण वे अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप सेवाएं नहीं दे रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक जानकारी के अनुसार उन्हें डीएम डिग्री के आधार पर तीन अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ दिया जा चुका है। सरकारी प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) के तहत सुपर स्पेशलिटी की पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को निर्धारित अवधि तक उसी विषय में सरकारी सेवा देना अनिवार्य होता है। इसके लिए बांड भी भरवाया जाता है।
ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकार सवाल उठा रहे हैं कि यदि किसी डॉक्टर ने सरकारी खर्च पर एंडोक्राइनोलॉजी की पढ़ाई की है तो उनकी विशेषज्ञता का उपयोग उसी विभाग में क्यों नहीं हो रहा। उनका मानना है कि इससे सरकारी संसाधनों का पूरा लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है। डायबिटीज केवल रक्त में शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है। यदि समय पर उचित इलाज और निगरानी न मिले तो यह हृदय, किडनी, आंखों, नसों और मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
इसी वजह से कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी विभागों में भी बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंचते हैं, जिनकी मूल समस्या डायबिटीज से जुड़ी होती है। एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ इन जटिलताओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डायबिटीज के अलावा थायरॉयड विकार, मोटापा, हार्मोन असंतुलन, बच्चों में ग्रोथ संबंधी समस्याएं, महिलाओं में हार्मोनल विकार और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। इन सभी बीमारियों के लिए एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है। लेकिन विशेषज्ञ विभाग उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च काफी अधिक होता है।
डीकेएस अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विभाग शुरू करने की पूरी तैयारी है। अस्पताल के उप अधीक्षक डॉ. हेमंत शर्मा के अनुसार हर महीने एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञों की भर्ती के लिए वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किए जा रहे हैं। जैसे ही योग्य डॉक्टर उपलब्ध होंगे, विभाग की शुरुआत कर दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार भी इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है ताकि मरीजों को जल्द से जल्द विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।रायपुर जैसे बड़े चिकित्सा केंद्र में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग का संचालन समय की आवश्यकता है। इससे न केवल राजधानी बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। वर्तमान में कई मरीजों को रायपुर से बाहर अन्य राज्यों के बड़े अस्पतालों में जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत आती है।
