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लालू परिवार की सुरक्षा पर सियासी घमासान, तेजस्वी ने भी लौटाई सिक्योरिटी
Digital Desk
Z+ हटने के बाद बिहार में बढ़ा राजनीतिक तनाव, रोहिणी का सरकार पर हमला
बिहार की राजनीति एक बार फिर लालू प्रसाद यादव परिवार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा में आ गई है। राज्य सरकार द्वारा लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा में बदलाव किए जाने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। इसी क्रम में अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी Y+ सुरक्षा सरकार को वापस लौटा दी है, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है। यह पूरा मामला अब सुरक्षा से ज्यादा राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
तेजस्वी यादव इस समय दिल्ली में हैं, लेकिन उन्होंने 1 पोलो रोड स्थित अपने सरकारी आवास से सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का निर्देश दिया। इससे पहले उनके माता-पिता लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने भी अपने आवासों से सुरक्षा कर्मियों को हटाने का फैसला लिया था। बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा Z+ सुरक्षा हटाए जाने के बाद यह कदम सामने आया है। हालांकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा पूरी तरह हटाई नहीं गई है, बल्कि उसे नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।
सरकारी आदेश के मुताबिक, राबड़ी देवी को अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम 2010 के तहत सुरक्षा दी जा रही है, जिसमें हाउस गार्ड, महिला और पुरुष अंगरक्षक, बुलेटप्रूफ वाहन और एस्कॉर्ट वाहन शामिल हैं। वहीं लालू प्रसाद यादव को भी संशोधित सुरक्षा व्यवस्था के तहत हाउस गार्ड और अंगरक्षक प्रदान किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह बदलाव सुरक्षा मानकों के मूल्यांकन के आधार पर किया गया है, न कि किसी राजनीतिक कारण से।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कवर में कटौती के बाद दिखावे की सुरक्षा रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। रोहिणी ने आरोप लगाया कि यह फैसला राजनीतिक दुर्भावना से लिया गया है और इसे परिवार को निशाना बनाने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लालू-राबड़ी परिवार की असली सुरक्षा बिहार की जनता है।
रोहिणी आचार्य के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिवार के किसी सदस्य को कोई नुकसान होता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उनके इस बयान को लेकर सत्ता पक्ष की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है और इसे अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी बताया गया है।
दूसरी ओर बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि सुरक्षा में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है, बल्कि यह केवल प्रशासनिक पुनर्गठन है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण राज्य और जिला स्तरीय समितियों द्वारा किया जाता है, और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू और राबड़ी देवी को सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं मिलती रहेंगी।
इस बीच लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी द्वारा अपने आवासों से सुरक्षाकर्मियों को हटाने का कदम भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने सरकारी आदेश के बाद अपने आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को तुरंत वापस भेज दिया, जिसके बाद सुरक्षा कर्मी परिसर के बाहर खड़े नजर आए।
यह पूरा मामला अब केवल सुरक्षा व्यवस्था का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष इसे सरकार की नीयत पर सवाल उठाने का मौका बता रहा है, जबकि सरकार इसे नियमों के अनुसार लिया गया निर्णय बता रही है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है और बिहार की राजनीति में नया टकराव पैदा कर सकता है। स्थिति यह है कि लालू परिवार और सरकार के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खींचतान जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
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लालू परिवार की सुरक्षा पर सियासी घमासान, तेजस्वी ने भी लौटाई सिक्योरिटी
Digital Desk
बिहार की राजनीति एक बार फिर लालू प्रसाद यादव परिवार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा में आ गई है। राज्य सरकार द्वारा लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा में बदलाव किए जाने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। इसी क्रम में अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी Y+ सुरक्षा सरकार को वापस लौटा दी है, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है। यह पूरा मामला अब सुरक्षा से ज्यादा राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
तेजस्वी यादव इस समय दिल्ली में हैं, लेकिन उन्होंने 1 पोलो रोड स्थित अपने सरकारी आवास से सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का निर्देश दिया। इससे पहले उनके माता-पिता लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने भी अपने आवासों से सुरक्षा कर्मियों को हटाने का फैसला लिया था। बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा Z+ सुरक्षा हटाए जाने के बाद यह कदम सामने आया है। हालांकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा पूरी तरह हटाई नहीं गई है, बल्कि उसे नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।
सरकारी आदेश के मुताबिक, राबड़ी देवी को अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम 2010 के तहत सुरक्षा दी जा रही है, जिसमें हाउस गार्ड, महिला और पुरुष अंगरक्षक, बुलेटप्रूफ वाहन और एस्कॉर्ट वाहन शामिल हैं। वहीं लालू प्रसाद यादव को भी संशोधित सुरक्षा व्यवस्था के तहत हाउस गार्ड और अंगरक्षक प्रदान किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह बदलाव सुरक्षा मानकों के मूल्यांकन के आधार पर किया गया है, न कि किसी राजनीतिक कारण से।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कवर में कटौती के बाद दिखावे की सुरक्षा रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। रोहिणी ने आरोप लगाया कि यह फैसला राजनीतिक दुर्भावना से लिया गया है और इसे परिवार को निशाना बनाने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लालू-राबड़ी परिवार की असली सुरक्षा बिहार की जनता है।
रोहिणी आचार्य के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिवार के किसी सदस्य को कोई नुकसान होता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उनके इस बयान को लेकर सत्ता पक्ष की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है और इसे अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी बताया गया है।
दूसरी ओर बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि सुरक्षा में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है, बल्कि यह केवल प्रशासनिक पुनर्गठन है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण राज्य और जिला स्तरीय समितियों द्वारा किया जाता है, और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू और राबड़ी देवी को सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं मिलती रहेंगी।
इस बीच लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी द्वारा अपने आवासों से सुरक्षाकर्मियों को हटाने का कदम भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने सरकारी आदेश के बाद अपने आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को तुरंत वापस भेज दिया, जिसके बाद सुरक्षा कर्मी परिसर के बाहर खड़े नजर आए।
यह पूरा मामला अब केवल सुरक्षा व्यवस्था का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष इसे सरकार की नीयत पर सवाल उठाने का मौका बता रहा है, जबकि सरकार इसे नियमों के अनुसार लिया गया निर्णय बता रही है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है और बिहार की राजनीति में नया टकराव पैदा कर सकता है। स्थिति यह है कि लालू परिवार और सरकार के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खींचतान जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
