बिलासपुर में फिर सख्त हुई पुलिसिंग, बीट गश्त व्यवस्था दोबारा लागू

बिलासपुर (छ.ग.)

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तीन शिफ्ट में मैदान में उतरेंगे जवान, एसएसपी ने दिखाई हरी झंडी, अपराध नियंत्रण पर रहेगा फोकस

शहर और ग्रामीण इलाकों में अपराधों पर अंकुश लगाने और पुलिस की जमीनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बिलासपुर पुलिस ने बीट गश्त व्यवस्था को नए सिरे से लागू कर दिया है। मंगलवार शाम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने सभी थाना क्षेत्रों के बीट प्रभारियों और जवानों को हरी झंडी दिखाकर फील्ड में रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य सूचना तंत्र को मजबूत करना और अपराधियों पर सतत निगरानी रखना है।

नई व्यवस्था के तहत जिले के सभी थानों में बीट प्रणाली प्रभावी कर दी गई है। शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक थाना अंतर्गत तीन से चार बीट बनाई गई हैं, जहां जवान तीन शिफ्ट में गश्त करेंगे। पहली शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक, दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक और तीसरी शिफ्ट रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सक्रिय रहेगी। रात की शिफ्ट में बीट प्रभारी हथियार के साथ गश्त करेंगे।

ग्रामीण इलाकों में क्षेत्रफल अधिक होने के कारण दो शिफ्ट में गश्त की व्यवस्था की गई है। यहां प्रत्येक थाना क्षेत्र में दो से तीन बीट तय की गई हैं। पुलिस का दावा है कि इस व्यवस्था से गांवों में चोरी, अवैध गतिविधियों और असामाजिक तत्वों पर बेहतर नियंत्रण हो सकेगा।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार बीते तीन वर्षों से बीट प्रणाली लगभग निष्क्रिय हो चुकी थी। थानों की निर्भरता तकनीकी इनपुट, सीसीटीवी फुटेज और सीमित मुखबिरों तक सिमट गई थी। ऐसे मामलों में जहां तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध नहीं होते थे, आरोपियों तक पहुंचने में देरी होती थी। इसी कमी को दूर करने के लिए बीट व्यवस्था को पुनर्गठित किया गया है।

हालांकि, बल की कमी को लेकर चिंता भी सामने आई है। नई व्यवस्था में हवलदारों को भी बीट गश्त में लगाया गया है, जिससे उन पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ेगा। शहरी क्षेत्रों में एक बीट पर एक समय में छह जवान तैनात रहेंगे और तीन शिफ्ट में कुल 24 जवान व्यस्त रहेंगे। इससे थानों के आंतरिक कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि मानक कार्यप्रणाली के अनुसार बीट प्रणाली लागू की गई है। इससे न केवल पुलिसिंग में कसावट आएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर अपराधों की त्वरित जानकारी भी मिलेगी। पुलिस का मानना है कि लगातार गश्त से अपराधियों में भय बनेगा और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

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