भारतीय पर्वतारोही ने माउंट अकोंकागुआ पर रचा इतिहास

डिजिटल डेस्क

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दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी पर सबसे कम समय में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने

एक भारतीय पर्वतारोही ने दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट अकोंकागुआ (6,962 मीटर) पर सफल चढ़ाई कर नया इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ वे न केवल माउंट अकोंकागुआ पर चढ़ाई करने वाले सबसे वरिष्ठ आयु के भारतीय बन गए हैं, बल्कि सबसे कम समय में यह शिखर फतह करने वाले पहले भारतीय का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज हुआ है।

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माउंट अकोंकागुआ अर्जेंटीना के एंडीज पर्वत श्रृंखला में स्थित है और यह हिमालय के बाहर विश्व की सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है। भारतीय पर्वतारोही ने कठिन मौसम, अत्यधिक ऊंचाई और सीमित ऑक्सीजन जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए इस शिखर पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया।

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कैसे हासिल हुई सफलता?
यह अभियान हाल ही में संपन्न हुआ, जिसमें पर्वतारोही ने तय समय से कम अवधि में चढ़ाई पूरी कर अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। उच्च ऊंचाई पर तेज हवाएं, शून्य से नीचे तापमान और शारीरिक सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा के बावजूद, अनुशासित प्रशिक्षण और अनुभव ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।

WhatsApp Image 2026-02-04 at 12.45.16 PMक्यों है यह उपलब्धि महत्वपूर्ण?
माउंट अकोंकागुआ को दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में गिना जाता है। यहां हर साल कई अनुभवी पर्वतारोही भी असफल लौटते हैं। ऐसे में एक भारतीय द्वारा न केवल शिखर फतह करना, बल्कि सबसे कम समय में यह उपलब्धि हासिल करना, भारत को अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण मानचित्र पर और मजबूत करता है। यह सफलता उम्र को बाधा मानने की धारणा को भी चुनौती देती है।

पर्वतारोही ने इस अभियान के लिए लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक तैयारी की। उच्च ऊंचाई पर अभ्यास, मौसम अध्ययन और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन इस चढ़ाई का अहम हिस्सा रहा। अभियान के दौरान स्थानीय गाइड और तकनीकी टीम का सहयोग भी लिया गया।

प्रतिक्रिया और संदेश
सफलता के बाद पर्वतारोही ने कहा कि यह उपलब्धि ईश्वर की कृपा, परिवार, शुभचिंतकों और सहयोगियों के समर्थन के बिना संभव नहीं थी। उन्होंने इसे भारत के युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों दोनों के लिए प्रेरणा बताया और कहा कि संकल्प और अनुशासन के साथ असंभव लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

इस ऐतिहासिक चढ़ाई के बाद पर्वतारोही भविष्य में अन्य अंतरराष्ट्रीय अभियानों और युवाओं को पर्वतारोहण के लिए प्रेरित करने की दिशा में काम करने की योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारतीय पर्वतारोहण को नई पहचान देने के साथ-साथ साहसिक खेलों में देश की भागीदारी को भी बढ़ावा देगी।

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