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पीएम मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने की मुलाकात, रक्षा, व्यापार और तकनीक सहयोग बढ़ाने पर की बातचीत
नेशनल डेस्क
भारत-दक्षिण कोरिया बैठक में मोदी और ली जे-म्युंग ने व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, संबंधों को नई दिशा मिली।
नई दिल्ली में सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच हुई अहम बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया। राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में आयोजित इस बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ली जे-म्युंग का औपचारिक स्वागत किया, जहां पारंपरिक समारोह के जरिए दोनों देशों की मित्रता को रेखांकित किया गया। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने विशेष सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। अधिकारियों के अनुसार, चर्चा में रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण, साइबर सुरक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग भी एजेंडे में प्रमुख रहा, जहां द्विपक्षीय व्यापार को और विस्तार देने पर जोर दिया गया।
रणनीतिक सहयोग पर फोकस
दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। सूत्रों के मुताबिक, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत-दक्षिण कोरिया विशेष सामरिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच गहरे और भरोसेमंद संबंधों को नई गति देने पर जोर दिया गया है।
आर्थिक रिश्तों की मजबूती
भारत दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए तेजी से उभरता निवेश केंद्र बन रहा है। व्यापार और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर विशेष सहमति बनी। देखा जाए तो भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष सामरिक साझेदारी की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। तब से दोनों देश रक्षा, व्यापार और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते रहे हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर से अधिक का है, और इसे आगे बढ़ाने के लिए नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।
इस यात्रा के दौरान उच्च-स्तरीय वार्ता में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रक्षा सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक बैटरी सप्लाई चेन में साझेदारी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बन चुका है।
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भारत पहुंचने से पहले विमान से एक वीडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया। उन्होंने दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन और तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, दोनों देशों की साझेदारी का महत्व और बढ़ जाता है आगे की बात करें तो इस दौरे के बाद कई द्विपक्षीय समझौतों और निवेश प्रस्तावों पर प्रगति देखने को मिल सकती है।
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पीएम मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने की मुलाकात, रक्षा, व्यापार और तकनीक सहयोग बढ़ाने पर की बातचीत
नेशनल डेस्क
नई दिल्ली में सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच हुई अहम बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया। राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में आयोजित इस बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ली जे-म्युंग का औपचारिक स्वागत किया, जहां पारंपरिक समारोह के जरिए दोनों देशों की मित्रता को रेखांकित किया गया। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने विशेष सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। अधिकारियों के अनुसार, चर्चा में रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण, साइबर सुरक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग भी एजेंडे में प्रमुख रहा, जहां द्विपक्षीय व्यापार को और विस्तार देने पर जोर दिया गया।
रणनीतिक सहयोग पर फोकस
दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। सूत्रों के मुताबिक, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत-दक्षिण कोरिया विशेष सामरिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच गहरे और भरोसेमंद संबंधों को नई गति देने पर जोर दिया गया है।
आर्थिक रिश्तों की मजबूती
भारत दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए तेजी से उभरता निवेश केंद्र बन रहा है। व्यापार और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर विशेष सहमति बनी। देखा जाए तो भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष सामरिक साझेदारी की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। तब से दोनों देश रक्षा, व्यापार और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते रहे हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर से अधिक का है, और इसे आगे बढ़ाने के लिए नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।
इस यात्रा के दौरान उच्च-स्तरीय वार्ता में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रक्षा सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक बैटरी सप्लाई चेन में साझेदारी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बन चुका है।
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भारत पहुंचने से पहले विमान से एक वीडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया। उन्होंने दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन और तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, दोनों देशों की साझेदारी का महत्व और बढ़ जाता है आगे की बात करें तो इस दौरे के बाद कई द्विपक्षीय समझौतों और निवेश प्रस्तावों पर प्रगति देखने को मिल सकती है।
