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रीवा से जुड़ा था शोमैन राज कपूर का खास रिश्ता, यहीं आई थी उनकी बारात
पुण्यतिथि पर याद किए गए राज कपूर, रीवा में हुआ था विवाह; पत्नी कृष्णा राज कपूर के नाम पर बना है भव्य ऑडिटोरियम
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी महान कलाकारों का जिक्र होता है तो राज कपूर का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है। अभिनेता, निर्माता और निर्देशक के रूप में उन्होंने हिंदी सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी फिल्मों के इस महान शोमैन का मध्यप्रदेश के रीवा शहर से भी एक बेहद खास और भावनात्मक रिश्ता रहा है। यह रिश्ता सिर्फ एक औपचारिक संबंध नहीं था, बल्कि उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक से जुड़ा हुआ था। वर्ष 1946 में राज कपूर की बारात रीवा आई थी और इसी ऐतिहासिक शहर में उनका विवाह संपन्न हुआ था।
राज कपूर और रीवा का यह संबंध आज भी शहर के लोगों के लिए गर्व का विषय माना जाता है। उस दौर में यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं था, बल्कि उस समय की एक चर्चित सामाजिक घटना भी थी। बताया जाता है कि मई 1946 में राज कपूर का विवाह कृष्णा मल्होत्रा से हुआ था, जिन्हें बाद में दुनिया कृष्णा राज कपूर के नाम से जानने लगी। उस समय कृष्णा के पिता करतार नाथ मल्होत्रा विंध्य क्षेत्र में पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी के पद पर कार्यरत थे। उनकी पोस्टिंग रीवा में थी, इसलिए विवाह समारोह का आयोजन भी यहीं किया गया।
ऐतिहासिक जानकारियों के अनुसार विवाह समारोह रीवा स्थित तत्कालीन आईजी के सरकारी बंगले में संपन्न हुआ था। उस समय यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया था। रीवा के पुराने परिवारों और इतिहास से जुड़े लोगों के बीच आज भी इस विवाह की यादें सुनने को मिल जाती हैं। कहा जाता है कि विवाह समारोह में उस दौर की कई प्रतिष्ठित हस्तियां भी शामिल हुई थीं। हालांकि समय के साथ कई दस्तावेज और प्रत्यक्ष स्मृतियां धुंधली हो गईं, लेकिन रीवा और कपूर परिवार का यह रिश्ता आज भी लोगों की यादों में जीवित है।
राज कपूर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में भारतीय सिनेमा को ऐसी पहचान दिलाई, जिसे दुनिया आज भी याद करती है। उन्होंने आम आदमी के संघर्ष, सपनों और भावनाओं को अपनी फिल्मों के माध्यम से बड़े पर्दे पर उतारा। 'आवारा', 'श्री 420', 'बरसात', 'संगम', 'जिस देश में गंगा बहती है' और 'मेरा नाम जोकर' जैसी फिल्मों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। खासकर रूस और पूर्व सोवियत देशों में उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके गीत और फिल्में वहां के लोगों के बीच बेहद पसंद की जाती थीं। ऐसे महान कलाकार का जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रीवा से जुड़ा होना शहर के लिए सम्मान की बात मानी जाती है।
रीवा और कपूर परिवार के इस ऐतिहासिक संबंध की चर्चा कई दशकों तक लगातार होती रही। वर्ष 2020 में जब दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का निधन हुआ, तब राष्ट्रीय मीडिया में भी रीवा और कपूर परिवार के रिश्ते का उल्लेख प्रमुखता से किया गया था। इसके बाद एक बार फिर लोगों का ध्यान इस ऐतिहासिक जुड़ाव की ओर गया। स्थानीय लोगों ने भी उस समय पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया था कि रीवा का नाम कपूर परिवार के इतिहास में हमेशा विशेष स्थान रखता है।
इसी संबंध को सम्मान देने और स्मृतियों को सहेजने के उद्देश्य से रीवा में कृष्णा राज कपूर के नाम पर एक भव्य ऑडिटोरियम का निर्माण कराया गया। आज 'कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम' शहर की प्रमुख पहचान बन चुका है। यहां समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन, सरकारी बैठकें, सामाजिक गतिविधियां और विभिन्न औद्योगिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह भवन केवल एक ऑडिटोरियम नहीं बल्कि रीवा और कपूर परिवार के ऐतिहासिक रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।
स्थानीय स्तर पर एक और दिलचस्प कहानी वर्षों से सुनाई जाती रही है। कहा जाता है कि राज कपूर और कृष्णा कपूर ने रीवा शहर के प्रति अपने विशेष लगाव के कारण अपनी बेटी का नाम रीमा रखा था। हालांकि इस कहानी को लेकर आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन रीवा के लोगों के बीच यह किस्सा काफी लोकप्रिय है। लोग इसे कपूर परिवार और रीवा के बीच भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानते हैं। आज भी शहर के बुजुर्ग इस प्रसंग को बड़े गर्व के साथ सुनाते हैं।
रीवा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक राजघराने और दुनिया भर में प्रसिद्ध सफेद बाघों के लिए जाना जाता है। लेकिन राज कपूर से जुड़ा यह अध्याय शहर की पहचान को एक अलग ही आयाम देता है। यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि उस दौर की याद है जब भारतीय सिनेमा का भविष्य लिखने वाला एक युवा कलाकार अपने जीवन की नई शुरुआत करने के लिए विंध्य की इस धरती पर आया था। आज राज कपूर की पुण्यतिथि पर जब देश उन्हें याद कर रहा है, तब रीवा भी गर्व के साथ उस सुनहरे अध्याय को याद कर रहा है जिसने इस शहर को भारतीय सिनेमा के इतिहास से हमेशा के लिए जोड़ दिया। समय भले बदल गया हो, लेकिन शोमैन राज कपूर और रीवा का यह रिश्ता आज भी लोगों की स्मृतियों में उतना ही जीवंत है जितना दशकों पहले था।
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रीवा से जुड़ा था शोमैन राज कपूर का खास रिश्ता, यहीं आई थी उनकी बारात
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी महान कलाकारों का जिक्र होता है तो राज कपूर का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है। अभिनेता, निर्माता और निर्देशक के रूप में उन्होंने हिंदी सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी फिल्मों के इस महान शोमैन का मध्यप्रदेश के रीवा शहर से भी एक बेहद खास और भावनात्मक रिश्ता रहा है। यह रिश्ता सिर्फ एक औपचारिक संबंध नहीं था, बल्कि उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक से जुड़ा हुआ था। वर्ष 1946 में राज कपूर की बारात रीवा आई थी और इसी ऐतिहासिक शहर में उनका विवाह संपन्न हुआ था।
राज कपूर और रीवा का यह संबंध आज भी शहर के लोगों के लिए गर्व का विषय माना जाता है। उस दौर में यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं था, बल्कि उस समय की एक चर्चित सामाजिक घटना भी थी। बताया जाता है कि मई 1946 में राज कपूर का विवाह कृष्णा मल्होत्रा से हुआ था, जिन्हें बाद में दुनिया कृष्णा राज कपूर के नाम से जानने लगी। उस समय कृष्णा के पिता करतार नाथ मल्होत्रा विंध्य क्षेत्र में पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी के पद पर कार्यरत थे। उनकी पोस्टिंग रीवा में थी, इसलिए विवाह समारोह का आयोजन भी यहीं किया गया।
ऐतिहासिक जानकारियों के अनुसार विवाह समारोह रीवा स्थित तत्कालीन आईजी के सरकारी बंगले में संपन्न हुआ था। उस समय यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया था। रीवा के पुराने परिवारों और इतिहास से जुड़े लोगों के बीच आज भी इस विवाह की यादें सुनने को मिल जाती हैं। कहा जाता है कि विवाह समारोह में उस दौर की कई प्रतिष्ठित हस्तियां भी शामिल हुई थीं। हालांकि समय के साथ कई दस्तावेज और प्रत्यक्ष स्मृतियां धुंधली हो गईं, लेकिन रीवा और कपूर परिवार का यह रिश्ता आज भी लोगों की यादों में जीवित है।
राज कपूर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में भारतीय सिनेमा को ऐसी पहचान दिलाई, जिसे दुनिया आज भी याद करती है। उन्होंने आम आदमी के संघर्ष, सपनों और भावनाओं को अपनी फिल्मों के माध्यम से बड़े पर्दे पर उतारा। 'आवारा', 'श्री 420', 'बरसात', 'संगम', 'जिस देश में गंगा बहती है' और 'मेरा नाम जोकर' जैसी फिल्मों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। खासकर रूस और पूर्व सोवियत देशों में उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके गीत और फिल्में वहां के लोगों के बीच बेहद पसंद की जाती थीं। ऐसे महान कलाकार का जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रीवा से जुड़ा होना शहर के लिए सम्मान की बात मानी जाती है।
रीवा और कपूर परिवार के इस ऐतिहासिक संबंध की चर्चा कई दशकों तक लगातार होती रही। वर्ष 2020 में जब दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का निधन हुआ, तब राष्ट्रीय मीडिया में भी रीवा और कपूर परिवार के रिश्ते का उल्लेख प्रमुखता से किया गया था। इसके बाद एक बार फिर लोगों का ध्यान इस ऐतिहासिक जुड़ाव की ओर गया। स्थानीय लोगों ने भी उस समय पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया था कि रीवा का नाम कपूर परिवार के इतिहास में हमेशा विशेष स्थान रखता है।
इसी संबंध को सम्मान देने और स्मृतियों को सहेजने के उद्देश्य से रीवा में कृष्णा राज कपूर के नाम पर एक भव्य ऑडिटोरियम का निर्माण कराया गया। आज 'कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम' शहर की प्रमुख पहचान बन चुका है। यहां समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन, सरकारी बैठकें, सामाजिक गतिविधियां और विभिन्न औद्योगिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह भवन केवल एक ऑडिटोरियम नहीं बल्कि रीवा और कपूर परिवार के ऐतिहासिक रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।
स्थानीय स्तर पर एक और दिलचस्प कहानी वर्षों से सुनाई जाती रही है। कहा जाता है कि राज कपूर और कृष्णा कपूर ने रीवा शहर के प्रति अपने विशेष लगाव के कारण अपनी बेटी का नाम रीमा रखा था। हालांकि इस कहानी को लेकर आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन रीवा के लोगों के बीच यह किस्सा काफी लोकप्रिय है। लोग इसे कपूर परिवार और रीवा के बीच भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानते हैं। आज भी शहर के बुजुर्ग इस प्रसंग को बड़े गर्व के साथ सुनाते हैं।
रीवा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक राजघराने और दुनिया भर में प्रसिद्ध सफेद बाघों के लिए जाना जाता है। लेकिन राज कपूर से जुड़ा यह अध्याय शहर की पहचान को एक अलग ही आयाम देता है। यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि उस दौर की याद है जब भारतीय सिनेमा का भविष्य लिखने वाला एक युवा कलाकार अपने जीवन की नई शुरुआत करने के लिए विंध्य की इस धरती पर आया था। आज राज कपूर की पुण्यतिथि पर जब देश उन्हें याद कर रहा है, तब रीवा भी गर्व के साथ उस सुनहरे अध्याय को याद कर रहा है जिसने इस शहर को भारतीय सिनेमा के इतिहास से हमेशा के लिए जोड़ दिया। समय भले बदल गया हो, लेकिन शोमैन राज कपूर और रीवा का यह रिश्ता आज भी लोगों की स्मृतियों में उतना ही जीवंत है जितना दशकों पहले था।
