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रायपुर के कचना स्वस्तिक नगर में गहराया पेयजल संकट, 850 परिवार एक बोर पर निर्भर; नेता प्रतिपक्ष ने दिए टैंकर आपूर्ति के निर्देश
रायपुर (छ.ग.)
एक साल से जारी पानी की किल्लत, निगम से शिकायतें बेअसर; मौके पर पहुंचे आकाश तिवारी, स्थायी समाधान के लिए बोर खनन की मांग
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कचना क्षेत्र स्थित स्वस्तिक नगर में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। हालात यह हैं कि बीते करीब एक साल से कॉलोनी के लगभग 850 परिवार केवल एक बोर के पानी पर निर्भर हैं। सीमित जल आपूर्ति के कारण रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं और कई बार पानी को लेकर आपसी विवाद की स्थिति भी बन रही है।
स्थानीय रहवासियों के अनुसार, समस्या को लेकर जोन क्रमांक-09 कार्यालय से लेकर रायपुर नगर निगम मुख्यालय तक कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों की ओर से केवल आश्वासन दिए गए और पूरा साल निकल गया, जबकि जल संकट जस का तस बना हुआ है।
मौके पर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष, अधिकारियों से की बात
पेयजल संकट की जानकारी मिलने पर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी स्वस्तिक नगर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद किया। उन्होंने मौके पर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर तत्काल टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
आकाश तिवारी ने कहा कि यह मामला केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद यदि नागरिकों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर चूक को दर्शाता है।
स्थायी समाधान की मांग, आंदोलन की चेतावनी
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि स्वस्तिक नगर में अस्थायी इंतजाम से काम नहीं चलेगा और स्थायी समाधान के लिए नए बोर का खनन जरूरी है। उन्होंने कहा कि वे इस मांग को लेकर रहवासियों के साथ खड़े हैं और हर स्तर पर दबाव बनाएंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम और संबंधित विभागों ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो रहवासियों के साथ मिलकर निगम मुख्यालय का घेराव किया जाएगा। उनका कहना था कि अभी गर्मी का मौसम पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है और यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि नेता प्रतिपक्ष के हस्तक्षेप के बाद कम से कम तात्कालिक राहत मिलेगी। हालांकि, रहवासी स्थायी जलापूर्ति व्यवस्था लागू होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर टिकी हैं कि वह कब तक इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान करता है।
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